पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में राजस्थानी गट्टे की सब्जी का एक विशेष स्थान है। जब रसोई में ताजी हरी सब्जियां उपलब्ध न हों, तब बेसन से तैयार होने वाली यह स्वादिष्ट सब्जी सबसे बेहतरीन विकल्प बनकर उभरती है। हालांकि, कई बार घर पर गट्टे बनाते समय वे बेहद सख्त और कड़े हो जाते हैं, जिससे पूरी सब्जी का स्वाद प्रभावित होता है। अगर गट्टे अंदर से स्पंजी और मुलायम हों, तो वे ग्रेवी के मसालों को अच्छी तरह सोख लेते हैं और उनका हर निवाला बेहद लजीज लगता है। कुकिंग एक्सपर्ट गीता चौधरी ने एक ऐसी आसान और कारगर विधि साझा की है, जिससे गट्टे हमेशा रुई की तरह मुलायम और स्वादिष्ट बनेंगे। बेसन का आटा गूंथते समय एक विशेष सामग्री मिलाने और पकाने की सही तकनीक अपनाने से आप घर पर ही ढाबा स्टाइल गट्टे की सब्जी आसानी से तैयार कर सकते हैं।
गट्टे के आटे में दही और तेल का सही संतुलन
मुलायम और स्पंजी गट्टे बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत सही आटा तैयार करने से होती है। सबसे पहले एक चौड़े बर्तन या परात में आवश्यकतानुसार बेसन निकाल लें। इसके बाद बेसन में स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर, एक चुटकी हींग, कसूरी मेथी और थोड़ी सी अजवाइन मिलाएं। अजवाइन और हींग न केवल सब्जी के स्वाद को बढ़ाते हैं, बल्कि बेसन को पचाने में भी मददगार साबित होते हैं।
इस रेसिपी का सबसे मुख्य और गुप्त हिस्सा बेसन में सही मात्रा में मोयन मिलाना है। सूखे मसालों को बेसन में मिलाने के बाद इसमें तीन से चार चम्मच ताजा दही और तीन से चार चम्मच तेल अवश्य डालें। दही और तेल का यह अनूठा संयोजन गट्टों को भीतर से बेहद नरम, जालीदार और स्पंजी बनाता है। पानी डालने से पहले दही, तेल और मसालों को बेसन के साथ हाथों से अच्छी तरह मसलकर मिला लें। जब सभी सामग्रियां समान रूप से मिल जाएं, तब थोड़ा-थोड़ा करके साधारण पानी डालते जाएं और एक नरम तथा चिकना आटा गूंथ लें। ध्यान रखें कि गट्टे का आटा बहुत ज्यादा सख्त या कड़ा नहीं होना चाहिए।
गट्टों को सही आकार देना और बेलने का तरीका
आटा तैयार हो जाने के बाद उसे कुछ हिस्सों में बांटकर बराबर आकार की लोइयां बना लें। अब अपनी हथेलियों की मदद से लोइयों को दबाते हुए लंबे और पतले रोल तैयार करें। गट्टों को आकार देते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि रोल अधिक मोटे न हों।
पतले गट्टे उबलते पानी में बहुत तेजी से और अंदर तक समान रूप से पक जाते हैं। इसके विपरीत, यदि रोल बहुत ज्यादा मोटे बनाए जाएंगे, तो वे बाहर से पकने के बावजूद अंदर से कच्चे रह सकते हैं। अंदर से कच्चे रह जाने के कारण ठंडे होने पर वे बेहद सख्त और रबड़ जैसे महसूस होने लगते हैं। इसलिए गट्टों को हमेशा मध्यम या पतला रोल ही करना चाहिए।
गट्टे उबालने का सटीक तरीका और पकने की पहचान
गट्टों को पकाने के लिए एक बड़े और चौड़े बर्तन में पर्याप्त मात्रा में पानी डालकर उसे तेज आंच पर गर्म करें। पानी में जब तेज उबाल आने लगे, तभी उसमें तैयार किए गए बेसन के रोल डालें। गट्टों को हमेशा केवल खौलते हुए पानी में ही डालना चाहिए। यदि उन्हें ठंडे या हल्के गर्म पानी में डाल दिया जाएगा, तो बेसन पानी सोखकर बिखर सकता है और गट्टों की बनावट पूरी तरह खराब हो सकती है।
गट्टों को तब तक उबलने दें जब तक कि वे बर्तन के पेंदे को छोड़कर पानी की सतह पर तैरने न लगें। इसके अलावा, जब गट्टों की बाहरी सतह पर छोटे-छोटे दाने या उभार दिखाई देने लगें, तो यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बेसन अंदर तक पूरी तरह पक चुका है। इस स्थिति में गैस बंद कर दें और गट्टों को पानी से बाहर निकाल लें।
उबले हुए पानी को संभालकर रखने का लाभ
गट्टों को बर्तन से बाहर निकालने के बाद जिस पानी में उन्हें उबाला गया है, उसे फेंकने की भूल बिल्कुल न करें। इस उबले हुए पानी में बेसन और मसालों का अच्छा खासा अर्क आ जाता है। इस पानी को एक अलग बर्तन में संभालकर रख लें, क्योंकि बाद में ग्रेवी तैयार करते समय इसी पानी का इस्तेमाल किया जाएगा।
गट्टों के पानी को ग्रेवी में डालने से ग्रेवी का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है और उसकी बनावट में एक बेहतरीन गाढ़ापन आता है। गट्टों को थोड़ा ठंडा होने के लिए रख दें। जब वे छूने लायक ठंडे हो जाएं, तब चाकू की मदद से उन्हें अपनी पसंद के छोटे या मध्यम टुकड़ों में काट लें।
काजू और दही से बनाएं समृद्ध ग्रेवी
एक बेहतरीन और स्वादिष्ट ग्रेवी तैयार करने के लिए सबसे पहले प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन और कुछ काजू के दानों को मिलाकर एक महीन पेस्ट बना लें। काजू मिलाने से ग्रेवी में ढाबे जैसा रिच और क्रीमी टेक्सचर आता है।
इसके बाद एक कटोरी में ताजा दही लें और उसमें हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर तथा नमक मिलाएं। दही और मसालों को व्हिस्क या चम्मच की मदद से तब तक अच्छी तरह फेंटें जब तक कि वह पूरी तरह एकसार न हो जाए। गरम तेल में दही डालने से पहले उसे मसालों के साथ फेंट लेने से दही कभी फटती नहीं है और ग्रेवी में एक समान उभार आता है।
तड़का लगाने और धीमी आंच पर पकाने की विधि
कड़ाही में तेल डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें। तेल गर्म होने पर उसमें जीरा और राई का तड़का लगाएं। तड़का चटकने के बाद इसमें तैयार किया हुआ प्याज, टमाटर और काजू का पेस्ट डालें। इस मसाले को धीमी से मध्यम आंच पर तब तक भूनें जब तक कि कड़ाही के किनारों से तेल अलग होता हुआ न दिखाई देने लगे।
मसाला अच्छी तरह भून जाने के बाद आंच को बिल्कुल धीमा कर दें और फेंटा हुआ दही वाला मिश्रण कड़ाही में डालें। दही डालते ही चम्मच से लगातार चलाते रहें ताकि मिश्रण फटने न पाए। जब ग्रेवी में हल्का उबाल आने लगे, तब इसमें संभालकर रखा हुआ गट्टे वाला उबला पानी मिला दें। इससे ग्रेवी की स्थिरता एकदम सटीक हो जाएगी।
गट्टों का दम और अंतिम फिनिशिंग
जब ग्रेवी में दोबारा अच्छा उबाल आने लगे, तब काटे गए गट्टों के टुकड़ों को ग्रेवी में डाल दें। अब कड़ाही पर ढक्कन लगाकर धीमी आंच पर सब्जी को लगभग आठ से दस मिनट तक पकने दें। धीमी आंच पर पकाने के दौरान गट्टे ग्रेवी के सभी मसालों और स्वादों को अपने भीतर गहराई तक सोख लेते हैं, जिससे वे अत्यधिक रसीले और मुलायम हो जाते हैं।
तय समय के बाद ढक्कन हटाएं और ऊपर से थोड़ा सा गरम मसाला तथा बारीक कटा हुआ हरा धनिया छिड़कें। गैस बंद करें और तैयार राजस्थानी गट्टे की सब्जी को गरमागरम रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसें। गट्टे का आटा सख्त न गूंथना, दही और तेल का सही मोयन देना, खौलते पानी में उबालना और धीमी आंच पर पकाना ही इस लाजवाब सब्जी की असली सफलता की कुंजी है।



















