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श्रावण पूर्णिमा पर पंचक का साया, जानिए महामृत्युंजय जाप से रक्षा सूत्र बांधने का शास्त्रीय विधानत्योहार
27 अग॰ 2026, 5:49 pm (34 दिन पहले)· 1

श्रावण पूर्णिमा पर पंचक का साया, जानिए महामृत्युंजय जाप से रक्षा सूत्र बांधने का शास्त्रीय विधान

साल 2026 में रक्षाबंधन का त्योहार पंचक काल के साए में मनाया जाएगा। हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र के 108 बार जाप से पंचक के सभी नकारात्मक प्रभाव समाप्त हो जाते हैं।

भाई-बहन के अटूट स्नेह और विश्वास का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व साल 2026 में विशेष ज्योतिषीय परिस्थितियों के बीच मनाया जाएगा। पंचांग की सटीक गणनाओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा पर आयोजित होने वाला यह पवित्र त्योहार इस बार पंचक काल के प्रभाव में रहेगा। पूर्णिमा तिथि से ठीक एक दिन पहले पंचक की शुरुआत हो जाने के कारण रक्षा सूत्र बांधने को लेकर श्रद्धालुओं और परिवारों के मन में संशय की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। इस असमंजस को दूर करते हुए धार्मिक विद्वानों ने भगवान शिव की विशेष पूजा और सिद्ध मंत्रों के अनुष्ठान से पंचक के समस्त दोषों के निवारण का मार्ग प्रस्तुत किया है।

पंचक का समय और रक्षाबंधन पर इसका प्रभाव

ज्योतिषीय गणना बताती है कि वर्ष 2026 के रक्षाबंधन उत्सव से ठीक एक दिन पूर्व पंचक काल लग जाएगा। धर्मशास्त्रों के अनुसार पंचक काल का मुख्य विचार बांस तथा बांस से बनी वस्तुओं के प्रयोग, नए निर्माण कार्य या विशिष्ट लकड़ी कार्यों से संबंधित होता है। हरिद्वार के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री का कहना है कि सामान्य धारणा के विपरीत रक्षाबंधन के पावन अवसर पर राखी बांधने के कार्य पर पंचक का सीधा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके बावजूद किसी भी संभावित अनिष्ट या दोष की आशंका को समाप्त करने के लिए शास्त्रों में शिव आराधना को सर्वश्रेष्ठ माध्यम माना गया है।

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108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप: सबसे सटीक निवारण

पंचक काल के समस्त नकारात्मक प्रभावों का समूल नाश करने के लिए पंडित श्रीधर शास्त्री ने अत्यंत सरल एवं प्रभावी शास्त्रीय उपाय बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि श्रावण मास के अंतिम दिन भगवान शिव के परम कल्याणकारी महामृत्युंजय मंत्र "ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्, उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्" का 108 बार जप करना चाहिए। यह अनुष्ठान अपने घर के पवित्र पूजा स्थान अथवा किसी सिद्धपीठ शिवालय में बैठकर किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस शक्तिशाली मंत्र के प्रभाव से वातावरण शुद्ध होता है और पंचक सहित सभी प्रकार के ग्रह दोष समाप्त हो जाते हैं।

रक्षा सूत्र बांधने का शास्त्रीय विधान और शिव कृपा

भगवान भोलेनाथ की विधिवत पूजा-अर्चना और मंत्र जाप संपन्न करने के पश्चात बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांध सकती हैं। विद्वानों के अनुसार शिव आराधना के उपरांत वैदिक मंत्रों के उच्चारण के साथ राखी बांधने से इस पर्व का संपूर्ण और अक्षय फल प्राप्त होता है। शिव नगरी हरिद्वार के शास्त्रियों का मत है कि निष्ठा, नियम और श्रद्धा के साथ किए गए इस उपाय से पंचक का साया पूरी तरह खत्म हो जाता है। इससे भाइयों की दीर्घायु, समृद्धि तथा दोनों के जीवन में सुख, शांति और सुरक्षा का अक्षय वरदान प्राप्त होता है।

सवाल-जवाब

साल 2026 में रक्षाबंधन पर पंचक कब से शुरू हो रहा है?
रक्षाबंधन से ठीक एक दिन पहले पंचक काल की शुरुआत हो रही है, जिससे श्रावण पूर्णिमा का त्योहार पंचक के साए में मनाया जाएगा।
पंचक काल के नकारात्मक प्रभाव को दूर करने के लिए पंडित श्रीधर शास्त्री ने क्या उपाय बताया है?
हरिद्वार के ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री के अनुसार, भगवान शिव के महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप करने से पंचक के सभी दोष और नकारात्मक प्रभाव पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप कहाँ और कैसे करना चाहिए?
यह जाप घर के पूजा स्थल पर या किसी सिद्धपीठ शिवालय में बैठकर श्रद्धापूर्वक 108 बार करना चाहिए।
क्या पंचक काल में रक्षा सूत्र (राखी) बांधना शुभ है?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार पंचक का मुख्य विचार बांस की वस्तुओं से संबंधित होता है। भगवान शिव की विशेष आराधना और मंत्र पाठ के बाद राखी बांधना पूर्णतः शुभ और फलदायी रहता है।
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