अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक तौर पर यह बयान देकर हलचल पैदा कर दी है कि युद्धरत रूस और यूक्रेन अपने-अपने ऊर्जा ढांचे पर हमलों को तुरंत रोकने के लिए राजी हो गए हैं। इस घोषणा को तत्काल प्रभाव से लागू बताते हुए उन्होंने हालांकि समझौते की विस्तृत रूपरेखा या शर्तों का कोई आधिकारिक ब्योरा साझा नहीं किया। दूसरी ओर, मास्को की ओर से इस कथित संघर्ष विराम पर कोई औपचारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, जबकि कीव ने इस कदम का सैद्धांतिक समर्थन करने के बावजूद इसके समय और कार्यान्वयन पर गंभीर संशय जताया है।
घोषणा के तुरंत बाद यूक्रेन में बिजली संयंत्रों पर गिरे ड्रोन
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने इस समझौते की घोषणा पर शुरुआती प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बात उनके लिए बिल्कुल नई है। उन्होंने अमेरिकी मीडिया आउटलेट एक्सिओस से बातचीत के दौरान आश्चर्य व्यक्त किया और बाद में सोशल मीडिया पर स्थिति स्पष्ट की। जेलेंस्की ने लिखा कि उनके अधिकारी इस मामले में रूस के साथ अमेरिका के संवाद के स्पष्ट विवरण का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि यूक्रेन रूसी ऊर्जा ढांचे पर हमला न करने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन इसके लिए आवश्यक शर्त यह है कि रूस भी वैसी ही तत्परता दिखाए और इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति की स्पष्ट सहमति हो।
लेकिन ट्रंप के इस दावे के कुछ ही समय बाद जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट दिखाई दी। जेलेंस्की ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन से संवाद करने के बाद जानकारी दी कि राजधानी कीव में एक बिजली संयंत्र पर रूसी ड्रोन हमले के कारण बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट हो गया। इसके तुरंत बाद उत्तर-पूर्वी खारकीव क्षेत्र में भी ऊर्जा सुविधाओं को निशाना बनाया गया। यूक्रेनी राष्ट्रपति ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा ऊर्जा संघर्ष विराम की घोषणा किए जाने के ठीक बाद ये सभी हमले किए गए। इसके अतिरिक्त, खारकीव में हुए एक पिछले हमले में एक किराने की दुकान पर बमबारी से तीन लोगों की मौत की पुष्टि क्षेत्रीय अधिकारियों ने की थी।
महीनों से जारी बुनियादी ढांचे का विनाशकारी टकराव
रूस और यूक्रेन पिछले कई महीनों से एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर लगातार मिसाइल और ड्रोन से विनाशकारी हमले कर रहे हैं। मास्को का निरंतर यह तर्क रहा है कि वह जिन संयंत्रों, ग्रिडों और सबस्टेशनों को निशाना बनाता है, वे सभी वैध सैन्य लक्ष्य हैं क्योंकि वे यूक्रेन के सैन्य अभियानों और रसद आपूर्ति को सहारा देते हैं। इसके विपरीत, जेलेंस्की रूसी सीमा के गहरे भीतर स्थित तेल रिफाइनरियों और डिपो पर यूक्रेनी हमलों को रणनीतिक जरूरत बताते रहे हैं। उनका कहना है कि इन हमलों का स्पष्ट उद्देश्य रूस की युद्ध वित्तपोषण क्षमता को कमजोर करना और उसकी आर्थिक रीढ़ पर सीधा प्रहार करना है। 6 अगस्त को रूस में स्लावनेफ्ट-यानोस तेल रिफाइनरी पर हुए भीषण हमले के बाद आसमान में उठे धुएं के विशाल गुबार इस बात का स्पष्ट प्रमाण थे कि दोनों देशों में ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह चरमरा चुकी है।
घरेलू राजनीति, मध्य पूर्व संघर्ष और रूसी प्रतिबंधों में ढील
इस कथित ऊर्जा युद्धविराम के पीछे वाशिंगटन की अपनी घरेलू राजनीतिक मजबूरियां भी काम कर रही हैं। अमेरिका में आगामी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ट्रंप प्रशासन लगातार जूझ रहा है। ईरान के साथ अमेरिकी और इजरायली युद्ध के कारण जलडमरूमध्य होर्मुज का रणनीतिक जलमार्ग लगभग बंद हो गया है, जिसके माध्यम से सामान्य दिनों में दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के पेट्रोलियम उत्पाद गुजरते हैं। इस संकट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन, विशेषकर डीजल की कीमतों में भारी उछाल ला दिया है। ईंधन के बढ़े हुए दामों और व्यापक मुद्रास्फीति ने अमेरिकी जनता के बीच ट्रंप की राजनीतिक साख को गंभीर झटका दिया है।
इसी दबाव के बीच ट्रंप ने इस सप्ताह रूस के साथ एक विवादित समझौते की घोषणा की, जिसके तहत रूसी आयातों पर लगे प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटाया गया है ताकि घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतें नीचे आ सकें। हालांकि, अमेरिका और यूक्रेन के यूरोपीय सहयोगियों ने इस रियायत की कड़ी निंदा की है। जेलेंस्की ने सीधी चेतावनी दी कि यह कदम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक उपहार जैसा है, जो मास्को को यूक्रेन के खिलाफ युद्ध जारी रखने के लिए भारी वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराएगा। दूसरी तरफ, ट्रंप ने जेलेंस्की पर रूसी रिफाइनरियों पर हमले जारी रखकर पूरी दुनिया के लिए समस्याएं खड़ी करने का आरोप लगाया और यूक्रेन पर नए नेता के चुनाव कराने का खुला दबाव डाला।
चुनाव की मांग और 60 दिनों के पूर्ण युद्धविराम की यूक्रेनी शर्त
युद्धकाल में संवैधानिक प्रावधानों के तहत स्थगित किए गए चुनावों को लेकर दोनों नेताओं के बीच तकरार और बढ़ गई है। जेलेंस्की ने अमेरिकी दबाव का उत्तर देते हुए स्पष्ट घोषणा की कि यदि रूस 60 दिनों के पूर्ण संघर्ष विराम पर सहमत होता है, तो यूक्रेन तत्काल राष्ट्रीय चुनाव कराने के लिए तैयार है। इससे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति देश में नए चुनावों के अमेरिकी आह्वान का यह कहते हुए विरोध करते रहे थे कि युद्ध क्षेत्रों और रूसी कब्जे वाले इलाकों में मतदान कराना बेहद जटिल और अलोकतांत्रिक होगा। इसके विपरीत, ट्रंप ने बार-बार यूक्रेनी नेतृत्व पर युद्ध को सत्ता में बने रहने का जरिया बनाने का आरोप लगाया है। यूरोपीय मंच पर, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन दोनों ने ऊर्जा संयंत्रों पर हमले रोकने के संघर्ष विराम का खुला समर्थन किया है, भले ही इसके वास्तविक कार्यान्वयन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।



















