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देवघर के बैद्यनाथ पंचांग से जानें 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने का समय और भद्रा मुक्त शुभ मुहूर्तत्योहार
20 अग॰ 2026, 8:20 am (42 दिन पहले)· 2

देवघर के बैद्यनाथ पंचांग से जानें 28 अगस्त को रक्षाबंधन मनाने का समय और भद्रा मुक्त शुभ मुहूर्त

सावन पूर्णिमा तिथि दो दिन पड़ने से बना संशय दूर हो गया है। बैद्यनाथ पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026 को भद्रा मुक्त माहौल में सुबह 5:00 से 9:48 बजे तक और दोपहर के अभिजीत मुहूर्त में राखी बांधना शुभ रहेगा।

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे बाजारों में रौनक और तैयारियां तेज हो गई हैं। देवघर सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में बहने अपने भाइयों के लिए तरह-तरह की राखियां और मिठाइयां पसंद कर रही हैं, वहीं भाई भी बहनों को देने के लिए खास तोहफे चुन रहे हैं। हालांकि, इस साल सावन पूर्णिमा की तिथि दो दिन पड़ने के कारण रक्षाबंधन की सटीक तारीख को लेकर लोगों में संशय की स्थिति बनी हुई थी। इस संशय को दूर करते हुए बैद्यनाथ पंचांग की गणना के आधार पर देवघर के ज्योतिषाचार्यों ने स्पष्ट किया है कि 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षाबंधन मनाना ही हर दृष्टि से शास्त्रसम्मत और मंगलकारी होगा।

सावन पूर्णिमा की तिथि और उदयातिथि का धार्मिक महत्व

सनातन परंपरा में रक्षाबंधन का महान पर्व हर वर्ष सावन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस बार पंचांगीय गणना के अनुसार सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 9 बजकर 8 मिनट पर होने जा रहा है। यह पूर्णिमा तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त 2026 की सुबह लगभग 9 बजकर 48 मिनट तक बनी रहेगी। पूर्णिमा तिथि के 27 और 28 अगस्त दो दिनों तक फैले होने के कारण ही आम लोगों के मन में तिथि के चयन को लेकर द्वंद्व पैदा हुआ था।

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वैदिक ज्योतिष और पंचांग शास्त्र में किसी भी पर्व की मुख्य तिथि का निर्धारण उदयातिथि के सिद्धांत के आधार पर किया जाता है। उदयातिथि का अर्थ होता है कि जिस दिन सूर्योदय के समय जो तिथि विद्यमान होती है, पूरा दिन उसी तिथि का माना जाता है। 28 अगस्त को सूर्योदय के समय सावन पूर्णिमा तिथि उपस्थित रहेगी, जिसके कारण 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन की मुख्य तिथि माना जाना सर्वथा उचित है। इसी शास्त्रीय नियम के तहत विद्वानों ने 28 अगस्त को ही राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी है।

सुबह के समय रक्षासूत्र बांधने का सबसे पावन शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन के दिन भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने के लिए प्रातः काल का समय अत्यंत शुभ माना जाता है। बैद्यनाथ पंचांग के अनुसार 28 अगस्त 2026 को सुबह 5 बजे से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने की सबसे उत्तम समयावधि उपलब्ध रहेगी। इस 4 घंटे 48 मिनट के शुभ योग में बहनें प्रातः काल स्नान करने के बाद पूजा-अर्चना संपन्न कर सकती हैं और अपने भाइयों का पूजन कर सकती हैं।

इस शुभ मुहूर्त के दौरान बहनें सबसे पहले भाइयों के ललाट पर कुमकुम, रोली और अक्षत का शुभ तिलक लगाती हैं। इसके बाद भाई की दाहिनी कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता की कामना करती हैं। इसके बदले में भाई अपनी बहनों के चरण स्पर्श कर या आशीर्वाद देकर उनकी हर सुख-दुख में रक्षा करने का वचन दोहराते हैं और अपनी सामर्थ्य के अनुसार उन्हें सुंदर उपहार भेंट करते हैं।

दोपहर में उपलब्ध अभिजीत मुहूर्त का बेहतरीन विकल्प

कई बार पारिवारिक व्यस्तताओं, दूर-दराज से आने-जाने अथवा सुबह के समय समय न मिल पाने के कारण कई लोग प्रातः कालीन मुहूर्त में पूजा संपन्न नहीं कर पाते। ऐसे परिवारों के लिए पंचांग में दोपहर का एक और बेहद कल्याणकारी मुहूर्त बताया गया है। 28 अगस्त को दोपहर 12 बजकर 14 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 5 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा।

सनातन ज्योतिष में अभिजीत मुहूर्त को स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है, जिसमें किए गए सभी शुभ कार्य मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। यह 51 मिनट का समय अत्यंत पवित्र माना गया है। यदि किसी कारणवश सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक राखी न बांधी जा सकी हो, तो बहनें दोपहर में 12 बजकर 14 मिनट से 1 बजकर 5 मिनट के बीच अभिजीत मुहूर्त में भी भाइयों की कलाई पर निश्चिंत होकर रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

27 अगस्त को भद्रा का साया और 28 अगस्त का भद्रा मुक्त होना

रक्षाबंधन के त्योहार में भद्रा काल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा काल में रक्षासूत्र बांधना अथवा कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य आरंभ करना पूरी तरह से वर्जित माना गया है। शास्त्रों में उल्लेख मिलता है कि भद्रा काल में बांधी गई राखी शुभ फल प्रदान नहीं करती, इसलिए भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है।

इस वर्ष 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट पर जैसे ही सावन पूर्णिमा तिथि शुरू होगी, उसके साथ ही भद्रा काल भी प्रारंभ हो जाएगा। यह भद्रा काल 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 32 मिनट तक प्रभावी रहेगा। इस प्रकार 27 अगस्त को दिन भर और देर रात तक भद्रा का साया बना रहेगा, जिसके कारण 27 अगस्त को रक्षाबंधन मनाना शास्त्रीय दृष्टि से उचित नहीं है।

श्रद्धालुओं के लिए सबसे राहत और प्रसन्नता की बात यह है कि मुख्य पर्व के दिन यानी 28 अगस्त 2026 को पूरे दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा। 28 अगस्त का पूरा दिन भद्रा के प्रभाव से पूरी तरह मुक्त है। इसीलिए देवघर के ज्योतिषाचार्यों और पंचांगकर्ताओं ने सभी भ्रमों को खारिज करते हुए 28 अगस्त को ही रक्षाबंधन मनाने की सर्वसम्मत घोषणा की है।

सवाल-जवाब

रक्षाबंधन 2026 की सही तारीख क्या है?
बैद्यनाथ पंचांग और उदयातिथि के अनुसार रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा।
28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ समय क्या है?
सुबह 5:00 बजे से लेकर सुबह 9:48 बजे तक राखी बांधने का मुख्य शुभ मुहूर्त रहेगा।
क्या सुबह का मुहूर्त निकल जाने के बाद दोपहर में राखी बांधी जा सकती है?
हां, 28 अगस्त को दोपहर 12:14 बजे से 1:05 बजे तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा, जिसमें भी राखी बांधी जा सकती है।
27 अगस्त को रक्षाबंधन क्यों नहीं मनाना चाहिए?
27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे से रात 9:32 बजे तक भद्रा काल रहेगा, जिसमें मांगलिक कार्य वर्जित माने गए हैं।
क्या 28 अगस्त को भद्रा का साया रहेगा?
नहीं, 28 अगस्त 2026 को पूरे दिन भद्रा का कोई साया नहीं रहेगा और दिन भद्रा से पूरी तरह मुक्त है।
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