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राजशाही के इतिहास में बड़ा फैसला, अब बेटियां भी संभाल सकेंगी लिकटेंस्टीन की गद्दीयूरोप
16 अग॰ 2026, 1:32 am (74 दिन पहले)· 2

राजशाही के इतिहास में बड़ा फैसला, अब बेटियां भी संभाल सकेंगी लिकटेंस्टीन की गद्दी

यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन ने अपने शाही उत्तराधिकार नियमों में संशोधन कर पुरुष ज्येष्ठता की प्रथा खत्म कर दी है, जिससे अब पहली संतान चाहे बेटी हो या बेटा, सिंहासन की हकदार बनेगी।

मध्य यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन ने अपने शाही उत्तराधिकार नियमों में एक ऐतिहासिक संशोधन किया है, जिसके तहत अब महिलाओं को भी सिंहासन पर बैठने का समान अधिकार मिलेगा। नए नियमों के अनुसार, अब लिंग की परवाह किए बिना परिवार में पैदा होने वाली पहली संतान ही गद्दी की स्वाभाविक हकदार होगी। इस महत्वपूर्ण फैसले की घोषणा लिकटेंस्टीन के राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर की गई। लगभग 44,000 की आबादी वाले इस छोटे से देश में यह कानूनी बदलाव राजशाही के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ता है।

पुरुष ज्येष्ठता की जगह पूर्ण ज्येष्ठता का नियम

इस कानूनी बदलाव का मुख्य उद्देश्य वर्षों से चली आ रही पुरुष प्राथमिकता व्यवस्था को समाप्त करना है। अब तक लागू व्यवस्था में छोटी उम्र का बेटा भी अपनी बड़ी बहन से पहले उत्तराधिकार की दौड़ में आगे माना जाता था। हालांकि, लिकटेंस्टीन के शाही घराने द्वारा जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि अब उत्तराधिकार का क्रम पुरुष ज्येष्ठता से बदलकर पूर्ण ज्येष्ठता में स्थानांतरित किया जा रहा है। इसका सीधा अर्थ यह है कि भविष्य में पैदा होने वाली पहली संतान, चाहे वह बेटी हो या बेटा, लिकटेंस्टीन का अगला शासक बनेगी।

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शाही घराने का मानना है कि इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि देश और राजघराने का नेतृत्व उस व्यक्ति के हाथों में रहे जिसे इस जिम्मेदारी के लिए सबसे बेहतर तरीके से तैयार किया गया है। इस कदम के साथ ही लिकटेंस्टीन भी उन यूरोपीय देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिन्होंने राजशाही के पारंपरिक नियमों में सुधार कर महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया है।

वर्तमान उत्तराधिकारी और शाही परिवार पर प्रभाव

हालांकि यह नियम बदलाव बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका असर लिकटेंस्टीन की मौजूदा उत्तराधिकार रेखा पर तुरंत नहीं पड़ेगा। लिकटेंस्टीन के वर्तमान शासक प्रिंस हंस-एडम द्वितीय वर्ष 1989 से शाही परिवार के प्रमुख पद पर आसीन हैं। नए नियमों से उनके वर्तमान उत्तराधिकारी क्राउन प्रिंस अलोइस के स्थान पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि अलोइस उनकी पहली संतान और बड़े बेटे हैं।

क्राउन प्रिंस अलोइस पिछले दो दशकों से देश के अधिकांश आधिकारिक और प्रशासनिक शाही कार्यों का संचालन कर रहे हैं। कानून में बदलाव के संदर्भ में बोलते हुए क्राउन प्रिंस अलोइस ने कहा कि इस बदलाव के माध्यम से हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि लिकटेंस्टीन रियासत और शाही घराने का नेतृत्व हमेशा उस व्यक्ति द्वारा किया जाए जो इस पद और जिम्मेदारी के लिए सबसे अधिक योग्य हो।

अगली पीढ़ियों के लिए नए नियम का दायरा

यह नया संवैधानिक संशोधन पुराने मामलों या पिछले उत्तराधिकार दावों पर लागू नहीं होगा। शाही घराने के अनुसार, यह परिवर्तन विशेष रूप से क्राउन प्रिंस अलोइस और उनकी पत्नी क्राउन प्रिंसेस सोफी के चार बच्चों के वंशजों पर लागू होगा। इस राजसी दंपत्ति की संतानों से ही इस नए नियम की व्यावहारिक शुरुआत होगी।

इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि भविष्य में क्राउन प्रिंस अलोइस के परिवार में जन्म लेने वाली पहली संतान ही उत्तराधिकारी बनेगी। यदि पहली संतान बेटी होती है, तो उसे अपने छोटे भाइयों पर प्राथमिकता मिलेगी। इस कदम ने राजघराने के भीतर लैंगिक समानता के सिद्धांत को कानूनी रूप से मजबूत किया है।

लिकटेंस्टीन की अनोखी शासन व्यवस्था और ब्रिटेन का उदाहरण

लिकटेंस्टीन का भौगोलिक और राजनीतिक ढांचा यूरोप के अन्य देशों से काफी अलग है। स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बीच बसा यह देश दुनिया के उन गिने-चुने देशों में शामिल है जो दोहरे भू-आबद्ध (डबली लैंडलॉक्ड) हैं। इसके अलावा, यूरोप की अन्य संवैधानिक राजशाहियों के विपरीत, जहां राजा या रानी केवल औपचारिक भूमिका निभाते हैं, लिकटेंस्टीन के प्रिंस के पास व्यापक राजनीतिक और कार्यपालक शक्तियां मौजूद हैं।

लिकटेंस्टीन का शासक सरकार के फैसले पर वीटो लगाने और महत्वपूर्ण नियुक्तियां करने की शक्ति रखता है। यही कारण है कि शाही उत्तराधिकार नियमों में बदलाव का असर सीधे तौर पर देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर पड़ता है। इससे पहले, वर्ष 2011 में ब्रिटेन ने भी अपने उत्तराधिकार कानून में संशोधन किया था, ताकि राजा या रानी की पहली बेटी को सिंहासन का उत्तराधिकारी बनने का अधिकार मिल सके।

सवाल-जवाब

लिकटेंस्टीन ने शाही उत्तराधिकार नियमों में क्या बदलाव किया है?
लिकटेंस्टीन ने पुरुष ज्येष्ठता नियम को समाप्त कर पूर्ण ज्येष्ठता का नियम अपनाया है, जिससे अब पहली संतान चाहे बेटी हो या बेटा, सिंहासन की स्वाभाविक हकदार बनेगी।
क्या इस बदलाव से वर्तमान उत्तराधिकारी प्रिंस अलोइस पर कोई प्रभाव पड़ेगा?
नहीं, प्रिंस अलोइस अपने पिता प्रिंस हंस-एडम द्वितीय की पहली संतान हैं, इसलिए उनकी उत्तराधिकार स्थिति पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
नया उत्तराधिकार नियम किन पर लागू होगा?
यह नया नियम क्राउन प्रिंस अलोइस और उनकी पत्नी क्राउन प्रिंसेस सोफी की संतानों और उनके वंशजों पर लागू होगा।
क्या अन्य यूरोपीय देशों ने भी ऐसे नियम बदले हैं?
हां, वर्ष 2011 में ब्रिटेन ने भी अपने उत्तराधिकार कानूनों में बदलाव कर राजा या रानी की पहली बेटी को सिंहासन का अधिकार दिया था।
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