फीफा विश्व कप 2026 के शुरुआती मुकाबले में जब पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो मैदान में दाखिल हुए तो पूरा स्टेडियम उनके नाम की गूंज से भर गया। मगर अपने करियर के छठे विश्व कप का पहला मैच रोनाल्डो के लिए वैसा नहीं रहा जैसा फैंस उम्मीद लगाए बैठे थे। कांगो के खिलाफ इस मुकाबले में वह न तो अपनी जानी पहचानी रफ्तार दिखा पाए और न ही वह धार, जिसके दम पर वह सालों से सुर्खियां बटोरते आए हैं। नतीजा यह रहा कि पुर्तगाल को यह भिड़ंत 1-1 की बराबरी पर खत्म करनी पड़ी।
मैदान पर मौजूद, मगर असर से दूर
41 साल के रोनाल्डो लंबे समय तक मैदान पर रहते हुए भी मानो खेल के एक दर्शक भर बने रहे, ठीक उन्हीं लोगों की तरह जो स्टैंड्स में फुटबॉल का मुकाबला देखने नहीं, बल्कि एक महान खिलाड़ी को आंखों में बसाने पहुंचे थे। पुर्तगाली कप्तान के सामने गोल दागने का एक शानदार मौका भी आया, लेकिन वह उसे भी भुना नहीं सके। इसी वजह से कोच की सोच पर भी अंगुलियां उठने लगीं कि जब रोनाल्डो लय में ही नहीं दिख रहे थे, तो उन्हें पूरे नब्बे मिनट मैदान पर बनाए रखने का फैसला आखिर क्यों लिया गया।
मेसी के मुकाम पर पहुंचे, मगर अंदाज जुदा रहा
कांगो के खिलाफ रोनाल्डो भले ही अपनी टीम के लिए गेंद को जाल में नहीं पहुंचा सके, लेकिन इस मुकाबले में उन्होंने अर्जेंटीना के दिग्गज Lionel Messi से जुड़ा एक रिकॉर्ड जरूर छू लिया। दरअसल मेसी इस समय अपने करियर का छठा विश्व कप खेल रहे हैं और यह रोनाल्डो के करियर का भी छठा ही विश्व कप है। फर्क सिर्फ इतना रहा कि मेसी अपने छठे विश्व कप के पहले ही मुकाबले में पूरी तरह छा गए। उन्होंने अपने सुनहरे दौर की याद दिलाते हुए अपनी पहली वर्ल्ड कप हैट्रिक जमाई और अकेले दम पर अर्जेंटीना को जीत दिला दी, जबकि रोनाल्डो अपने पुराने रूप की महज एक हल्की सी छाया नजर आए।
Diego Jota को दी गई भावुक श्रद्धांजलि
पुर्तगाल और कांगो के इस मुकाबले की एक यादगार झलक मैदान के बाहर भी थी। मैच से पहले Diego Jota को श्रद्धांजलि दी गई। पुर्तगाल का राष्ट्रगान खत्म होते ही बड़ी स्क्रीन पर Diego Jota की तस्वीर उभरी। इसके बाद टीवी कैमरे स्टैंड में बैठे उनके माता-पिता की ओर मुड़ गए, जो पिछले जुलाई में हुए एक कार हादसे में Diego और उनके भाई André Silva, दोनों को खोने का गम अब भी सीने में लिए हुए थे।













