उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में तीन दिवसीय आम महोत्सव शुरू हो गया है, जिसमें देशभर के बागों से आए रंग-बिरंगे आम एक साथ नजर आ रहे हैं। इस महोत्सव की खास बात यह है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के करीब 25 किस्म के आमों ने भी अपनी जगह बनाई है, जिनकी खुशबू और मिठास इस उत्सव को और रंगीन बना रही है।
35 में से 25 किस्मों का हुआ चयन
जिला उद्यान अधिकारी अरुण कुमार ने बताया कि लखनऊ में हर साल आयोजित होने वाला यह आम महोत्सव इसलिए खास माना जाता है, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में उगाई जाने वाली आम की तमाम किस्में एक ही मंच पर देखने को मिलती हैं। इन आमों की मांग सिर्फ देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बड़े पैमाने पर रहती है। इसी क्रम में मेरठ जिले की ओर से इस बार महोत्सव के लिए 35 किस्मों के नाम भेजे गए थे, जिनमें से आयोजकों ने 25 वैरायटी को अंतिम रूप से शामिल किया। यही 25 किस्में अब महोत्सव में लोगों के सामने प्रदर्शित की जा रही हैं।
देखने में सुंदर, खाने में उतने ही स्वादिष्ट
अरुण कुमार के मुताबिक मेरठ से भेजी गई ये किस्में इसलिए भी खास हैं क्योंकि इनका रंग-रूप जितना आकर्षक है, स्वाद उतना ही लाजवाब है। उन्होंने बताया कि इन आमों की चमक और मिठास की वजह से इनकी मांग विदेशी बाजारों में भी बनी रहती है, जिससे मेरठ के आम की पहचान सरहद पार तक पहुंचती है।
मेरठ की इन 25 किस्मों ने मारी बाजी
महोत्सव में शामिल की गई मेरठ की वैरायटी में अमरपाली, गुलाब खास, रजनीगंधा, गोदावरी, तोतापरी, हबीब पसंद, लेट लंगड़ा, रामकेला, चौसा, लंगड़ा, दशहरी, गुलाब जामुन और रटौल जैसे नाम शामिल हैं। यह सभी किस्में स्वाद में बेहद उम्दा मानी जाती हैं और लोगों के बीच पहले से ही लोकप्रिय हैं। पिछले साल भी मेरठ के किसानों की आम प्रजाति को खूब सराहा गया था, इसलिए इस बार भी उम्मीद जताई जा रही है कि मेरठ की यह वैरायटी लोगों की पसंद बनेगी। पिछली बार की तरह इस साल भी मेरठ के बागवानी क्षेत्र के इनाम राशि जीतकर अपना दबदबा कायम रखने की उम्मीद जताई जा रही है।
किसानों के लिए मंच, कृषि क्षेत्र के लिए मौका
जिला उद्यान अधिकारी ने बताया कि इस तरह के महोत्सव खेती और बागवानी के क्षेत्र के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। जब किसानों को अपनी उपज दिखाने का मौका मिलता है, तो वे अपनी मेहनत और हुनर का प्रदर्शन करते हैं। इससे अलग-अलग इलाकों की खास वैरायटी चर्चा में आती है और किसानों को भी इसका सीधा फायदा मिलता है, चाहे वह पहचान के रूप में हो या फिर आर्थिक लाभ के रूप में।













