बिहार के दरभंगा स्थित मिर्जापुर इलाके में इस वर्ष दुर्गा पूजा महोत्सव के अवसर पर एक अत्यंत विस्मयकारी और अनूठा पंडाल आकार ले रहा है। इलाके में पहली बार श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा विशाल नागलोक तैयार किया जा रहा है। इस भव्य धार्मिक संरचना का मुख्य आकर्षण इसका प्रवेश द्वार है, जहां देवी के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को एक विशाल नाग के मुख से भीतर दाखिल होना होगा और उसके उदर भाग से होते हुए अंदर का पूरा मार्ग तय करना पड़ेगा।
नाग के मुख से प्रवेश और सरोवर-पहाड़ों का दिव्य मार्ग
इस अद्भुत पंडाल के भीतर श्रद्धालुओं की यात्रा बेहद रोमांचक और विहंगम दृश्यों से भरी होगी। नाग के मुंह से प्रवेश करने के बाद भक्त उसके पेट से गुजरते हुए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबा रास्ता नापेंगे। पूरे परिसर को पारंपारिक स्वरूप में ढाला जा रहा है, जिसके अंतर्गत एक विशेष रास्ता स्थानीय तालाब के ऊपर से भी होकर निकलेगा। इस दिव्य सफर में श्रद्धालु पहाड़ों के बीच स्थित मनोरम सरोवर को पार करते हुए मनसा देवी के नाम पर बने भव्य प्रवेश द्वार तक पहुंचेंगे। रास्ते में कृत्रिम पहाड़, जल सरोवर और नागलोक के काल्पनिक दृश्य लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहने वाले हैं।
वैदिक और तांत्रिक परंपरा से जुड़ी थीम
मिर्जापुर का यह पूरा इलाका वैदिक काल से ही तांत्रिक अनुष्ठानों और वैदिक पूजा-पद्धतियों के लिए काफी प्रसिद्ध रहा है। इसी ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक विरासत को ध्यान में रखते हुए पूजा समिति ने इस बार नागलोक की अनूठी थीम को धरातल पर उतारने का फैसला किया है। पूजा समिति के कोषाध्यक्ष प्रणव कुमार मिश्रा ने जानकारी दी कि इस भव्य नागलोक को रूप देने का काम कोलकाता से आए कुशल कारीगर कर रहे हैं। इस विशाल ढांचे को खड़ा करने में अब तक 2500 से अधिक बांसों का इस्तेमाल किया जा चुका है, हालांकि इस पूरे नागलोक की मुख्य बनावट लोहे और धातु के पाइपों के मजबूत ढांचे पर टिकी हुई है।
60 से 70 लाख की लागत और लाखों भक्तों का अनुमान
समिति की ओर से इस पूरे पंडाल निर्माण पर लगभग 60 से 70 लाख रुपये की धनराशि खर्च की जा रही है। निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है और समिति के आयोजकों को पूरा भरोसा है कि उत्सव के दौरान यहां दर्शन के लिए लाखों की तादाद में श्रद्धालु उमड़ेंगे। अपनी भव्यता, विशालता और दुर्लभ संरचना के चलते यह नागलोक पंडाल केवल दरभंगा शहर ही नहीं, बल्कि पूरे मिथिला अंचल में इस दुर्गा पूजा का सबसे बड़ा आकर्षण बनने जा रहा है।



















