छत्तीसगढ़ में मानसून की पहली फुहारों के साथ ही गांवों की रसोई में एक खास मेहमान लौट आता है, जंगल और खेतों में अपने आप उग आने वाला छाता मशरूम, जिसे स्थानीय बोली में छाता पुटू कहा जाता है। बारिश शुरू होते ही यह देसी मशरूम खेत-खलिहानों और पेड़ों के आसपास दिखने लगता है और ग्रामीण इलाकों में इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है। स्वाद और पोषण से भरपूर यह मशरूम बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के घर-घर की थाली का हिस्सा बन जाता है।
जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव की गृहिणी अन्नू बताती हैं कि जब भी बरसात में ताजा छाता मशरूम मिलता है, तो घर में उसकी भुजिया या मसालेदार सब्जी जरूर बनाई जाती है। उनका कहना है, 'गरमा-गरम छाता मशरूम की सब्जी चावल के संग खायबर मजा आथे.'
जंगल से रसोई तक का सफर
बरसात के मौसम में जंगलों, खेतों और पेड़ों के आसपास प्राकृतिक रूप से उगने वाला छाता पुटू ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से मिल जाता है। बारिश की नमी और सही तापमान मिलते ही यह मशरूम जमीन से फूटकर बाहर आ जाता है। गांव के लोग इसे रोज ताजा तोड़कर घर लाते हैं और उसी दिन पारंपरिक तरीके से इसकी सब्जी तैयार करते हैं, क्योंकि यह मशरूम ज्यादा देर तक ताजा नहीं रहता।
सफाई से पकाने तक की तैयारी
बरसात में मिलने वाले छाता पुटू पर मिट्टी, पत्तियां और अन्य कचरा चिपका रहता है, इसलिए इसे साफ पानी से कई बार धोना जरूरी होता है। एक बार की धुलाई काफी नहीं होती, तभी मशरूम पूरी तरह साफ माना जाता है। इसके बाद बड़े आकार के मशरूम को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटा जाता है, ताकि पकाते समय हर टुकड़ा जल्दी और समान रूप से गल जाए।
छत्तीसगढ़ी तड़के का जादू
अन्नू बताती हैं कि सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है और उसमें सरसों के दाने तड़काए जाते हैं। इसके बाद बारीक कटा प्याज और लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भुना जाता है। फिर टमाटर, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और अन्य मसाले डालकर खुशबूदार मसाला तैयार किया जाता है। यही देसी तड़का इस सब्जी को छत्तीसगढ़ी स्वाद देता है।
सिर्फ 5 से 7 मिनट में तैयार
मसाला अच्छी तरह भुन जाने के बाद उसमें कटे हुए छाता पुटू डालकर अच्छी तरह मिलाया जाता है। इसके बाद कड़ाही को ढककर करीब 5 से 7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। मशरूम के नरम होते ही उसमें स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है और सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है।
भात के साथ आता है असली मजा
छत्तीसगढ़ में छाता पुटू की गरमा-गरम भुजिया या मसालेदार सब्जी को दाल-भात के साथ परोसा जाता है। कई लोग इसे रोटी के साथ भी खाते हैं, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि इसका असली स्वाद गरम चावल के साथ ही खुलकर सामने आता है।
सेहत के लिहाज से भी खास
प्राकृतिक रूप से मिलने वाला छाता पुटू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पोषक तत्वों से भी भरपूर माना जाता है। यही वजह है कि बरसात के मौसम में छत्तीसगढ़ के गांवों में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है और यह लोगों की पसंदीदा मौसमी डिश बन जाती है।











