ताजमहल और ऐतिहासिक इमारतों के लिए दुनियाभर में पहचाने जाने वाला आगरा सिर्फ अपनी शानदार वास्तुकला तक सीमित नहीं है। इस शहर की एक और खासियत है इसका जायकेदार खान-पान, और नॉनवेज के शौकीनों के लिए यहां एक ऐसा ठिकाना है जिसकी महक लोगों को दूर-दूर से खींच लाती है। सेक्टर 12 बोदला रोड पर बिहार के मशहूर चम्पारण हांडी मटन की कई दुकानें एक कतार में सजी रहती हैं, और सुबह होते ही यहां मटन प्रेमियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है।
मिट्टी के बर्तन और धीमी आंच का असली कमाल
दुकानदार जितेंद्र सिंह बताते हैं कि उनके मटन की कामयाबी के पीछे सबसे बड़ी वजह इसका पुराना और पारंपरिक तरीका है। यहां मटन को प्रेशर कुकर या स्टील के बर्तनों में नहीं, बल्कि पूरी तरह मिट्टी की हांडी में पकाया जाता है। उनका कहना है कि कुकर में बनाने पर मटन की असली खुशबू भाप के साथ उड़ जाती है, जबकि मिट्टी की हांडी में धीमी आंच पर पकने से एक सोंधी महक उठती है जो स्वाद को दोगुना कर देती है। इसमें शुद्ध सरसों के तेल और चुनिंदा खड़े मसालों का इस्तेमाल होता है, जो जायके को और निखार देते हैं।
घंटों की मेहनत और घर का सीक्रेट मसाला
इस मटन को तैयार करना कोई जल्दबाजी का काम नहीं है, बल्कि इसमें कई घंटों की मेहनत लगती है। जितेंद्र सिंह के मुताबिक सबसे पहले गर्म सरसों के तेल में हर तरह के साबुत खड़े मसाले डालकर अच्छी तरह भूना जाता है। मसाले भुन जाने के बाद इसमें घर पर पिसा हुआ एक खास सीक्रेट मसाला मिलाया जाता है। इन सभी मसालों को बेहद धीमी आंच पर इतना पकाया जाता है कि उनका पूरा स्वाद तेल में उतर आए। इसके बाद मटन के बड़े-बड़े टुकड़ों को इसी ग्रेवी में मिलाकर मिट्टी की हांडी में भर दिया जाता है। आखिरी चरण में हांडी के मुंह को आटे से पूरी तरह सील कर दिया जाता है और उसे कोयले की हल्की आंच पर धीरे-धीरे पकने के लिए छोड़ दिया जाता है।
490 रुपये में मटन के 6 बड़े पीस
सेक्टर 12 की इस दुकान के मालिक के अनुसार एक हांडी मटन की कीमत 490 रुपये रखी गई है। इतने में ग्राहक को मटन के 6 बड़े और अच्छे टुकड़े मिलते हैं, जिससे पेट और मन दोनों भर जाते हैं। यहां एक पीस का वजन करीब 50 से 60 ग्राम तक होता है। मिट्टी के बर्तन में पकने का फायदा यह है कि मटन अंदर तक पूरी तरह गल जाता है और बेहद रसदार बनता है।
डिमांड इतनी कि फोन पर ही हो जाती है बुकिंग
यह हांडी मटन आगरा और इसके आसपास के इलाकों में इस कदर मशहूर हो चुका है कि दुकान खुलते ही ग्राहकों की लाइन लग जाती है। दुकानदार का कहना है कि कई बार मांग इतनी बढ़ जाती है कि चाहकर भी सभी ग्राहकों तक मटन नहीं पहुंच पाता। दूर से आने वालों को निराश न होना पड़े, इसके लिए दुकान पर फोन के जरिए एडवांस बुकिंग की सुविधा दी गई है। इसके अलावा ऑनलाइन फूड डिलीवरी ऐप के जरिए भी ऑर्डर लिए जाते हैं, जहां से हर दिन ढेरों ऑर्डर मिलते हैं।













