भारतीय खानपान की विविधता केवल अनाजों और हरी सब्जियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सदियों से कई तरह के पेड़-पौधों के फूलों को भी भोजन का जरूरी हिस्सा बनाया जाता रहा है। देश के अलग-अलग राज्यों और आंचलिक इलाकों में कई ऐसे फूल हैं, जिन्हें तोड़कर विशेष तरीकों से पकाया जाता है। इनमें से कुछ फूलों से कुरकुरे पकौड़े तले जाते हैं, तो कुछ को दाल, करी या मौसमी सब्जियों के साथ मिलाकर पौष्टिक आहार का रूप दिया जाता है।
केले के फूल की पारंपरिक करी और सब्जी
केले के फूल का उपयोग भारतीय भोजन में बहुत पुराने समय से चला आ रहा है। खासतौर पर दक्षिण भारत और पूर्वी भारत की रसोई में इससे कई तरह के पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। भोजन में शामिल करने से पहले केले के फूल की सफाई पर खास ध्यान दिया जाता है। इसे अच्छी तरह साफ करने के बाद बारीक टुकड़ों में काटा जाता है और फिर दाल, सूखी सब्जी या रसदार करी में मिलाया जाता है। इसका प्राकृतिक स्वाद हल्का कड़वा और अनूठा होता है, जो मसालों के साथ पकने के बाद बेहद लजीज बन जाता है। साथ ही, इसमें फाइबर पाया जाता है जो पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है।
कद्दू के फूलों के कुरकुरे पकौड़े
कद्दू की बेल पर खिलने वाले चटक पीले फूल भी रसोई में खास जगह रखते हैं। बनावट में बेहद मुलायम और स्वाद में हल्के होने की वजह से इन फूलों को पकाना काफी आसान होता है। कई घरों में इन पीले फूलों को बेसन के गाढ़े घोल में डुबोकर कुरकुरे पकौड़े बनाए जाते हैं, जो चाय के साथ खूब पसंद किए जाते हैं। इसके अलावा, कई जगहों पर कद्दू के फूलों को बारीक कटे प्याज, लहसुन और हल्के मसालों के साथ कड़ाही में भूनकर सूखी सब्जी तैयार की जाती है।
सहजन के फूलों से तैयार होने वाले व्यंजन
सहजन यानी मोरिंगा के पेड़ पर खिलने वाले छोटे-छोटे सफेद फूल भी खाने के काम आते हैं। इन फूलों का अपना कोई बहुत तीखा या तेज स्वाद नहीं होता, इसलिए ये अन्य सब्जियों और मसालों के साथ बहुत जल्दी घुल-मिल जाते हैं। भारतीय घरों में इन्हें मौसमी हरी सब्जियों के साथ मिलाकर पकाया जाता है। इसके साथ ही कई इलाकों में सहजन के फूलों को दाल में डालकर पकाने, सूखी भुजिया बनाने या हल्की रसेदार ग्रेवी तैयार करने का भी रिवाज है।
नीम के फूलों की रसम और उगादी पचड़ी
नीम के फूल अपने स्वाभाविक कड़वे स्वाद के लिए पहचाने जाते हैं। हालांकि अपनी इस कड़वाहट के बावजूद दक्षिण भारत के खानपान में इनका महत्वपूर्ण स्थान है। खासतौर पर दक्षिण भारत के प्रमुख पर्व उगादी के अवसर पर बनने वाली विशेष पारंपरिक डिश उगादी पचड़ी में नीम के फूल जरूर डाले जाते हैं। इसके अलावा, दक्षिण भारतीय रसोई में नीम के सूखे या ताजे फूलों से रसम भी तैयार की जाती है। जब नीम के फूलों की कड़वाहट मीठे, खट्टे और नमकीन स्वादों के साथ मिलती है, तो यह भोजन को एक अनोखा जायका देती है।
पलाश के फूलों का पारंपरिक खानपान में इस्तेमाल
पलाश को जंगल की आग भी कहा जाता है, क्योंकि पतझड़ और गर्मी की शुरुआत में इसके चटकीले नारंगी और लाल फूल दूर से देखने पर आग की लपटों जैसे नजर आते हैं। मध्य भारत के जंगलों और आदिवासी क्षेत्रों में पलाश के फूलों का उपयोग भोजन में सदियों से होता रहा है। स्थानीय लोग इन फूलों की पंखुड़ियों को चुनकर दाल और अनाजों के साथ मिलाकर पकाते हैं। पलाश से बनने वाले ये पारंपरिक व्यंजन आज भी वहां की सांस्कृतिक विरासत और खानपान का अहम हिस्सा बने हुए हैं।
कमल की पंखुड़ियों से बनने वाले पकवान
कमल के पौधे का जिक्र होते ही आमतौर पर लोगों को इसके तने यानी कमल ककड़ी का ध्यान आता है, जिसका इस्तेमाल सब्जी और अचार बनाने में खूब होता है। लेकिन कई क्षेत्रों में कमल के खूबसूरत फूलों की पंखुड़ियों का भी भोजन में प्रयोग किया जाता है। इन पंखुड़ियों को हल्की करी, भुनी हुई सूखी सब्जियों और विशेष व्यंजनों में मिलाया जाता है। इससे खाने को एक सौम्य महक, अनोखा स्वाद और अलग बनावट हासिल होती है।
गुलमोहर के फूलों से बनने वाली डिश
गर्मियों के मौसम में खिलने वाले गुलमोहर के लाल और नारंगी फूल न केवल सड़कों और बागों को सजाते हैं, बल्कि कुछ क्षेत्रीय खानपान में भी इस्तेमाल किए जाते हैं। स्थानीय परंपराओं के तहत कुछ जगहों पर गुलमोहर के इन ताजे फूलों को साफ करके पकाया जाता है। लोग इनसे भुनी हुई सूखी डिश या सब्जी तैयार करते हैं, जो अपने अनोखे स्वाद के लिए स्थानीय स्तर पर जानी जाती है।



















