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रिमझिम बारिश और महंगाई के बीच झालावाड़ में रक्षाबंधन की रौनक, ₹40 तक पहुंचे नारियल के दामत्योहार
27 अग॰ 2026, 2:50 pm (34 दिन पहले)· 2

रिमझिम बारिश और महंगाई के बीच झालावाड़ में रक्षाबंधन की रौनक, ₹40 तक पहुंचे नारियल के दाम

झालावाड़ के बाजारों में रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर हल्की बारिश के बावजूद भारी भीड़ उमड़ रही है। नारियल और मिठाइयों के दाम बढ़ने के बावजूद बहनों में खरीदारी को लेकर खासा उत्साह है।

झालावाड़ जिले में रक्षाबंधन के पावन पर्व की पूर्व संध्या पर उत्सव का माहौल अपने चरम पर है। आसमान से लगातार हो रही हल्की रिमझिम बारिश और मौसम में फैली ठंडक भी श्रद्धालुओं और खरीदारों के उत्साह को डिगा नहीं पाई है। भाई और बहन के पवित्र प्रेम के इस त्योहार को मनाने के लिए शहर की मुख्य सड़कों और सजावटी दुकानों पर महिलाओं और बच्चों का हुजूम उमड़ पड़ा है। हर कोई अपने भाइयों की कलाई सजाने के लिए सबसे सुंदर राखी की तलाश में घूमता नजर आ रहा है। मौसम की नमी के बावजूद दुकानों में गूंजती चहल-पहल ने पूरे झालावाड़ बाजार को जीवंत बना दिया है।

चांदी और महंगी राखियों की जगह बजट-फ्रेंडली पारंपरिक वैरायटी बनी पसंद

इस वर्ष रक्षाबंधन पर झालावाड़ के बाजारों में ग्राहकों की पसंद में एक नया बदलाव देखने को मिल रहा है। दुकानों पर भले ही तरह-तरह की राखियों का विशाल संग्रह सजा हुआ है, लेकिन महिलाएं चांदी की अत्यधिक महंगी या भारी डिजाइनर राखियों के बजाय किफायती और सुंदर विकल्पों की ओर अधिक आकर्षित हो रही हैं। मोती जड़ी किनारी वाली पारंपरिक राखियां और हल्की फैंसी डिजाइनों की मांग इस बार सबसे ज्यादा देखी जा रही है। आम जनता अपने घरेलू बजट को संतुलित रखते हुए खूबसूरत राखियों की खरीदारी को प्राथमिकता दे रही है। दुकानदारों का कहना है कि कम कीमत वाली आकर्षक और पारंपरिक वैरायटी का स्टॉक सबसे तेजी से बिक रहा है, जिससे छोटे और मंझोले व्यापारियों के चेहरे पर भी खुशी साफ देखी जा सकती है।

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छोटा भीम, शिन-चैन और डोरेमोन की राखियों के लिए बच्चों में भारी क्रेज

त्योहार की खरीदारी के दौरान बच्चों का उत्साह पूरे बाजार की रंगत में चार चांद लगा रहा है। इस पावन अवसर पर बच्चों की अपनी अलग ही पसंद और मासूम मांगें देखने को मिल रही हैं। पारंपरिक सूती या रेशमी धागों के बजाय छोटे बच्चे अपने पसंदीदा टेलीविजन और कॉमिक्स कार्टून किरदारों की राखियां लेने की जिद कर रहे हैं। बाजार में डोरेमोन, शिन-चैन और छोटा भीम जैसे लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर वाली रंग-बिरंगी राखियों की भारी मांग है। बच्चे इन चमकती और खिलौने जैसी राखियों को अपनी कलाई पर बांधने के लिए बेहद उत्साहित हैं। अभिभावक भी बच्चों की इस खुशी और जिद को पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे बच्चों के काउंटर पर विक्रेताओं की काफी बिक्री हो रही है।

नारियल और मिठाइयों की कीमतों में उछाल, फिर भी बरकरार है बहनों का उत्साह

त्योहारी माहौल के बीच महंगाई का असर भी स्पष्ट रूप से महसूस किया जा रहा है। रक्षाबंधन की पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुओं के दामों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। विशेष रूप से नारियल के भाव में बड़ा उछाल देखा गया है। पिछले वर्ष जो नारियल बाजार में आसानी से 20 रुपये में उपलब्ध था, उसकी कीमत इस बार बढ़कर 35 रुपये से 40 रुपये तक पहुंच गई है। इसके साथ ही खोपरा गोला और चीनी की बढ़ती लागत के कारण बाजारों में मिठाइयों के दाम भी काफी बढ़ गए हैं। इन तमाम आर्थिक चुनौतियों और बढ़ती कीमतों के बावजूद बहनों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई है। भाई-बहन के इस पावन रिश्ते की मिठास महंगाई के असर पर पूरी तरह भारी पड़ती दिख रही है।

सवाल-जवाब

झालावाड़ के बाजारों में इस बार कौन सी राखियों की मांग सबसे ज्यादा है?
महिलाओं द्वारा चांदी की महंगी राखियों के बजाय मोती जड़ी किनारी वाली और हल्की फैंसी राखियां ज्यादा खरीदी जा रही हैं।
बच्चों के लिए बाजार में कौन सी विशेष राखियां उपलब्ध हैं?
बच्चों में डोरेमोन, शिन-चैन और छोटा भीम जैसे लोकप्रिय कार्टून कैरेक्टर वाली रंग-बिरंगी राखियों का भारी क्रेज देखा जा रहा है।
झालावाड़ में नारियल की कीमतों में कितना बदलाव आया है?
पिछले वर्ष 20 रुपये में मिलने वाला नारियल इस बार बढ़कर 35 से 40 रुपये तक पहुंच गया है।
मिठाइयों के दाम बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?
खोपरा गोला और चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के कारण इस बार मिठाइयों की लागत और बिक्री दर बढ़ गई है।
क्या बारिश के कारण झालावाड़ के बाजारों में ग्राहकों की संख्या कम हुई है?
नहीं, हल्की बारिश से मौसम में ठंडक आई है, लेकिन लोगों और महिलाओं का खरीदारी के प्रति उत्साह बिल्कुल कम नहीं हुआ है।
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