पर्सनल कंप्यूटर की दुनिया में दशकों तक एक खास सिद्धांत पर अड़े रहने के बाद ऐप्पल ने आखिरकार अपने प्रमुख लैपटॉप में टच स्क्रीन तकनीक को जगह दे दी है। लॉस एंजिल्स में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान कंपनी ने नई खूबियों से लैस 2026 मैकबुक प्रो को आधिकारिक तौर पर पेश किया। इस नए डिवाइस में प्रोलेड एक्सडीआर डिस्प्ले मौजूद है, जो फिंगर इनपुट का सीधे समर्थन करता है। डिवाइस के अंदर अत्यधिक शक्तिशाली M5 प्रो और M5 मैक्स चिपसेट लगाए गए हैं, जो हाई-एंड कंप्यूटिंग के लिए तैयार किए गए हैं। यह बदलाव तकनीकी जगत के लिए बेहद चौंकाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि ऐप्पल का शीर्ष प्रबंधन वर्षों से लैपटॉप स्क्रीन पर टचस्क्रीन लगाने के विचार को खारिज करता आया था। आईफोन, आईपैड और ऐप्पल वॉच जैसे उत्पादों में फिंगर टच को लोकप्रिय बनाने वाली कंपनी ने 42 साल के अपने मैक इतिहास में पहली बार स्क्रीन पर सीधे उंगलियों के स्पर्श को स्वीकार किया है।
सालों पुराने इनकार और बदलती सोच
ऐप्पल के नेतृत्व ने लंबे समय तक यह तर्क दिया था कि कंप्यूटर स्क्रीन पर हाथ ले जाकर काम करना एर्गोनॉमिक्स के हिसाब से गलत है। 2015 में जब नए आईमैक को लेकर सवाल पूछे गए थे, तब वैश्विक उत्पाद विपणन के तत्कालीन वरिष्ठ उपाध्यक्ष फिल शिलर ने ऐप्पल हार्डवेयर के एक एकीकृत सिद्धांत की वकालत की थी। उनका कहना था कि ऐप्पल का हर उत्पाद, चाहे वह वॉच हो, आईपैड हो, आईमैक हो या मैकबुक, बुनियादी तौर पर एक कंप्यूटर और कांच का एक टुकड़ा है। हर उत्पाद का अपना एक तय काम होता है और उसी के अनुसार उसका इंटरफेस तैयार किया जाता है। उस समय उनका मानना था कि आईफोन जैसे उपकरणों के लिए मल्टीटच तकनीक सही है, लेकिन डेस्कटॉप या लैपटॉप जैसी परिस्थितियों में, जहां कीबोर्ड स्थिर रहता है, स्क्रीन तक हाथ ले जाना असुविधाजनक और थका देने वाला होता है।
इसके अलावा ऑपरेटिंग सिस्टम के बुनियादी ढांचे को भी एक बड़ा कारण बताया गया था। आईफोन और आईपैड का ऑपरेटिंग सिस्टम शुरुआत से ही मल्टीटच के लिए बना था, जिसमें पॉइंटर प्रिसिजन की जरूरत नहीं थी। दूसरी तरफ मैकओएस में कर्सर, मेनू बार और विंडो बंद करने के छोटे-छोटे बॉक्स बने होते हैं, जिन्हें सटीक पॉइंटर की दरकार होती है। ऐप्पल का मानना था कि दोनों प्रणालियों को मिलाकर एक कमजोर अनुभव बनाने से बचना चाहिए। इसके बाद 2016 में जब कंपनी ने कीबोर्ड के ऊपर वर्चुअल फंक्शन कीज वाली टच बार पेश की, तब भी इस रुख को दोहराया गया था। उस समय कहा गया था कि स्क्रीन पर टच देने से मेनू बार को उंगलियों के अनुकूल बदलना पड़ेगा, जो ट्रैकपैड और माउस के इस्तेमाल को प्रभावित करेगा। अंदरूनी परीक्षणों के बाद भी ऐप्पल ने यह माना था कि मैक पर टच स्क्रीन लाना सही फैसला नहीं है। यहां तक कि 2021 में टर्नस ने भी दोहराया था कि मैक इनडायरेक्ट इनपुट के लिए पूरी तरह अनुकूलित है और इसे बदलने की कोई वजह नजर नहीं आती।
नई तकनीक और भौतिकी की बाधाएं
इस बड़े तकनीकी बदलाव पर चर्चा करते हुए ऐप्पल के चीफ हार्डवेयर ऑफिसर जॉनी स्रूजी ने बताया कि दस साल का समय बहुत लंबा होता है। इस दौरान डिस्प्ले तकनीक, कस्टम सिलिकॉन और बहुत कुछ पूरी तरह बदल चुका है। चिप्स, डिस्प्ले और सॉफ्टवेयर आर्किटेक्चर के सटीक संगम ने आखिरकार कंपनी के तय मानकों को हासिल किया। स्रूजी का कहना है कि वे चाहते हैं कि उनके इंजीनियर कल्पनाओं या समयसीमा से नहीं, बल्कि भौतिकी के नियमों से प्रेरित हों।
पारंपरिक टचस्क्रीन लैपटॉप में जब उंगलियों से स्क्रीन को छुआ जाता है, तो स्क्रीन के हिलने यानी वॉबल की समस्या आम होती है। ऐप्पल ने इस परेशानी से निपटने के लिए मैकबुक प्रो के हिंज को नए सिरे से डिजाइन किया है ताकि छूने पर स्क्रीन स्थिर बनी रहे। इसके अलावा स्क्रीन पर स्वाइप और जूम करते समय डिस्प्ले गर्म न महसूस हो, इसके लिए थर्मल सिस्टम को भी पूरी तरह बदला गया है। साथ ही प्रोलेड एक्सडीआर में टेंडेम ओएलईडी स्क्रीन का उपयोग हुआ है, जिसमें कई लाइट-एमिटिंग लेयर्स लगाई गई हैं। यह तकनीक स्क्रीन पर गहरा कंट्रास्ट और बेहतरीन विजुअल अनुभव पैदा करती है। स्क्रीन पर उंगलियों के निशान और चिकनाई की समस्या से निपटने के लिए एक एंटी-रिफ्लेक्टिव बाहरी कोटिंग दी गई है, जिससे इसे सामान्य स्क्रीन से ज्यादा साफ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
मैकओएस में उंगलियों के लिए सूक्ष्म बदलाव
सॉफ्टवेयर के स्तर पर मैकओएस में ऐसे बदलाव किए गए हैं जो पुराने और नए दोनों इनपुट माध्यमों के साथ तालमेल बिठाते हैं। मेनू बार सामान्य तौर पर पहले जैसा ही दिखाई देता है, लेकिन जैसे ही उंगली किसी मेनू आइटम के करीब जाती है, वह हिस्सा थोड़ा बड़ा हो जाता है ताकि सटीकता से चयन किया जा सके। इसी तरह विंडो को बंद करने या छोटा करने वाले छोटे ट्रैफिक-लाइट बटन भी छूने पर अपने आप बड़े हो जाते हैं।
यह नया टच सिस्टम वीडियो एडिटिंग सॉफ्टवेयर दाविंची रिजॉल्व में कलर ग्रेडिंग करने और ऑडियो वर्कस्टेशन लॉजिक प्रो में साउंडट्रैक ट्यून करने जैसे जटिल एवं सटीक पेशेवर कार्यों में सीधे मदद करता है। इसके अतिरिक्त, आईफोन से मैक पर आए डायनामिक आइलैंड को नीचे खींचने के लिए एक नया टच जेस्चर जोड़ा गया है। यह ब्लैक ओवल स्क्रीन पर एक विजेट की तरह तैरने लगता है, जिससे सिरी के जवाब और स्पॉटलाइट सर्च तक त्वरित पहुंच संभव हो जाती है।
पेशेवरों की मांग और बाजार का दबाव
विंडोज आधारित पीसी निर्माताओं जैसे माइक्रोसॉफ्ट, डेल, एसर, लेनोवो और एचपी ने अपने लैपटॉप में सालों पहले टच स्क्रीन पेश कर दी थी और ग्राहकों ने उन्हें बड़े पैमाने पर अपनाया था। इसके विपरीत ऐप्पल इस बदलाव से बचता रहा। वैश्विक विपणन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष ग्रेग जोजविआक का मानना है कि पेशेवर उपयोगकर्ताओं के लिए यह फीचर लंबे समय से अपेक्षित था। इंजीनियर, वैज्ञानिक, सॉफ्टवेयर डेवलपर और मीडिया क्रिएटर्स काफी समय से सीधे स्क्रीन पर काम करने की सुविधा चाहते थे।
जोजविआक ने रेखांकित किया कि अधिकांश पेशेवर उपयोगकर्ता आईपैड और आईफोन दोनों का इस्तेमाल करते हैं, जिससे उनके लिए टच का इस्तेमाल पूरी तरह स्वाभाविक हो चुका है। युवा क्रिएटर्स और छात्रों की एक पूरी पीढ़ी अब मैकबुक प्रो का उपयोग कर रही है जो स्क्रीन को छूने की उम्मीद रखती है। कंपनी का मानना है कि उसने अन्य कंपनियों की तरह साधारण टच लगाने के बजाय पूरी गुणवत्ता और कस्टम सिलिकॉन के साथ एक जटिल तकनीकी उत्पाद तैयार किया है।
टर्नस के नेतृत्व में हार्डवेयर पर जोर
टर्नस के कार्यकाल के लगभग दो महीने पूरे होने के दौरान कंपनी में बड़े हार्डवेयर लॉन्च की एक श्रृंखला देखने को मिली है। तकनीकी जगत जहां एआई एजेंट्स और नुकसान में चल रही कंपनियों के आगामी आईपीओ को लेकर चर्चा कर रहा है, वहीं ऐप्पल ने फोल्डेबल आईफोन, घरेलू उपकरणों को नियंत्रित करने वाला नया डिवाइस, नए मैक मिनी और एयरपॉड्स बाजार में उतारे हैं। हाल ही में फोल्डेबल डुओ की बिक्री शुरू हुई थी, जिसमें न्यूयॉर्क सिटी के फिफ्थ एवेन्यू स्टोर पर जोजविआक ने स्वयं कतार में लगे ग्राहकों का स्वागत किया था, और इस डिवाइस की डिलीवरी तिथियां जनवरी तक खिंच चुकी हैं।
टर्नस का कहना है कि इन उत्पादों पर काफी लंबे समय से काम चल रहा था। उनका जोर इस बात पर है कि मैक मूल रूप से ट्रैकपैड और कीबोर्ड के इर्द-गिर्द बना एक इनडायरेक्ट इनपुट डिवाइस ही रहेगा, लेकिन कुछ स्थितियों में टच की सुविधा काफी उपयोगी और सहज साबित होती है। ऐप्पल ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि टच जोड़ने से उत्पाद भारी या मोटा न हो।
कीमत और बजट मॉडलों का भविष्य
ऐप्पल का यह रुख कि टच डिस्प्ले केवल पेशेवरों के लिए उपयुक्त है, इसकी ऊंची कीमत को सही ठहराने की कोशिश करता है। 14 इंच वाले मैकबुक प्रो की शुरुआती कीमत 2,899 डॉलर तय की गई है, जबकि 16 इंच वाले मॉडल की कीमत 3,399 डॉलर से शुरू होती है। वित्तीय विश्लेषक नील साइबर्ट का मानना है कि गंभीर पेशेवर इस उत्पाद के लिए रकम चुकाएंगे क्योंकि लोग वैल्यू और अपने काम को बेहतर बनाने वाली उन्नत तकनीक की तलाश में रहते हैं।
हालांकि, सीमित बजट वाले उपयोगकर्ताओं और आम ग्राहकों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। जब टर्नस से पूछा गया कि क्या भविष्य में मैकबुक एयर या आईमैक जैसे अपेक्षाकृत कम महंगे मॉडलों में भी टच स्क्रीन देखने को मिलेगी, तो उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया। फिलहाल टच स्क्रीन की यह सुविधा केवल अत्यधिक महंगे मैकबुक प्रो लाइनअप तक ही सीमित रखी गई है।



















