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छत्तीसगढ़ के गांवों में मानसून के साथ थाली में लौट आया जंगली मशरूम छाता पुटू, चावल के साथ मिलता है असली मजाखानपान
7 जुल॰ 2026, 6:38 pm (45 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ के गांवों में मानसून के साथ थाली में लौट आया जंगली मशरूम छाता पुटू, चावल के साथ मिलता है असली मजा

छत्तीसगढ़ में बारिश शुरू होते ही जंगलों और खेतों में उगने वाला देसी छाता मशरूम गांव-गांव की रसोई में पहुंच जाता है, जानिए जांजगीर-चांपा की गृहिणी अन्नू से इसकी पारंपरिक सब्जी बनाने की पूरी विधि।

छत्तीसगढ़ में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही गांवों की रसोई में एक खास मेहमान लौट आता है, जंगल और खेतों में अपने आप उग आने वाला छाता मशरूम, जिसे स्थानीय बोली में छाता पुटू कहा जाता है। बारिश शुरू होते ही यह देसी मशरूम खेत-खलिहानों और पेड़ों के आसपास दिखने लगता है और ग्रामीण इलाकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह मशरूम बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के घर-घर की थाली का हिस्सा बन जाता है।

जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव की गृहिणी अन्नू बताती हैं कि जब भी बरसात में ताजा छाता मशरूम मिलता है, तो घर में उसकी भुजिया या मसालेदार सब्जी जरूर बनाई जाती है। उनका कहना है, 'गरमा-गरम छाता मशरूम की सब्जी चावल के संग खायबर मजा आथे.'

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जंगल से रसोई तक का सफर

बरसात के मौसम में जंगलों, खेतों और पेड़ों के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाला छाता पुटू ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाता है। बारिश की नमी और सही तापमान मिलते ही यह मशरूम जमीन से फूटकर बाहर आ जाता है। गांव के लोग इसे रोज ताजा तोड़कर घर लाते हैं और उसी दिन पारंपरिक तरीके से इसकी सब्जी तैयार करते हैं, क्योंकि यह मशरूम ज्यादा देर तक ताजा नहीं रहता।

सफाई से पकाने तक की तैयारी

बरसात में मिलने वाले छाता पुटू पर मिट्टी, पत्तियां और अन्य कचरा चिपका रहता है, इसलिए इसे साफ पानी से कई बार धोना जरूरी होता है। एक बार की धुलाई काफी नहीं होती, तभी मशरूम पूरी तरह साफ माना जाता है। इसके बाद बड़े आकार के मशरूम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, ताकि पकाते समय हर टुकड़ा जल्दी और समान रूप से गल जाए।

छत्तीसगढ़ी तड़के का जादू

अन्नू बताती हैं कि सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है और उसमें सरसों के दाने तड़काए जाते हैं। इसके बाद बारीक कटा प्याज और लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भुना जाता है। फिर टमाटर, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और अन्य मसाले डालकर खुशबूदार मसाला तैयार किया जाता है। यही देसी तड़का इस सब्जी को छत्तीसगढ़ी स्वाद देता है।

सिर्फ 5 से 7 मिनट में तैयार

मसाला अच्छी तरह भुन जाने के बाद उसमें कटे हुए छाता पुटू डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है। इसके बाद कड़ाही को ढककर करीब 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। मशरूम के नरम होते ही उसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है और सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है।

भात के साथ आता है असली मजा

छत्तीसगढ़ में छाता पुटू की गरमा-गरम भुजिया या मसालेदार सब्जी को दाल-भात के साथ परोसा जाता है। कई लोग इसे रोटी के साथ भी खाते हैं, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि इसका असली स्वाद गरम चावल के साथ ही खुलकर सामने आता है।

सेहत के लिहाज से भी खास

प्राकृतिक रूप से मिलने वाला छाता पुटू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है। यही वजह है कि बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के गांवों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है और यह लोगों की पसंदीदा मौसमी डिश बन जाती है।

सवाल-जवाब

छाता पुटू क्या है?
यह छत्तीसगढ़ में मानसून के दौरान जंगलों, खेतों और पेड़ों के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाला एक देसी छाता मशरूम है।
छाता पुटू कब और कहां मिलता है?
यह बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में, जैसे जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव में, खेतों और जंगलों के आसपास आसानी से मिल जाता है।
छाता पुटू को पकाने से पहले कैसे साफ किया जाता है?
इसमें चिपकी मिट्टी, पत्तियां और कचरा हटाने के लिए इसे साफ पानी से कई बार धोया जाता है और बड़े मशरूम को छोटे टुकड़ों में काटा जाता है।
छाता पुटू की सब्जी बनाने में कितना समय लगता है?
मसाला तैयार होने के बाद मशरूम डालकर कड़ाही ढककर करीब 5 से 7 मिनट में सब्जी पककर तैयार हो जाती है।
छाता पुटू की सब्जी में कौन-कौन से मसाले डाले जाते हैं?
सरसों के दाने, प्याज, लहसुन, टमाटर, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर डालकर मसाला तैयार किया जाता है।
छाता पुटू की सब्जी किसके साथ खाई जाती है?
इसे दाल-भात के साथ परोसा जाता है, कुछ लोग रोटी के साथ भी खाते हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार इसका असली स्वाद गरम चावल के साथ आता है।
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