राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा अर्थात NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI द्वारा दाखिल चार्जशीट में कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। देशव्यापी विरोध प्रदर्शनों और मेडिकल अभ्यर्थियों के भारी हंगामे के बीच जांच एजेंसी ने इस संगठित अपराध के पूरे ढांचे से पर्दा उठाया है। सीबीआई द्वारा तैयार की गई चार्जशीट में कुल 13 व्यक्तियों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इस पूरी कानूनी कार्रवाई में सबसे अधिक ध्यान आकर्षित करने वाला पहलू तीन महिला आरोपियों का सामने आना है, जिनका नाम इत्तेफाक से मनीषा ही है। हालांकि, जांच एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे आपराधिक सिंडिकेट के भीतर इन तीनों महिलाओं की जिम्मेदारी और कार्यशैली पूरी तरह से अलग-अलग थी। इनमें से दो महिलाएं परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से बतौर विषय विशेषज्ञ जुड़ी हुई थीं, जबकि तीसरी महिला पर लीक हुए पेपर को हासिल करने और अभ्यर्थियों तक वितरित करने वाले अंतरराज्यीय बिचौलियों के नेटवर्क की मुख्य कड़ी होने का गंभीर आरोप है।
एनटीए की विषय विशेषज्ञों की संदिग्ध कार्यप्रणाली
सीबीआई की विस्तृत जांच रिपोर्ट में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि पेपर लीक का यह ढांचा केवल बाहरी आपराधिक तत्वों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार परीक्षा संचालन प्रक्रिया की अंदरूनी व्यवस्था से भी जुड़े हुए थे। चार्जशीट में आरोपी बनाई गई पहली महिला मनीषा मंडहरे हैं, जो NTA में जीवविज्ञान (Biology) विषय की एक्सपर्ट के तौर पर कार्यरत थीं। जांच एजेंसी इस बात की गहराई से छानबीन कर रही है कि प्रश्नपत्र तैयार करने की अति गोपनीय प्रक्रिया के दौरान उनकी क्या भूमिका रही और क्या किसी स्तर पर पद या गोपनीय जानकारी का दुरुपयोग किया गया था। वहीं, दूसरी आरोपी महिला मनीषा संजय हवालदार हैं, जो NTA में भौतिक विज्ञान (Physics) की विषय विशेषज्ञ के रूप में जुड़ी हुई थीं। सीबीआई का दावा है कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले विशेषज्ञों के स्तर से सुरक्षा मानकों का उल्लंघन हुआ या नहीं, इसकी गहन डिजिटल और फॉरेंसिक जांच की गई है। हालांकि, इन दोनों विशेषज्ञों पर लगाए गए आरोपों की सत्यता और उनकी वास्तविक संलिप्तता का अंतिम निर्णय अदालत में चलने वाली न्यायिक सुनवाई के बाद ही तय होगा।
अंतरराज्यीय नेटवर्क और बिचौलियों का फैला हुआ जाल
जांच एजेंसी द्वारा उजागर की गई तीसरी महिला आरोपी मनीषा संजय वाघमारे हैं, जिनका संबंध अभ्यर्थियों को पेपर मुहैया कराने वाले मध्यस्थों के गिरोह से बताया गया है। सीबीआई के अनुसार, इस पेपर लीक नेटवर्क के तार किसी एक शहर या कोचिंग संस्थान तक सीमित नहीं थे, बल्कि यह महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान, हरियाणा और केरल जैसे कई राज्यों में फैला हुआ एक सुव्यवस्थित नेटवर्क था। चार्जशीट में शामिल एक अन्य सह-आरोपी प्रल्हाद विठ्ठलराव कुलकर्णी से की गई पूछताछ में यह खुलासा हुआ कि वह वर्ष 2021 में धनंजय लोखंडे के संपर्क में आया था। इसके बाद, प्रल्हाद कुलकर्णी ने मनीषा संजय वाघमारे के साथ मिलकर प्रश्नपत्र हासिल करने, उसकी प्रतियां तैयार करने और फिर उसे विभिन्न राज्यों में मौजूद लाभार्थियों तक पहुंचाने की एक गहरी साजिश रची थी। इस पूरे नेटवर्क में व्हाट्सएप जैसे डिजिटल मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग किया गया, जिसके जरिए हल किए गए प्रश्नपत्रों को तुरंत एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता था।
सीकर के रसायन शिक्षक का ईमेल और फॉरेंसिक साक्ष्य
सीबीआई की रिपोर्ट में इस बात का भी विशेष उल्लेख किया गया है कि इस पूरे महाघोटाले की पहली भनक किसी सरकारी जांच एजेंसी को नहीं लगी थी, बल्कि इसकी शुरुआत राजस्थान के सीकर स्थित एक केमिस्ट्री शिक्षक के जरिए हुई थी। रसायन विज्ञान के शिक्षक शशिकांत सुथार ने परीक्षा आयोजित होने से पहले ही NTA को एक ईमेल भेजकर सचेत किया था कि NEET-UG का हल किया हुआ प्रश्नपत्र व्हाट्सएप ग्रुप्स पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। इस ईमेल सूचना को आधार बनाकर जब शुरुआती जांच शुरू की गई, तो परत-दर-परत पूरा नेटवर्क बेनकाब होता चला गया। जांच अधिकारियों ने मैसेजिंग एप्लिकेशन्स के डिजिटल पदचिह्नों, फॉरेंसिक डेटा विश्लेषण और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के आधार पर कड़ियों को जोड़ा। इस तकनीकी जांच के जरिए ही NTA के अंदरूनी विशेषज्ञों, कोचिंग संचालकों और विभिन्न राज्यों में फैले बिचौलियों के आपसी संबंधों का पर्दाफाश हो सका।
अदालती प्रक्रिया और भावी कानूनी कदम
फिलहाल सीबीआई ने 13 आरोपियों के खिलाफ अपने प्रारंभिक साक्ष्य और फॉरेंसिक दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत कर दिए हैं। चार्जशीट दाखिल होने के बाद अब यह पूरा मामला न्यायिक परीक्षण के अधीन आ गया है। अदालत में मामले की नियमित सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों को अपने बचाव का अवसर मिलेगा और जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की कानूनी वैधता की परख की जाएगी। देश के लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर अब पूरे देश की नजरें न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।



















