छत्तीसगढ़ के बिलासपुर शहर में बरसात शुरू होते ही देवकीनंदन चौक का नजारा बदल जाता है। यहां हर दिन कमल गट्टे यानी कोपरा खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। स्वाद और पौष्टिकता के चलते मशहूर इस मौसमी फल को खरीदने वालों में शुगर के मरीज भी बड़ी तादाद में शामिल हैं।
नांदघाट के तालाबों से बिलासपुर तक का सफर
देवकीनंदन चौक पर पिछले कई सालों से कमल गट्टा बेच रहीं बुजुर्ग महिला विजयलक्ष्मी ठाकुर बताती हैं कि यह फल बेमेतरा जिले के नांदघाट और आसपास के तालाबों से लाया जाता है। ताजा कमल गट्टे के मुलायम दानों और उसके अलग स्वाद की वजह से ग्राहक इसे बार-बार खरीदने आते हैं। शहर के लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले ग्राहक भी इसे पसंद करते हैं, जिससे बरसात के दिनों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है।
80 से 100 रुपये दर्जन में बिक रहा फल, अच्छी कमाई
देवकीनंदन चौक पर कमल गट्टा फिलहाल 80 से 100 रुपये प्रति दर्जन की दर से बिक रहा है। विजयलक्ष्मी ठाकुर के मुताबिक हर दिन अच्छी खासी संख्या में ग्राहक उनके पास पहुंचते हैं, जिससे इस मौसमी कारोबार से उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। बरसात का मौसम उनके लिए साल का सबसे व्यस्त और मुनाफे वाला समय होता है।
शुगर के मरीजों में क्यों बढ़ रहा क्रेज
विक्रेता के मुताबिक कई ग्राहक खासतौर पर शुगर के मरीजों के लिए कमल गट्टा खरीदते हैं। उनका दावा है कि इसमें शुगर की मात्रा कम मानी जाती है और यह सेहत के लिए फायदेमंद समझा जाता है। हालांकि, किसी भी बीमारी की स्थिति में इसका सेवन शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना ज्यादा बेहतर रहता है।













