हरी पत्तेदार सब्जियों में मेथी का स्थान काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसकी अनूठी खुशबू और हल्का कड़लापन इसे अन्य सब्जियों से बिल्कुल अलग पहचान दिलाता है। घरों में मेथी के पराठे, थेपले और स्वादिष्ट भुजिया बड़े चाव के साथ बनाई जाती है, लेकिन कई बार परिवार के सदस्यों, खासकर छोटे बच्चों को इसकी कड़वाहट बिल्कुल पसंद नहीं आती है। बाजार से बहुत ताजी और हरी मेथी लाने के बावजूद कई बार पकने के बाद उसका स्वाद अपेक्षा से कहीं अधिक कड़वा हो जाता है, जिससे लोग इसे खाने से कतराते हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए अक्सर लोग सब्जी तैयार करते समय उसमें ढेर सारे आलू, टमाटर या तीखे मसाले मिला देते हैं ताकि स्वाद को किसी तरह संभाला जा सके। हालांकि, असल समाधान खाना पकाने की प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही छिपा हुआ है। इसके लिए आपको बाजार से किसी भी प्रकार की महंगी सामग्री लाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है। आपकी अपनी रसोई में रखा हुआ साधारण नमक ही इस परेशानी को दूर करने के लिए काफी है। बस जरूरत है तो मेथी को पकाने से पहले एक खास और आसान तरीके से तैयार करने की।
मेथी में प्राकृतिक कड़वाहट होने की मुख्य वजह
मेथी की पत्तियों के भीतर प्राकृतिक रूप से कुछ ऐसे विशेष रासायनिक यौगिक पाए जाते हैं जो इसके विशिष्ट कड़वे स्वाद का मुख्य कारण बनते हैं। यही वजह है कि मेथी की किसी भी डिश में हल्की कड़वाहट होना एक बेहद सामान्य बात है। हालांकि, हर बार मेथी का स्वाद एक जैसा नहीं होता है। हरी पत्तियों की ताजगी, उनकी उम्र और पौधे की किस्म इस बात को तय करती है कि कड़वाहट कितनी होगी। ताजी और कोमल पत्तियां खाने में हमेशा बेहतर लगती हैं, जबकि अधिक पुरानी या मोटी हो चुकी पत्तियों वाली मेथी का स्वाद कुछ लोगों को ज्यादा कड़वा लग सकता है। इसलिए खरीदारी करते वक्त बहुत अधिक पीली या मुरझाई हुई गड्डियों को चुनने से बचना चाहिए।
नमक का जादुई इस्तेमाल और कड़वाहट दूर करने का तरीका
मेथी के कड़वेपन को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहले इसकी पत्तियों को कठोर डंठल से अलग करके अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए। इसमें जमी धूल, मिट्टी या अन्य गंदगी को हटाने के लिए पानी से धोना बेहद जरूरी है। इसके बाद कटी हुई मेथी को थोड़ी देर के लिए रख दें ताकि उसका अतिरिक्त पानी निकल जाए। अब इस साफ मेथी के ऊपर थोड़ा सा साधारण नमक छिड़ककर अपने हल्के हाथों से अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण को करीब 10 से 15 मिनट के लिए बिना छेड़े ऐसे ही छोड़ देना चाहिए। इस दौरान प्रक्रिया के तहत मेथी से हल्का पानी बाहर निकलने लगेगा। इसके बाद पत्तियों को बहुत हल्के हाथों से दबाते हुए सारा अतिरिक्त पानी अलग कर लेना चाहिए।
यहां इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि मेथी को बहुत अधिक जोर लगाकर नहीं निचोड़ना है। अगर पत्तियों को ज्यादा सख्ती से दबाया गया तो वे पूरी तरह से सिकुड़ सकती हैं और उनका जो असली प्राकृतिक गुण व स्वाद है, वह भी प्रभावित हो सकता है। केवल इतना पानी निकालना काफी है जिससे कड़वा रस बाहर आ जाए।
स्वाद को संतुलित करने के अन्य बेहतरीन विकल्प
अगर घर में ऐसे लोग हैं जिन्हें मेथी का स्वाद बिल्कुल रास नहीं आता, तो इसे अन्य पोषक सामग्रियों के साथ मिलाकर पकाना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। आलू और मेथी का संयोजन इसका सबसे प्रचलित और पुराना उदाहरण माना जाता है। आलू का न्यूट्रल स्वाद मेथी के कड़वेपन को बहुत हद तक संतुलित कर देता है। इसके अलावा मटर और मेथी, पनीर के साथ मेथी, या फिर मशरूम के साथ मिलाकर बेहतरीन डिश तैयार की जा सकती है। गूंथते समय आटे में बारीक कटी मेथी मिलाकर पराठे या थेपले बनाने पर भी इसका स्वाद काफी हद तक सुधर जाता है। इसके अलावा खाना बनाते समय जीरा, लहसुन, अदरक और संतुलित मसालों का सही अनुपात भी इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देता है।
यह भी समझना जरूरी है कि मेथी की पूरी कड़वाहट को समाप्त करना आवश्यक नहीं है, क्योंकि इसका हल्का कड़लापन ही इसके पारंपरिक स्वाद का मुख्य हिस्सा है। मुख्य उद्देश्य केवल इतना है कि कड़वाहट का स्तर इतना कम हो जाए कि खाने वाले को सब्जी का स्वाद अच्छा लगे। इसलिए नमक लगाने के बाद मेथी को घंटों तक छोड़ने या बार-बार पानी से धोने की कोई आवश्यकता नहीं होती है।



















