घर में जमा मलाई से देसी घी निकालना बरसों पुरानी परंपरा है, लेकिन ज्यादातर घरों में यह काम धीरे-धीरे बंद होता जा रहा है क्योंकि इसमें मेहनत और वक्त दोनों बहुत लगते हैं। पहले दिनों तक मलाई जमा करनी पड़ती है, फिर उसे मथकर मक्खन अलग किया जाता है और आखिर में उस मक्खन को कड़ाही में देर तक पकाकर घी तैयार होता है। इतनी लंबी प्रक्रिया में अगर थोड़ी सी भी लापरवाही हो जाए तो घी कड़ाही की तली में चिपककर जल जाता है, जिससे मेहनत भी बेकार जाती है और घी की मात्रा भी घट जाती है। यही वजह है कि अब कुकिंग एक्सपर्ट उमा मीणा का बताया एक आसान तरीका सुर्खियों में है, जिसमें मक्खन निकालने की झंझट को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है।
गिलास वाली इस ट्रिक में आखिर है क्या खास
इस तरीके की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें रसोई में मौजूद एक साधारण गिलास का इस्तेमाल किया जाता है। यह गिलास मलाई में मौजूद पानी को फैट से अलग करने का काम करता है, जिससे न सिर्फ घी जल्दी बनकर तैयार होता है बल्कि कड़ाही की तली में चिपकने वाली खुरचन भी बहुत कम बनती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि जितना पानी मलाई से पहले ही अलग हो जाता है, घी पकाते समय उतनी कम मेहनत लगती है और मलाई से मिलने वाले घी की मात्रा भी बढ़ जाती है। आइए इस पूरी प्रक्रिया को क्रम से समझते हैं।
पहला कदम, मलाई को अच्छी तरह फेंटना
सबसे पहले फ्रिज में ठंडी की गई मलाई को किसी गहरे बर्तन में निकाल लें। इसके बाद मथानी या किसी बड़े चम्मच की मदद से मलाई को करीब 2 से 3 मिनट तक लगातार एक ही दिशा में फेंटें। इस स्टेप को हल्के में लेने की गलती न करें, क्योंकि लगातार एक दिशा में फेंटने से मलाई का टेक्सचर पहले से कहीं ज्यादा मुलायम और गाढ़ा हो जाता है। यही मुलायम बनावट आगे की पूरी प्रक्रिया को तेज और आसान बनाने में मदद करती है।
ठंडा पानी डालकर फैट को ऊपर लाना
जब मलाई अच्छी तरह फेंट जाए, तब उसमें एकदम ठंडा पानी मिलाएं। अगर घर में बर्फ के टुकड़े मौजूद हों तो उन्हें भी इसमें डाला जा सकता है। इसके बाद मिश्रण को दोबारा तेज गति से फेंटना जरूरी है। दरअसल ठंडे तापमान की वजह से मलाई में मौजूद फैट जल्दी ऊपर की तरफ जमा होने लगता है और उसका गाढ़ा हिस्सा साफ नजर आने लगता है, जबकि हल्का और पतला हिस्सा नीचे बैठ जाता है।
अतिरिक्त पानी को अलग करना न भूलें
इसके बाद बर्तन को हल्का सा तिरछा करके उसमें बचा अतिरिक्त पानी या पतला मट्ठा धीरे-धीरे बाहर निकाल दें। इस स्टेप को नजरअंदाज करने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि अगर बर्तन में पानी बचा रह गया तो घी बनाते समय खुरचन की मात्रा काफी बढ़ जाएगी और काफी सारा घी उसी में चिपककर बर्बाद हो सकता है।
अब आती है गिलास वाली असली ट्रिक
पानी निकालने के बाद बची हुई गाढ़ी मलाई में थोड़ा सा साफ पानी मिलाया जाता है। इसके बाद बर्तन के ठीक बीचोंबीच एक साफ कांच या स्टील का गिलास सीधा खड़ा करके रख दिया जाता है। पूरे बर्तन को कुछ देर के लिए फ्रिज या फ्रीजर में रख दिया जाता है, ताकि मिश्रण अच्छी तरह जम सके। यही स्टेप इस पूरी ट्रिक का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है, क्योंकि गिलास के सहारे मिश्रण एक खास तरीके से सेट होता है जिससे फैट और पानी अपने आप अलग-अलग परतों में बंट जाते हैं।
जब मलाई अच्छी तरह जम जाए, तब बर्तन को फ्रिज से बाहर निकाला जाता है। अब गिलास को बहुत धीरे-धीरे घुमाते हुए बाहर निकाल लिया जाता है। गिलास हटते ही बीच में एक खाली जगह बन जाती है और नीचे जमा पानी उसी जगह से आसानी से अलग हो जाता है। इसके बाद सिर्फ ऊपर गाढ़ी फैट की परत बचती है, यानी मलाई से लगभग पूरा पानी अलग हो चुका होता है।
अब सिर्फ 5 से 7 मिनट में तैयार होगा घी
आखिरी स्टेप में ऊपर जमा सफेद फैट को कड़ाही में डाला जाता है और उसे धीमी या मध्यम आंच पर पकाया जाता है। चूंकि इस मिश्रण में पानी लगभग नहीं बचता, इसलिए घी सामान्य तरीके से कहीं ज्यादा जल्दी तैयार हो जाता है। खुरचन बहुत कम बनती है और घी का रंग भी साफ सुनहरा नजर आता है। सबसे राहत की बात यह है कि घी के जलने की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है, जिससे मलाई का पूरा और सही इस्तेमाल हो पाता है।
यह तरीका आखिर फायदेमंद क्यों माना जा रहा है
इस ट्रिक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मक्खन निकालने वाला लंबा और मेहनत भरा काम पूरी तरह छूट जाता है। इससे बर्तन भी कम गंदे होते हैं और घी बनाने में लगने वाला समय भी काफी घट जाता है। जब पानी पहले ही मलाई से अलग कर लिया जाता है, तो घी बनाते समय छींटे कम पड़ते हैं और कड़ाही की तली में चिपकने वाली खुरचन भी काफी कम बनती है। यही वजह है कि कई लोग इस तरीके को आसान, साफ-सुथरा और समय बचाने वाला मान रहे हैं। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि तैयार घी की मात्रा और उसकी गुणवत्ता इस्तेमाल की गई मलाई की गुणवत्ता और उसकी मात्रा पर भी काफी हद तक निर्भर करती है।











