ताशकंद में खेले गए क्वालीफाइंग ग्रुप के आखिरी मुकाबले में भारत ने बांग्लादेश को 3-0 से रौंदा और इसी के साथ भारतीय टीम ने दो दशक का इंतजार खत्म करते हुए एएफसी अंडर-20 एशियाई कप के मुख्य टूर्नामेंट में जगह पक्की कर ली. क्वालीफायर में यह भारत की दूसरी जीत रही, जिससे टीम के खाते में तीन मैचों से कुल छह अंक जुड़ गए.
नतीजे के इंतजार में टिकी थीं निगाहें
अंक तालिका में जगह पक्की होने के बावजूद भारतीय टीम का क्वालीफिकेशन तुरंत तय नहीं हुआ. टीम को यह जानने के लिए बाद में खेले गए सीरिया और उज्बेकिस्तान के मुकाबले का नतीजा आने तक रुकना पड़ा. उस दौरान भारतीय खेमे के पास सिर्फ इंतजार करने और उज्बेकिस्तान-सीरिया मैच के स्कोर पर नजर रखने के अलावा कोई चारा नहीं था. जब सीरिया को उज्बेकिस्तान के हाथों 0-3 से हार मिली, तब जाकर भारत का ग्रुप बी में दूसरा स्थान पक्का हुआ. आठ ग्रुप में दूसरे नंबर पर रहने वाली कुल सात सबसे बेहतर टीमों को मुख्य टूर्नामेंट का टिकट मिलता है, और भारत इसी सूची में शामिल होकर 2006 के बाद पहली बार एएफसी अंडर-20 एशियाई कप के मुख्य दौर में पहुंचा.
ग्रुप बी का पूरा हिसाब
उज्बेकिस्तान ने नौ अंक जुटाकर ग्रुप में सबसे ऊपर जगह बनाई और वह भी मुख्य टूर्नामेंट के लिए क्वालीफाई कर गया. सीरिया तीन अंक लेकर तीसरे नंबर पर रहा, जबकि बांग्लादेश अपने तीनों मुकाबले गंवाकर सबसे नीचे खिसक गया. नतीजतन बांग्लादेशी टीम को 'डेवलपमेंट चरण' में उतार दिया गया. मुख्य टूर्नामेंट अगले साल नहीं बल्कि 24 मार्च से 10 अप्रैल 2027 के बीच चीन में खेला जाएगा.
तीन गोल जिन्होंने पक्की की जीत
बांग्लादेश के खिलाफ मुकाबले में भारत के लिए खाता 25वें मिनट में डैनी मीतेई लैशराम ने खोला. इसके बाद 60वें मिनट में विशाल यादव ने एक शानदार एक्रोबैटिक शॉट के दम पर स्कोर 2-0 कर दिया. मैच के 79वें मिनट में स्थानापन्न खिलाड़ी के तौर पर उतरे एमडी अरबाश ने जोरदार शॉट से तीसरा गोल दागकर जीत पर मुहर लगा दी.
टीम के लिए आगे क्या
यह जीत भारतीय फुटबॉल के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक बूस्ट मानी जा रही है, क्योंकि पिछले दो दशक से टीम महाद्वीपीय स्तर के इस बड़े मंच से बाहर थी. अब अगले साल तक टीम प्रबंधन और खिलाड़ियों के पास मुख्य टूर्नामेंट की तैयारी के लिए पर्याप्त समय होगा.



















