शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूरे नौ दिनों तक विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस पावन उत्सव की शुरुआत 11 अक्टूबर से हो रही है और श्रद्धालु अपने घरों में कलश स्थापना के साथ देवी के स्वागत की विशेष तैयारियां कर रहे हैं। पूरे अनुष्ठान में अखंड ज्योति प्रज्वलित करने का विशेष महत्व होता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार घटस्थापना के दिन जलाई जाने वाली यह पावन लौ पूरे नौ दिनों तक बिना बुझे निरंतर जलती रहनी चाहिए। यह ज्योति घर में मौजूद नकारात्मक शक्तियों को समाप्त करके सकारात्मक ऊर्जा और दिव्यता का संचार करती है।
घटस्थापना और अखंड ज्योति प्रज्वलन का शुभ मुहूर्त
नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा तिथि को अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के लिए शुभ समय का विशेष ध्यान रखना आवश्यक होता है। रविवार, 11 अक्टूबर को सुबह 6:19 से लेकर सुबह 10:12 के बीच का समय घटस्थापना और पावन दीपक जलाने के लिए सर्वोत्तम मुहूर्त है। अधिकांश परिवारों में कलश स्थापना का अनुष्ठान पूरा करने के तुरंत बाद ही इस पावन ज्योति को जलाया जाता है। इस दौरान देवी भगवती से प्रार्थना की जाती है कि वे इस दीप को स्वीकार करें और पूरे नौ दिनों तक उस घर में अपनी कृपा दृष्टि और उपस्थिति बनाए रखें।
गाय का शुद्ध घी अथवा तेल का चयन
अखंड ज्योति प्रज्वलित करने के लिए सबसे उत्तम साधन गाय का शुद्ध देशी घी माना गया है। शुद्ध घी का दीपक बिना किसी अड़चन के स्थिर और शांत लौ के साथ जलता रहता है, जिससे घर-परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। इसके अलावा जिन घरों में पारंपरिक रूप से या घी की अनुपलब्धता के कारण तेल का प्रयोग किया जाता है, वहां तिल के तेल अथवा सरसों के तेल का उपयोग भी किया जा सकता है। माता रानी दोनों ही माध्यमों से की गई सेवा को स्वीकार करती हैं। हालांकि इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि एक ही दीपक के अंदर घी और तेल को कभी भी आपस में न मिलाएं।
दीपक स्थापित करने की सही दिशा और वास्तु नियम
पूजा स्थल पर अखंड दीपक रखने के लिए वास्तु शास्त्र और पूजा पद्धति के स्पष्ट नियम निर्धारित हैं। यदि आप शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित कर रहे हैं, तो उसे देवी मां की प्रतिमा अथवा चौकी के दाहिने भाग में स्थापित करना चाहिए। वहीं यदि आप तिल या सरसों के तेल का दीपक जला रहे हैं, तो उसे माता की प्रतिमा के बाईं ओर रखना उपयुक्त माना जाता है। दिशा के दृष्टिकोण से घर अथवा पूजा स्थल का दक्षिण-पूर्व कोना सबसे उत्तम होता है क्योंकि यह क्षेत्र अग्नि तत्व का प्रतिनिधित्व करता है। अखंड दीपक की लौ का मुख सदैव पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ध्यान रखें कि अखंड ज्योति को कभी भी दक्षिण दिशा की तरफ मुख करके न जलाएं।
अखंड ज्योति का आधार और बत्ती तैयार करने का तरीका
अखंड दीपक के लिए बाजार में मिलने वाले कांच के ढक्कन वाले पीतल के पात्र अथवा पारंपरिक मिट्टी के दीपक का चयन किया जा सकता है। कांच का आवरण होने से हवा के झोंकों से बचाव रहता है। दीपक को कभी भी सीधे फर्श या जमीन पर नहीं रखना चाहिए। इसे सदैव लकड़ी की स्वच्छ चौकी, तांबे या पीतल की थाली अथवा अष्टदल कमल और अक्षत यानी साबुत चावल के ढेर पर ही स्थापित किया जाना चाहिए। लगातार नौ दिनों तक बिना रुकावट जलने के लिए लगभग सवा हाथ लंबी शुद्ध सूती बत्ती का प्रयोग सबसे अच्छा रहता है। कई श्रद्धालु बत्ती की शुद्धता और मजबूती बढ़ाने के लिए उस पर कलावा भी लपेटते हैं। चूंकि यह लौ दिन-रात जलती है, इसलिए इसमें एक किलो से अधिक घी की खपत हो सकती है, जिसे पहले से ही पूजा स्थल के निकट सुरक्षित रख लेना चाहिए।
यदि अखंड ज्योति अचानक बुझ जाए तो क्या करें
यदि तेज हवा, बत्ती के नीचे खिसकने या घी समाप्त होने के कारण अखंड दीपक बुझ जाए, तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं और मन में किसी प्रकार का भय न लाएं। दीपक का बुझना किसी अनिष्ट का संकेत नहीं होता क्योंकि सभी दिशाओं की स्वामिनी मां दुर्गा भवानी स्वयं आपके घर में विराजमान रहती हैं। नवरात्रि के दौरान सबसे महत्वपूर्ण तत्व आपकी सच्ची निष्ठा और अटूट विश्वास है।
इस स्थिति से निपटने के लिए सबसे व्यावहारिक उपाय साक्षी दीपक जलाकर रखना है। अखंड ज्योति के साथ ही रात के समय एक छोटा दीपक अलग से प्रज्वलित रखें। यदि मुख्य दीपक की लौ किसी कारणवश शांत हो जाती है, तो आप उस साक्षी दीपक की अग्नि से ही मुख्य ज्योति को पुनः प्रज्वलित कर सकते हैं। इसके उपरांत हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूल के लिए मां दुर्गा से क्षमा याचना करें और अपनी नियमित पूजा को पूरी श्रद्धा के साथ जारी रखें।
नौ दिनों तक सुरक्षा और विसर्जन के आवश्यक नियम
लगातार नौ दिनों तक खुली लौ जलती रहने के कारण घर में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। दीपक को जलते समय पर्दों, खिड़कियों, सीलिंग फैन और एयर कंडीशनर के सीधे हवा के बहाव से दूर रखना चाहिए। साथ ही इसे छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से भी सुरक्षित दूरी पर रखें। नवरात्रि के दौरान घर को कभी भी बिल्कुल खाली या ताला बंद करके न छोड़ें। यदि पूरे परिवार को किसी अनिवार्य कार्य से बाहर जाना पड़े, तो किसी पड़ोसी या रिश्तेदार को दीपक की निगरानी की जिम्मेदारी अवश्य सौंपें।
नवरात्रि की नवमी तिथि की अंतिम पूजा संपन्न होने के बाद अखंड ज्योति को कभी भी फूंक मारकर या हाथ से न बुझाएं, बल्कि उसे अपने आप शांत होने दें। दीपक के पूरी तरह ठंडा हो जाने के बाद बची हुई बत्ती और अवशेष सामग्री को किसी पवित्र पौधे के गमले की मिट्टी में दबा दें अथवा किसी बहते जल स्रोत में प्रवाहित कर दें।



















