स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारतीय पैरा एथलीटों के दल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। प्रतियोगिता में उतरे 28 सदस्यीय भारतीय दल ने उत्कृष्ट खेल का प्रदर्शन करते हुए कुल 7 पदक हासिल किए। इन पदकों में 3 स्वर्ण, 2 रजत और 2 कांस्य पदक शामिल हैं। यह पहला मौका है जब भारतीय पैरा खिलाड़ियों ने कॉमनवेल्थ गेम्स के किसी एक ही संस्करण में इतने पदक अपने नाम किए हैं। इस शानदार उपलब्धि की सबसे खास बात यह रही कि भारत ने अकेले इस बार के टूर्नामेंट में उतने ही मेडल जीत लिए, जितने उसने 2002 से लेकर अब तक के इतिहास में कुल मिलाकर जीते थे।
20 साल बाद ट्रैक एंड फील्ड में मिला मेडल
ग्लासगो में भारतीय एथलीटों ने 20 सालों से चले आ रहे लंबे इंतजार को खत्म करते हुए एथलेटिक्स स्पर्धाओं में पदक हासिल किया। इससे पहले भारत को कॉमनवेल्थ गेम्स के ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में आखिरी सफलता साल 2006 में मिली थी। उस समय रंजीत कुमार ने चक्का फेंक प्रतियोगिता में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया था। 2006 के बाद से भारतीय पैरा एथलीट इस वर्ग में पदक तालिका में जगह नहीं बना पाए थे। हालांकि, 2026 के इस संस्करण में भारतीय खिलाड़ियों ने इस गतिरोध को तोड़ते हुए एक से बढ़कर एक प्रदर्शन किए और देश को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
100 मीटर दौड़ और शॉट पुट में भारतीय खिलाड़ियों का जलवा
इस बार की प्रतियोगिताओं में पुरुषों की 100 मीटर टी47 रेस में भारतीय धावकों का दबदबा देखने को मिला। दिलीप महादु गावित ने अपनी गति का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसी स्पर्धा में मोहम्मद बासिल मोरसिंगानाकाथ ने भी शानदार प्रदर्शन किया और रजत पदक हासिल कर भारत के लिए दोहरा जश्न पक्का कर दिया।
इसके अलावा शॉट पुट की स्पर्धाओं में भी भारतीय खिलाड़ियों ने पदकों की झड़ी लगा दी। पुरुषों के शॉट पुट एफ57 इवेंट में सोमन राणा ने अपनी ताकत का लोहा मनवाते हुए भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता। इसी वर्ग में शुभम जुयाल ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया और सिल्वर मेडल अपने नाम किया। महिलाओं की शॉट पुट एफ57 प्रतियोगिता में शर्मिला ने शीर्ष स्थान हासिल करते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया, जबकि इसी स्पर्धा में भारत की शिल्पा शयाला ने शानदार खेल दिखाते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।
पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य और बर्मिंघम 2022 से तुलना
पैरा पावरलिफ्टिंग की स्पर्धा में भी भारत को सफलता मिली। पुरुषों के हैवीवेट इवेंट में झंडू कुमार ने मजबूत चुनौती पेश करते हुए कांस्य पदक जीता। यदि पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स से इसकी तुलना की जाए, तो भारत का यह प्रदर्शन बेहद शानदार रहा है। साल 2022 में इंग्लैंड के बर्मिंघम में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत केवल 2 पदक ही जीत सका था। उस समय पैरा टेबल टेनिस में भाविना पटेल ने स्वर्ण पदक जीता था और सोनलबेन पटेल ने कांस्य पदक हासिल किया था। हालांकि, बर्मिंघम में सुधीर ने पुरुषों के पैरा पावरलिफ्टिंग हैवीवेट वर्ग में गोल्ड मेडल जीता था, लेकिन बाद में एंटी-डोपिंग नियमों के उल्लंघन के कारण उनसे वह स्वर्ण पदक वापस ले लिया गया था। इस तरह बर्मिंघम में भारत के खाते में आधिकारिक रूप से केवल दो ही पदक दर्ज रहे थे।
कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स का इतिहास
कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा स्पर्धाओं को पहली बार साल 2002 में शामिल किया गया था। तब से लेकर 2026 के इस आयोजन से पहले तक, भारत ने इन खेलों के इतिहास में कुल मिलाकर केवल 7 मेडल जीते थे। इनमें 1 स्वर्ण पदक, 2 रजत पदक और 4 कांस्य पदक शामिल थे। लेकिन ग्लासगो में 28 पैरा खिलाड़ियों के इस दल ने केवल एक ही बार में 7 पदक हासिल करके इतिहास के उस आंकड़े की बराबरी कर ली। 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज के साथ समाप्त हुआ यह अभियान भारतीय पैरा-खेलों के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की तरह है, जो आने वाले समय में देश के अन्य एथलीटों को भी प्रेरित करेगा।



















