20 साल तक जमीन में दफन रही स्कॉच की बोतल: मिलिए असम के दीवाने फैन ‘पुतुल जर्मन’ सेफुटबॉल
14 घंटे पहले· 0

20 साल तक जमीन में दफन रही स्कॉच की बोतल: मिलिए असम के दीवाने फैन ‘पुतुल जर्मन’ से

असम के दीफू शहर के पुतुल डेका ने 1994 में जर्मनी की हार के बाद स्कॉच की बोतल जमीन में गाड़ दी थी और 20 साल बाद 2014 में जर्मनी की जीत पर ही उसे निकाला। 1986 से हर वर्ल्ड कप मनाने वाले इस फैन की कहानी आज इंटरनेट पर छाई हुई है।

बात साल 1994 की है। फुटबॉल वर्ल्ड कप का क्वार्टर फाइनल खेला जा रहा था। जैसे ही बुल्गारिया ने जर्मनी को मात देकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया, असम में बैठे एक शख्स का दिल टूट गया। गुस्से और भावनाओं में बहकर उसने उसी पल ‘पासपोर्ट स्कॉच’ की एक महंगी बोतल खरीदी और प्रण लिया कि जब तक उसकी चहेती टीम जर्मनी फिर से वर्ल्ड कप नहीं जीतेगी, तब तक इस बोतल को कोई छुएगा भी नहीं। फिर उसने अपने घर के आंगन में गड्ढा खोदा और बोतल को जमीन के नीचे दफन कर दिया।

आज जब दुनिया भर में फुटबॉल वर्ल्ड कप का माहौल गरमा गया है, असम के कार्बी आंगलोंग जिले के ‘दीफू’ शहर की यह कहानी इंटरनेट पर तहलका मचाए हुए है। पुतुल साल 1986 से लगातार हर वर्ल्ड कप को किसी त्योहार की तरह मनाते आ रहे हैं। इस बार वे लगातार 11वीं बार अपने घर पर वर्ल्ड कप की लाइव स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।

सीन 1: 20 साल का इंतजार और वह ऐतिहासिक खुदाई (साल 2014)

भले ही इस कहानी की शुरुआत एक टूटे दिल से हुई हो, लेकिन इसका अंत बेहद शानदार रहा। साल 1994 में जमीन में दबाई गई वह बोतल एक-दो साल नहीं, बल्कि पूरे 20 साल तक मिट्टी के नीचे पड़ी रही। इस दौरान 1998, 2002 जिसमें जर्मनी फाइनल हारा, 2006 और 2010 के वर्ल्ड कप आए और निकल गए। हर बार पुतुल के मन में उम्मीद जगती, मगर जश्न का मौका टलता रहा।

आखिरकार वह घड़ी आ ही गई। साल 2014 में मारियो गोत्जे के एक्स्ट्रा टाइम में किए गोल की बदौलत जर्मनी ने अर्जेंटीना को हराकर चौथी बार वर्ल्ड कप अपने नाम किया, तो दीफू शहर में पुतुल के घर के आंगन की खुदाई शुरू हुई। पुतुल ने 20 साल पुरानी वह स्कॉच की बोतल बाहर निकाली और अपनी कसम पूरी की। इसी एक वाकये ने उन्हें रातोंरात भारतीय फुटबॉल फैंस के बीच एक ‘लिविंग लेजेंड’ बना दिया।

सीन 2: 1986 का वह पहला इश्क, जिसने नाम तक बदल दिया

पुतुल डेका को आज उनके असली नाम से कम और ‘पुतुल जर्मन’ के नाम से ज्यादा पहचाना जाता है। पुतुल की यह दीवानगी साल 1986 के वर्ल्ड कप से शुरू हुई थी। उस वक्त उन्होंने वेस्ट जर्मनी की टीम को खेलते देखा और उसके मुरीद बन गए। फुटबॉल में फैंस अक्सर अपनी टीमें बदलते रहते हैं, लेकिन पुतुल की वफादारी पिछले 11 वर्ल्ड कप से लेकर आज तक नहीं डगमगाई। जर्मनी जीते या हारे, उनका दिल बस अपनी ‘मानशाफ्ट’ यानी जर्मन टीम के लिए ही धड़कता है।

सीन 3: घर का आंगन बन गया ‘जर्मन स्टेडियम’

एक सच्चे फैन की दीवानगी सिर्फ कसम खाने तक सीमित नहीं रहती। पुतुल ने अपनी इस दीवानगी को पूरे शहर का त्योहार बना दिया है। उन्होंने अपने घर के आंगन को एक बाकायदा फुटबॉल देखने वाले एरिना में तब्दील कर दिया है, जिसे लोग प्यार से ‘जर्मन स्टेडियम’ कहते हैं। वर्ल्ड कप के मैचों के लिए यहां बड़ी स्क्रीनें लगाई गई हैं, हिस्सा ले रहे देशों के झंडे लहरा रहे हैं और चारों ओर फुटबॉल के दिग्गजों के पोस्टर सजे हैं। इस बार पुतुल ने अपनी सजावट के जरिए असम के मशहूर गायक और फुटबॉल प्रेमी जुबीन गर्ग को भी एक खास श्रद्धांजलि दी है।

सीन 4: वर्ल्ड कप की ओपनिंग नाइट, 250 मेहमान और पूरी-सब्जी का लंगर

वर्ल्ड कप की ओपनिंग नाइट पर पुतुल के इस ‘जर्मन स्टेडियम’ में जश्न बिल्कुल अलग ही स्तर पर पहुंच गया। प्रवेश शाम 6:30 बजे रखा गया था। शाम को एक पूर्व नेशनल फुटबॉलर बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। फैंस के सामने 4 फीट ऊंची वर्ल्ड कप की एक चमचमाती नकली ट्रॉफी का अनावरण किया गया और सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू हुए।

रात 8:30 बजे दावत का दौर शुरू हुआ। फुटबॉल के इस महाकुंभ में पेट-पूजा का भी पूरा इंतजाम है। पुतुल के घर बुलाए गए करीब 250 मेहमानों के लिए गरमा-गरम पूरी-सब्जी का लंगर शुरू हो चुका है।

रात 10:30 बजे खेल शुरू। जैसे ही रात के सन्नाटे को चीरते हुए टीवी स्क्रीन पर वर्ल्ड कप की पहली सीटी बजती है, पूरी-सब्जी खा रहे फैंस अपनी जर्सी संभालते हुए स्क्रीन के सामने जम जाते हैं।

पुतुल जर्मन की यह कहानी बताती है कि फुटबॉल महज 90 मिनट का खेल नहीं है। यह एक ऐसा जुनून है जिसके लिए कोई इंसान 20 साल तक स्कॉच की बोतल जमीन में गाड़ सकता है और अपने घर को पूरे शहर के लिए स्टेडियम में बदल सकता है।

ट्रेंडकिया रिवॉर्ड्स

खबरें पढ़ें, असली रिवॉर्ड कमाएँ

हर लेख पढ़ने पर पॉइंट्स — ₹10,000 तक के गिफ्ट रिडीम करें। शामिल होना फ्री है।

फ्री रजिस्टर करें और कमाना शुरू करें
250मोबाइल रिचार्ज
12,500 · ≈ 12,500 रीड्स
कमाना शुरू करें
500गिफ्ट वाउचर
25,000 · ≈ 25,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
1,000गिफ्ट कार्ड
50,000 · ≈ 50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
2,000गिफ्ट कार्ड
1,00,000 · ≈ 1,00,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
3,000शॉपिंग वाउचर
1,50,000 · ≈ 1,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
5,000कैश / UPI
2,50,000 · ≈ 2,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम7,500कैश / UPI
3,75,000 · ≈ 3,75,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम10,000कैश / UPI
5,00,000 · ≈ 5,00,000 रीड्स
कमाना शुरू करें
प्रीमियम15,000मेगा कैश
7,50,000 · ≈ 7,50,000 रीड्स
कमाना शुरू करें

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

नागरिक पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
नागरिक पत्रकारनागरिक पत्रकार
नागरिक पत्रकार
नागरिक पत्रकार