रोम के जेमेली अस्पताल में फेफड़े के निचले हिस्से को हटाने के लिए हुई सर्जरी के बाद 71 वर्षीय पोप लियो स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। वेटिकन की ओर से साझा की गई मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 मिनट तक चले इस ऑपरेशन के बाद उनकी रिकवरी डॉक्टरों की उम्मीदों के अनुरूप तेजी से आगे बढ़ रही है। अस्पताल के कमरे में उन्होंने हल्की चहलकदमी शुरू कर दी है और सामान्य आहार लेना भी फिर से आरंभ कर दिया है। मंगलवार दोपहर को हुई इस प्रक्रिया के बाद की गई बायोप्सी और जांच में उनके फेफड़े में कैंसर की पुष्टि हुई थी, जिसे डॉक्टरों ने शुरुआती चरण में ही पूरी तरह अलग करने में सफलता पाई है।
ऑपरेशन के बाद की जांच और फिजियोथेरेपी
सर्जरी के बाद बुधवार सुबह पोप के कई आवश्यक रक्त परीक्षण किए गए और साथ ही एक्स-रे भी लिया गया। इन सभी नैदानिक रिपोर्टों से डॉक्टरों की टीम संतुष्ट है और उनका कहना है कि स्वास्थ्य में सुधार सामान्य गति से चल रहा है। फेफड़ों की कार्यप्रणाली को सामान्य रखने और सांस लेने की क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए उन्हें रेस्पिरेटरी फिजियोथेरेपी भी दी जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार, ऑपरेशन के तुरंत बाद पोप सामान्य रूप से होश में आ गए थे और कुछ समय तक गहन निगरानी कक्ष में रखने के बाद उन्हें उनके नियमित कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया था, जहां उन्होंने रात आराम से बिताई।
दाहिने फेफड़े के निचले हिस्से को पूरी तरह हटाया गया
वेटिकन ने इस चिकित्सा प्रक्रिया का विस्तृत ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि पोप के दाहिने फेफड़े के पूरे निचले लोब को सर्जरी के जरिए निकाल दिया गया है। डॉक्टरों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी अवांछित ऊतक पीछे न छूटे, ताकि बीमारी दोबारा न पनप सके। इस प्रक्रिया को चिकित्सा शब्दावली में रेडिकल रिमूवल कहा जाता है। पूर्व परीक्षणों में फेफड़े में एक अच्छी तरह से सीमित गांठ देखी गई थी, और पोस्ट-ऑपरेटिव जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह गांठ एडेनोकार्सिनोमा नामक फेफड़ों का कैंसर थी। बीमारी का प्रसार अन्य अंगों तक हुआ है या नहीं, इसका पता लगाने के लिए अतिरिक्त पैथोलॉजिकल टेस्ट किए जा रहे हैं।
सेंट पीटर्स स्क्वायर में खुद दी थी जानकारी
अस्पताल में भर्ती होने से पहले पोप ने साप्ताहिक रविवार की प्रार्थना के दौरान खुद ही सेंट पीटर्स स्क्वायर में एकत्र लोगों को इस आगामी सर्जरी के बारे में अवगत कराया था। उन्होंने श्रद्धालुओं को बताया था कि उनके फेफड़े में शुरुआती चरण में ही एक गांठ मिली है, जो पूरी तरह से सीमित दायरे में है, और डॉक्टरों ने समय रहते इसे निकालने का सुझाव दिया है। सामान्य तौर पर फेफड़ों की ऐसी गांठें काफी आम होती हैं और हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन इस मामले में पहले से किए गए अनुमान के अनुसार जांच में कैंसर कोशिकाओं की मौजूदगी साबित हुई। आमतौर पर फिट माने जाने वाले पोप में किसी संक्रमण या बीमारी के कोई बाहरी लक्षण नहीं देखे गए थे।
कैथोलिक समुदाय में चिंता और पूर्व पोप का इतिहास
इस बीमारी और सर्जरी की खबर सामने आने के बाद दुनिया भर के कैथोलिक समुदाय में चिंता की लहर दौड़ गई है। समुदाय के कई लोगों को पूर्व पोप फ्रांसिस के बार-बार अस्पताल जाने की घटनाएं अब भी याद हैं। पिछले साल दिवंगत हुए पोप फ्रांसिस के फेफड़े का एक हिस्सा भी उनकी युवावस्था में ही निकाल दिया गया था, जिसके चलते उन्हें जीवन के अंतिम वर्षों में बार-बार सांस से जुड़े गंभीर संक्रमणों का सामना करना पड़ा था। पोप लियो अगले लगभग एक सप्ताह तक अस्पताल में ही रहेंगे ताकि विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में उनकी स्थिति पूरी तरह स्थिर हो सके।
एडेनोकार्सिनोमा और समय पर पहचान का महत्व
फेफड़ों का एडेनोकार्सिनोमा मुख्य रूप से बलगम बनाने वाली कोशिकाओं में विकसित होता है और यह फेफड़ों के कैंसर के सबसे आम प्रकारों में से एक माना जाता है। किसी भी मरीज का दीर्घकालिक स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि बीमारी को किस चरण में पहचाना गया और उस समय व्यक्ति का समग्र स्वास्थ्य कैसा था। दशकों के चिकित्सा अनुसंधान के बाद इसके उपचार में काफी सुधार आया है। यदि नियमित स्वास्थ्य जांच के दौरान लक्षणों के प्रकट होने से पहले ही इसका पता चल जाए, तो रिकवरी की संभावनाएं बहुत बेहतर होती हैं। इसके विपरीत, अधिक उन्नत चरणों में पहुंचने पर इस बीमारी में लगातार खांसी, सांस फूलना, अत्यधिक थकान और वजन घटने जैसी गंभीर समस्याएं सामने आने लगती हैं।



















