सीतापुर जिले के बिसवां कस्बे में रहने वाले लोगों ने अपने आसपास की तमाम दिक्कतों को लेकर आवाज उठाई है। चीनी, तेल, दालें और एलपीजी सिलेंडर की बढ़ती कीमतों से लेकर टूटी सड़कों, अधूरे पुलों और अस्पताल न होने तक, कस्बे और आसपास के गांवों में रहने वाले लोग रोजमर्रा की जिंदगी में परेशानी झेल रहे हैं।
महंगाई और कालाबाजारी से टूट रही जनता की कमर
कस्बे में हर तरफ महंगाई का असर साफ दिखता है। कालाबाजारी के चलते चीनी, तेल और दालों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इन्हें काबू में रखने में सरकार नाकाम साबित हो रही है। एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब हजार रुपये के पार जा चुकी है, वहीं प्याज के दाम ने गरीब परिवारों को रुला दिया है। नतीजा यह है कि आम आदमी के लिए घर का मासिक खर्च चलाना भी मुश्किल होता जा रहा है।
गन्ना सीजन में बिसवां की सड़कों पर लगता है भीषण जाम
बिसवां में जाम की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। जैसे ही चीनी मिल का गन्ना सत्र शुरू होता है, कस्बे की सड़कों पर गन्ना लादे ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और गाड़ियों का कब्जा हो जाता है। इससे आम लोगों का घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या से स्थायी राहत के लिए बिसवां के चारों ओर रिंग रोड या बाईपास बनाया जाना जरूरी है, ताकि गन्ने से लदे भारी वाहन कस्बे के भीतर से गुजरने के बजाय बाहर से निकल सकें।
छात्राओं के लिए राजकीय महाविद्यालय की मांग
बिसवां कस्बे में छात्राओं के लिए अपना राजकीय महाविद्यालय न होना भी बड़ी समस्या है। कॉलेज न होने से बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए दूर-दराज के शहरों का रुख करना पड़ता है, जिसमें समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च होता है। साथ ही दूर के कॉलेज आने-जाने में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है। इसी मजबूरी में कई होनहार छात्राएं बीच में ही पढ़ाई छोड़ देती हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि कस्बे में ही सरकारी कॉलेज खुलने से बेटियों की पढ़ाई को बड़ा सहारा मिलेगा।
महराजगंज मोहल्ले में जलभराव से लोग परेशान
सीतापुर जिले के बिसवां स्थित महराजगंज मोहल्ले में जलभराव की समस्या ने लोगों का जीना मुश्किल कर रखा है। नालियों की सफाई नियमित रूप से न होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी भरा रहता है। इससे न सिर्फ आने-जाने में दिक्कत होती है, बल्कि बदबू के साथ बीमारियां फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। लोगों ने कई बार शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला। हालत यह है कि बड़े चौराहे पर थोड़ी सी बारिश होते ही पानी भर जाता है।
कस्बे से लेकर गांव तक जर्जर हैं सड़कें
बिसवां कस्बे के साथ-साथ मानपुर मार्ग, परसेहरा और भिन्नैनी जैसे ग्रामीण इलाकों को जोड़ने वाली मुख्य सड़कें भी बदहाल स्थिति में हैं। बारिश के मौसम में ये सड़कें कीचड़ से भरे दलदल में तब्दील हो जाती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर स्कूल जाने वाले बच्चों और रोज सफर करने वाले राहगीरों पर पड़ता है, जिन्हें कीचड़ भरी सड़कों से होकर निकलना पड़ता है।
सिधौली रोड और सीतापुर रोड के ओवरब्रिज बरसों से अधूरे
बिसवां कस्बे में सिधौली रोड क्रासिंग पर बन रहा ओवरब्रिज और सीतापुर रोड पर प्रस्तावित ओवरब्रिज, दोनों का निर्माण लंबे समय से अधूरा पड़ा है। यह निर्माण कार्य आधा-अधूरा छोड़ दिए जाने से स्थानीय लोगों को रोजाना भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
बड़ी लाइन बनने के बावजूद नहीं रुकतीं एक्सप्रेस ट्रेनें
सीतापुर बुढ़वल के बीच बड़ी लाइन बन जाने के बावजूद बिसवां रेलवे स्टेशन पर अब तक किसी एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव नहीं हो पाया है। इसका खामियाजा दिल्ली सहित अन्य शहरों में आने-जाने वाले व्यापारियों और किसानों को भुगतना पड़ता है, जिन्हें लंबी दूरी की यात्रा के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों ने बिसवां रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किए जाने की मांग की है।
सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की सख्त जरूरत
बिसवां में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल न होना भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी का सबब है। गंभीर बीमारी की स्थिति में मरीजों को करीब तीस से पैंतीस किलोमीटर दूर सीतापुर या करीब साठ किलोमीटर दूर लखनऊ का रुख करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कस्बे में ही सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनने से हजारों लोगों को इलाज के लिए लंबा सफर तय नहीं करना पड़ेगा।


















