सरसों का तेल पेरवाने से पहले किसी भी गांव की महिला से पूछिए, वह सबसे पहले एक ही बात कहेगी, दाने पहले साफ करो, तेल बाद में निकलवाओ. खेत से घर आई सरसों में मिट्टी, धूल, सूखी पत्तियां, डंठल और छोटे कंकड़ हमेशा मिले रहते हैं और अगर यह कचरा दानों के साथ ही पेराई मशीन में चला जाए, तो तेल की पूरी क्वालिटी बिगड़ जाती है. यही वजह है कि गांवों में आज भी तेल निकलवाने से ठीक पहले सरसों की सफाई को सबसे जरूरी काम माना जाता है.
साफ दाने ही देते हैं शुद्ध और खुशबूदार तेल
जब सरसों को पूरी तरह साफ करके पेरा जाता है, तो निकलने वाला तेल साफ, पारदर्शी और तेज खुशबू वाला होता है. दानों में कचरा न होने से तेल का रंग भी बेहतर बना रहता है और उसमें कोई अजीब या फालतू महक नहीं आती. यही कारण है कि गांवों में लोग तेल पेरवाने से पहले सफाई पर सबसे ज्यादा ध्यान देते हैं, क्योंकि यह छोटी सी मेहनत तेल के स्वाद और सेहत, दोनों को काफी बेहतर बना देती है.
सूप से फटकना, सफाई का सबसे पुराना और भरोसेमंद तरीका
सुलतानपुर के गांवों में सरसों साफ करने के लिए सबसे ज्यादा सूप, यानी अनाज फटकने वाले परंपरागत बर्तन का इस्तेमाल होता है. महिलाएं थोड़ी-थोड़ी सरसों सूप में लेकर उसे हल्के हाथों से ऊपर-नीचे फटकती हैं. इस हरकत से हल्का कचरा, भूसी और सूखी पत्तियां हवा में उड़कर अलग हो जाती हैं, जबकि साफ और भारी दाने नीचे ही रह जाते हैं. यह तरीका पीढ़ियों से चला आ रहा है और बिना किसी मशीन के इस्तेमाल के भी सबसे असरदार माना जाता है.
सूप से फटकते समय सिर्फ धूल मिट्टी ही अलग नहीं होती, बल्कि छोटे तिनके, सूखी फलियां, घास के टुकड़े और बारीक कंकड़ भी बाहर निकल जाते हैं. अगर यह सारी अशुद्धियां सरसों के साथ मशीन में चली जाएं, तो कोल्हू पर फालतू का दबाव पड़ता है, तेल का स्वाद कड़वा हो सकता है और उसका रंग भी गहरा या डार्क हो जाता है.
फटकने के बाद हल्की धूप दिखाना क्यों जरूरी
सूप से साफ करने के बाद सुलतानपुर के ग्रामीण परिवारों में सरसों को कुछ घंटों के लिए कपड़े पर फैलाकर हल्की धूप में रखा जाता है. ऐसा करने से दानों के अंदर बची नमी या सीलन पूरी तरह खत्म हो जाती है. सूखे हुए दाने पेराई के समय तेल आसानी से और ज्यादा मात्रा में छोड़ते हैं. हालांकि एक सावधानी जरूरी है, सरसों को बहुत तेज धूप में देर तक नहीं छोड़ना चाहिए, सिर्फ हल्की धूप दिखाना ही सबसे अच्छा नतीजा देता है.
कंकड़ पत्थर मशीन के लिए भी खतरा
सफाई सिर्फ तेल की क्वालिटी के लिए ही जरूरी नहीं है, बल्कि मशीन की सुरक्षा के लिए भी उतनी ही मायने रखती है. अगर सरसों में कंकड़, पत्थर, लकड़ी के टुकड़े या कोई भी कड़ी चीज रह जाए, तो पेराई मशीन के पुर्जे, यानी ब्लेड या कोल्हू के हिस्से टूट सकते हैं या घिस सकते हैं. इससे मशीन खराब होती है और तेल मिल चलाने वाले को भी सीधा नुकसान उठाना पड़ता है. इसीलिए किसान और मिल संचालक दोनों हमेशा यही सलाह देते हैं कि सरसों को घर से एकदम अच्छी तरह साफ करके ही पेराई के लिए लाया जाए.
बिना मशीन के भी परफेक्ट सफाई, महिलाओं का पुराना अनुभव
सरसों साफ करने का यह देसी तरीका आज भी गांव की महिलाओं ने बहुत संभालकर रखा है. उन्हें न तो कोई आधुनिक मशीन चाहिए और न ही कोई महंगा उपकरण, सिर्फ एक सूप की मदद से वे मिनटों में बोरियों भर सरसों साफ कर लेती हैं. उनका अनुभव इतना पक्का होता है कि फटकते समय वे सिर्फ वही दाने बचाती हैं जो पेराई के लिए एकदम सही हों, बाकी हल्का कचरा अपने आप अलग हो जाता है.
थोड़ी मेहनत, शुद्ध तेल और सुरक्षित मशीन दोनों
कुल मिलाकर देखा जाए तो सरसों की पेराई से पहले सूप से सफाई करना सिर्फ एक पुरानी रीत नहीं, बल्कि शुद्धता बनाए रखने का बेहद व्यावहारिक तरीका है. साफ दानों से तेल ज्यादा मात्रा में निकलता है, मशीन लंबे समय तक सुरक्षित रहती है और तेल में किसी तरह की मिलावट या बीमारी का खतरा भी नहीं रहता. अगर हर परिवार तेल पेरवाने से पहले इस आसान और देसी तरीके को अपनाए, तो बिना ज्यादा खर्च किए घर के खाने के लिए सबसे शुद्ध और बेहतरीन क्वालिटी का तेल हासिल किया जा सकता है.











