प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर के उद्घाटन को लेकर सोशल मीडिया मंच एक्स पर खुशी जताई है और अपनी पोस्ट में बीएपीएस संस्था को भी टैग किया है।
पेरिस में क्या हो रहा है
फ्रांस की राजधानी पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन हो रहा है। इसे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक रिश्तों के लिए एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। बीएपीएस के मंदिर आमतौर पर पारंपरिक नक्काशीदार पत्थरों, बारीक शिल्पकारी और भव्य गुंबदों के साथ बनाए जाते हैं, और पेरिस का यह मंदिर भी स्थानीय लोगों के साथ-साथ वहां रह रहे भारतीय समुदाय के लिए एक बड़े सांस्कृतिक केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है।
भारत-फ्रांस रिश्तों के लिए क्यों अहम
यह उद्घाटन भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों में एक अहम पड़ाव के तौर पर देखा जा रहा है। यूरोप के सबसे ज्यादा घूमे जाने वाले शहरों में शुमार पेरिस में इतना बड़ा हिंदू मंदिर बनने से वहां रह रहे भारतीय समुदाय और आसपास के देशों से आने वाले लोगों को हिंदू परंपरा और दर्शन से जुड़ने के लिए एक स्थायी जगह मिल जाती है। इसके साथ ही पेरिस अब उन चुनिंदा बड़े यूरोपीय शहरों में शामिल हो गया है जहां बीएपीएस का पारंपरिक ढंग से बना पूर्ण आकार का मंदिर मौजूद है।
मोदी ने क्या लिखा
अपनी पोस्ट में नरेंद्र मोदी ने लिखा, "It is a matter of great joy that BAPS Swaminarayan Hindu Mandir is being inaugurated in Paris," यानी पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन होना बेहद खुशी की बात है। उन्होंने पोस्ट के साथ एक लिंक भी साझा किया और बीएपीएस के आधिकारिक हैंडल को टैग किया।
बीएपीएस का वैश्विक विस्तार
बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था बीते कई दशकों से दुनियाभर में बारीक नक्काशी वाले पत्थर के मंदिर बनाती आ रही है, और हर मंदिर सिर्फ पूजास्थल नहीं बल्कि सांस्कृतिक केंद्र भी बन जाता है। अमेरिका के फीनिक्स और रॉबिन्सविल, कनाडा के ओटावा, टोरंटो और स्कारबोरो, ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, कैयर्न्स और कैनबरा तथा केन्या के नैरोबी जैसे शहरों में पहले से मौजूद बीएपीएस मंदिरों में जन्माष्टमी, अन्नकूट और रथयात्रा जैसे बड़े आयोजन नियमित रूप से होते हैं, जिनमें स्थानीय भारतीय समुदाय बड़ी संख्या में शामिल होता है। इनमें से कई मंदिरों में हाल के वर्षों में बड़ी वर्षगांठ और शिलान्यास समारोह भी मनाए गए हैं, क्योंकि संस्था लगातार अपने नेटवर्क का विस्तार कर रही है। पेरिस का नया मंदिर इसी वैश्विक कड़ी की सबसे नई कड़ी है, जो यूरोप में सनातन परंपरा की मौजूदगी को और आगे बढ़ाता है।
जनता की प्रतिक्रिया
मोदी की इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिलीजुली प्रतिक्रिया देखने को मिली। बड़ी संख्या में यूजर्स ने इसे भारत की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर पहुंचाने वाला ऐतिहासिक कदम बताते हुए बधाई दी, वहीं कुछ लोगों ने इस मौके का इस्तेमाल महंगाई और अन्य घरेलू मुद्दों पर सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाने के लिए किया। कुछ यूजर्स ने इसे भारत और यूरोप के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव मजबूत करने वाला सकारात्मक संकेत बताया।


























