फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया के बाद अब यूरोप के एक अन्य देश ग्रीस में भी विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो चुका है। ग्रीस के विभिन्न शहरों में आम नागरिकों ने बढ़ती महंगाई, रोजी-रोटी के गहरे संकट और महंगे ईंधन के खिलाफ सड़कों पर उतरकर तीव्र रोष व्यक्त किया है। इस आंदोलन का सबसे बड़ा और प्रमुख प्रदर्शन देश की राजधानी एथेंस में देखने को मिला, जहां हजारों की संख्या में लोगों ने एकजुट होकर सरकार विरोधी मार्च निकाला। हालांकि राहत की बात यह रही कि एथेंस के इस प्रदर्शन में अभी तक किसी भी प्रकार की हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई है और स्थिति नियंत्रण में बनी हुई है।
फ्रांस में प्रदर्शनों से निपटने की प्रशासनिक तैयारियां
दूसरी तरफ फ्रांस में तमाम पाबंदियों और रात्रि कर्फ्यू के बावजूद देश के कई शहरों में प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थिति को देखते हुए विभिन्न लेबर यूनियनों ने आने वाले शनिवार को पूरे देश में राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। इस आसन्न स्थिति के मद्देनजर फ्रांस के प्रधानमंत्री ने बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि उनकी सरकार इन नए विरोध प्रदर्शनों से सख्ती से निपटने के लिए अभी से पूरी तैयारी में जुट गई है। इसके साथ ही फ्रांस के पड़ोसी देश इटली में भी प्रदर्शनों के दौरान होने वाली तोड़फोड़, हिंसा और लूटपाट की घटनाओं पर लगाम कसने के लिए जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने एक नया ऑर्डिनेंस जारी कर दिया है जिसके तहत सुरक्षा और कानून के प्रावधानों को अत्यधिक कड़ा कर दिया गया है।
इटली में लागू किए गए कड़े और सख्त कानूनी प्रावधान
इटली सरकार द्वारा लाए गए इन नए सिक्योरिटी नियमों के अनुसार अब प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियातन हिरासत का दायरा बढ़ा दिया गया है और यह नियम अब नाबालिगों पर भी पूरी तरह लागू होगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि अब 16 साल से अधिक उम्र के बच्चों पर भी कानून के तहत आसानी से मुकदमा चलाया जा सकेगा। इसके अलावा प्रदर्शनों के दौरान चेहरे छिपाकर घूमने वाले नकाबपोश उपद्रवियों और हुड़दंगियों की पहचान करने के लिए आधुनिक AI तकनीक की मदद ली जाएगी। नए नियमों के अंतर्गत हिंसक प्रदर्शनों को एक बिल्कुल अलग और गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया है। इस तरह के गंभीर अपराध में संलिप्त पाए जाने वाले आरोपियों को 5 साल तक की लंबी जेल की सजा और 20 हजार यूरो तक का भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है।
दोषियों के लिए सजा का दायरा और मिलान में सुरक्षा व्यवस्था
यदि कोई अपराधी कानून से बचने के लिए अपना चेहरा ढंकता है या किसी व्यक्ति को शारीरिक चोट पहुंचाता है, तो उसकी सजा और जुर्माने की राशि में और अधिक बढ़ोतरी कर दी जाएगी। इसके अलावा नए नियमों के तहत यह भी प्रावधान किया गया है कि यदि कोई नाबालिग बच्चा किसी भी प्रकार की हिंसा में शामिल पाया जाता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई तो होगी ही, साथ ही हिंसा के दौरान हुए कुल नुकसान की भरपाई उसके माता-पिता की संपत्ति से वसूली जाएगी। कानून-व्यवस्था को पूरी तरह बनाए रखने के लिए सरकार ने मिलान शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद करने का कड़ा निर्णय लिया है। इसी कड़ी में साल के अंत तक मिलान में सुरक्षा के मद्देनजर 500 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती किए जाने का भी आधिकारिक फैसला लिया गया है।
हिंसा और सुरक्षाबलों पर हमलों को किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि जिस प्रकार से सुनियोजित तरीके से हिंसा फैलाई गई और देश के सुरक्षाबलों पर कायरतापूर्ण हमले किए गए, उन्हें कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे बेलगाम और हिंसक उपद्रवियों से सख्ती से निपटने के लिए ही उनकी सरकार ये नए कड़े नियम लेकर आई है, जिनके तहत 5 साल तक की कैद और 20 हजार यूरो तक के जुर्माने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। इससे पहले फ्रांस के राष्ट्रपति इमेनुअल मेक्रों ने भी बहुत कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा था कि जिसने भी सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ की है, उसे इसकी भारी कीमत चुकानी होगी, और इसी नीति के तहत फ्रांस में अब तक बड़ी संख्या में उपद्रवियों की गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं।
























