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वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में राधारानी संग 1000 किलो के हिंडोले पर विराजे ठाकुरजी, 8 लाख की हरी पोशाक में दिए झूलन दर्शनत्योहार
15 अग॰ 2026, 7:29 pm (46 दिन पहले)· 3

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में राधारानी संग 1000 किलो के हिंडोले पर विराजे ठाकुरजी, 8 लाख की हरी पोशाक में दिए झूलन दर्शन

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में हरियाली तीज पर ठाकुरजी और राधारानी 1000 किलो के सोने-चांदी के हिंडोले पर विराजमान हुए, जहां भक्तों को 8 लाख रुपये की पोशाक में दर्शन मिले।

हरियाली तीज और स्वतंत्रता दिवस के दोहरे उत्सव के अवसर पर पूरे ब्रज क्षेत्र में भक्ति का विशेष माहौल दिखाई दे रहा है। वृंदावन स्थित प्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर में तड़के मंगला दर्शन के दौरान श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस पावन दिन पर बांके बिहारीजी को विशेष रूप से हरे रंग का भव्य शृंगार कराया गया है और वे राधारानी के साथ 1000 किलो वजनी सोने-चांदी से निर्मित भव्य हिंडोले पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं।

8 लाख रुपये की भव्य हरी पोशाक और फूलों से सजा मंदिर परिसर

इस विशेष धार्मिक अवसर पर ठाकुरजी के लिए तैयार की गई पोशाक आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है। बांके बिहारीजी को 8 लाख रुपये की कीमत वाली बेहद खूबसूरत हरी पोशाक और बहुमूल्य आभूषण धारण कराए गए हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर को देश-विदेश से मंगवाए गए सुंदर फूलों और आकर्षक हरियाली से सजाया गया है। हिंडोले के चारों तरफ चार सखियों की सुंदर प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो इस दृश्य को अद्भुत बनाती हैं। इस भव्य झूलन दर्शन को पाने के लिए देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु मथुरा और वृंदावन पहुंचे हैं।

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बाल रूप में दिए दर्शन, छप्पन भोग और घेवर का लगा प्रसाद

बांके बिहारी मंदिर में ठाकुरजी और प्रिय राधारानी दोनों ही अपने मनमोहक बाल रूप में श्रद्धालुओं को दर्शन दे रहे हैं। उत्सव के तहत भगवान को विशेष रूप से पारंपरिक घेवर और 56 भोग अर्पित किए गए। इस स्वर्ण-रजत हिंडोले की एक अनूठी परंपरा और विशेषता भी है। जब हिंडोले पर झूलते हुए राधारानी थक जाती हैं और उनका शृंगार अव्यवस्थित हो जाता है, तो उन्हें पीछे बनी विशेष सेज पर ले जाया जाता है। मान्यता के अनुसार, वहां ठाकुरजी स्वयं राधारानी के केश संवारते हैं और उनके पैर दबाकर उनकी सेवा करते हैं।

दंपतियों के लिए खास मान्यता और भक्तिमय वातावरण

धार्मिक दृष्टि से हरियाली तीज पर्व भगवान कृष्ण और राधारानी के अटूट प्रेम तथा पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है। ब्रज क्षेत्र में इस दिन ठाकुरजी को झूला झुलाने की परंपरा सदियों पुरानी है। श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि हरियाली तीज पर बांके बिहारीजी और राधारानी के हिंडोला दर्शन करने से पारिवारिक जीवन में सुख, समृद्धि और शांति बनी रहती है। साथ ही वैवाहिक रिश्तों में मधुरता आती है। मंदिर परिसर में लगातार गूंज रहे मधुर भजनों, कीर्तन और जयकारों ने पूरे माहौल को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया है।

सवाल-जवाब

हरियाली तीज पर बांके बिहारीजी का हिंडोला किस धातु और वजन का है?
बांके बिहारी मंदिर में ठाकुरजी और राधारानी के लिए 1000 किलो का सोने-चांदी से निर्मित भव्य हिंडोला तैयार किया गया है।
इस अवसर पर बांके बिहारीजी की पोशाक की क्या खासियत है?
हरियाली तीज पर ठाकुरजी को हरे रंग का विशेष शृंगार कराया गया है और उन्हें 8 लाख रुपये की पोशाक धारण कराई गई है।
भगवान बांके बिहारीजी को किस भोग का प्रसाद अर्पित किया गया?
इस पावन दिन पर ठाकुरजी को पारंपरिक घेवर और छप्पन भोग का विशेष प्रसाद लगाया गया।
हरियाली तीज पर हिंडोला दर्शन का क्या धार्मिक महत्व है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, हरियाली तीज पर ठाकुरजी के झूलन दर्शन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और परिवार में समृद्धि बनी रहती है।
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