मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की आगामी नीतियों ने वैश्विक कमोडिटी और वित्तीय बाजारों में भारी हलचल पैदा कर दी है। महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर चल रहे सैन्य संघर्षों के कारण ऊर्जा क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स और शिपिंग रणनीतियों के जरिए कच्चे तेल की आपूर्ति से जुड़ी बाधाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इस बीच, मुद्रा बाजारों में दबाव देखा जा रहा है, मजबूत होते डॉलर के कारण सोने की कीमतों में गिरावट आई है, और डिजिटल संपत्तियां इस सप्ताह के महत्वपूर्ण मौद्रिक नीति फैसलों से पहले संभलकर कारोबार कर रही हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और गुप्त शिपिंग का सहारा
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी संघर्ष बेहद संवेदनशील बना हुआ है, लेकिन तेल का अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपनी मजबूती साबित कर रहा है। कॉमर्सबैंक के फॉरेक्स रिसर्च विभाग के चार्ली ले और डॉ. हेनरी हाओ ने इस संबंध में अपनी महत्वपूर्ण राय साझा की है। उनका मानना है कि यद्यपि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर जारी सैन्य गतिविधियों के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल आया है, और दोनों विरोधी पक्षों के बीच किसी औपचारिक राजनयिक समझौते की उम्मीद बेहद कम है, फिर भी स्थिति धीरे-धीरे सुधर सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी औपचारिक शांति समझौते के बिना भी आने वाले महीनों में आपूर्ति से जुड़ी बाधाएं धीरे-धीरे कम होने लगेंगी। खाड़ी क्षेत्र से होने वाली तेल की आपूर्ति मुख्य रूप से उन जहाजों की मदद से बहाल होगी जो इस जलमार्ग से गुप्त रूप से पारगमन करेंगे। इन गुप्त शिपिंग गतिविधियों के जरिए कच्चे तेल का प्रवाह वैश्विक बाजार में बना रहेगा। इसके विपरीत, परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों और प्राकृतिक गैस के लिए स्थिति इतनी अनुकूल नहीं दिख रही है। इन दोनों क्षेत्रों में परिवहन और उत्पादन से जुड़ी रुकावटें लंबे समय तक जारी रहने की आशंका है, जिससे इनकी वैश्विक आपूर्ति प्रभावित रहेगी।
भू-राजनीतिक उथल-पुथल से गहराया आपूर्ति का संकट
पिछले कुछ दिनों में हुई कई घटनाओं ने कच्चे तेल के बाजार में अस्थिरता को और बढ़ा दिया है। सोमवार को शुरुआती एशियाई कारोबारी सत्रों के दौरान निवेशकों की नजरें एक बार फिर तेल की कीमतों पर टिकी रहीं। पिछले शुक्रवार को वॉल स्ट्रीट पर आई तेजी से निवेशकों को थोड़ी राहत मिली थी क्योंकि ब्रेंट क्रूड की कीमत 110 USD के स्तर से नीचे आ गई थी, लेकिन यह राहत अस्थाई साबित हुई। इसके तुरंत बाद सऊदी अरब की एक मुख्य पाइपलाइन के बंद होने, हुती बलों द्वारा पेरिं द्वीप पर नियंत्रण करने और होर्मुज वार्ता के स्थगित होने जैसी खबरों ने वैश्विक बाजार में आपूर्ति की चिंता को फिर से हवा दे दी है।
आंकड़ों पर गौर करें तो पिछले शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 2.8% की गिरावट दर्ज की गई और यह 104.61 USD प्रति बैरल पर बंद हुआ। इस एक दिन की गिरावट के बावजूद, पिछले पूरे सप्ताह के दौरान इसमें 8.7% की भारी साप्ताहिक बढ़त दर्ज की गई। इससे ठीक एक सप्ताह पहले भी तेल की कीमतों में लगभग 8% की तेजी देखी गई थी, जिसका अर्थ है कि पिछले दो हफ्तों में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में कुल मिलाकर 17% का जोरदार उछाल आया है। यह तेजी दिखाती है कि मध्य पूर्व में सुरक्षा और कूटनीति के मोर्चे पर होने वाले बदलावों के प्रति वैश्विक बाजार कितना संवेदनशील है।
केंद्रीय बैंक की नीतियों के इंतजार में विदेशी मुद्रा बाजार
ऊर्जा बाजार में जारी तनाव और मैक्रोइकॉनॉमिक नीतियों को लेकर बनी अनिश्चितता का सीधा असर विदेशी मुद्रा बाजार पर दिखाई दे रहा है। सोमवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान AUD/USD मुद्रा जोड़ी पर बिकवाली का दबाव देखा गया और यह लगभग डेढ़ हफ्ते के निचले स्तर 0.7140 के पास पहुंच गई। हालांकि, इस जोड़ी में भारी गिरावट जारी रखने के लिए पर्याप्त गति की कमी थी और यह 0.7100 के मध्य स्तर के ठीक ऊपर कारोबार करती रही, जो दिन के दौरान लगभग 0.25% की गिरावट दर्शाती है।
दूसरी ओर, सोमवार की शुरुआत में USD/JPY जोड़ी को खरीदारों का समर्थन मिला। एशियाई सत्र के दौरान यह जोड़ी 154.00 के स्तर के करीब पहुंच गई, जिससे पिछले शुक्रवार को हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो सकी। इसके बावजूद, इस मुद्रा जोड़ी की कीमतें पिछले एक सप्ताह से एक सीमित दायरे में ही बनी हुई हैं। यह अभी भी पिछले मंगलवार को छुए गए लगभग सात महीने के निचले स्तर के काफी करीब है। इस क्षेत्र के निवेशक आने वाले दिनों में होने वाली प्रमुख केंद्रीय बैंक बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं और बड़े दांव लगाने से बच रहे हैं।
फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले डॉलर मजबूत, सोने में गिरावट
अमेरिकी मुद्रा में आई मजबूती का सीधा असर बहुमूल्य धातुओं पर पड़ा है। सोमवार को सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट देखी गई और यह 4,300 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया। निवेशक इस बुधवार को होने वाले फेडरल रिजर्व के मौद्रिक नीति संबंधी फैसले से पहले अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित ठिकाने के रूप में चुन रहे हैं, जिससे डॉलर की मांग में भारी इजाफा हुआ है।
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावना है। हाल ही में जारी हुई प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स की रिपोर्टों के बाद बाजार में ब्याज दरें ऊंची रहने के कयास तेज हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट की नजरें अब फेडरल रिजर्व के आगामी डॉट प्लॉट पर टिकी हैं, जिससे भविष्य की ब्याज दरों के अनुमानों का पता चलेगा। अमेरिकी डॉलर की मजबूती को बरकरार रखने के लिए यह डॉट प्लॉट बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा। इस बीच राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है; फेडरल रिजर्व में महत्वपूर्ण भूमिका के लिए विचार किए जा रहे केविन वॉर्श की नीतिगत स्वतंत्रता की परीक्षा होने वाली है क्योंकि डोनाल्ड ट्रंप लगातार केंद्रीय बैंक पर ब्याज दरों को कम रखने के लिए दबाव बना रहे हैं। डॉलर में तेजी जारी रहने के लिए यह जरूरी होगा कि फेड बाजार की ब्याज दरें बढ़ाने वाली उम्मीदों को पूरा करे।
डिजिटल परिसंपत्ति बाजार में मजबूती बरकरार
पारंपरिक वित्तीय बाजारों और कमोडिटी क्षेत्र में जारी भारी उतार-चढ़ाव के बीच, डिजिटल संपत्तियों यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में मजबूती देखने को मिल रही है। सोमवार को बिटकॉइन की कीमतों में तेजी आई और यह 77,884 डॉलर के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा था। इस तेजी ने पूरे डिजिटल परिसंपत्ति बाजार को सकारात्मक सहारा दिया।
अन्य प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी बिटकॉइन के इस रुख के साथ कदम मिलाती दिखीं। एथेरियम 2,521 डॉलर के अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तर को बचाने में कामयाब रहा, जबकि रिपल भी 1.38 डॉलर के स्तर पर मजबूती से टिका रहा। दोनों ही संपत्तियां वर्तमान में बिटकॉइन के न्यूट्रल से बुलिश के रुख का अनुसरण कर रही हैं, जिससे पता चलता है कि पारंपरिक फिएट मुद्राओं और तेल संकट के बावजूद डिजिटल निवेशकों का भरोसा बना हुआ है।


















