विधान परिषद चुनाव में सबसे आगे रहकर भी क्यों हार जाते हैं प्रत्याशी, समझें वरीयता वोट और ट्रांसफर का पूरा गणितस्मार्टफोन पीएलआई से सरकारी खजाने में आए 3.25 लाख करोड़ रुपये, इंसेंटिव पर खर्च हुए सिर्फ 19 हजार करोड़ट्रेनों में रात 11 से सुबह 5 बजे तक नहीं चार्ज होंगे फोन, रेलवे बोर्ड ने जारी किया सख्त फरमानउत्तर प्रदेश कैबिनेट का बड़ा फैसला: नोएडा में चार ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और ग्रेटर नोएडा में रोबोटिक्स पार्क को मिली मंजूरीबलिया में गंदगी और कूड़े के ढेरों से जनता बेहाल, नगर पालिका के अधिकारियों पर लग रहे भ्रष्टाचार के संगीन आरोपबारामुला में फारूक अब्दुल्ला के बयान पर बवाल, 1947 के कबाइली हमले से लेकर सीमा पार आतंकवाद तक का सचफेड के फैसले से पहले डॉलर में तेजी, सोने पर दबाव बढ़ामिशिगन में घर के तलघर की सफाई के दौरान मिला दूसरे विश्व युद्ध का हथगोला, बम निरोधक दस्ते ने एक्स-रे से जांचाएंड्रॉयड स्मार्टफोन झपटमारों के मंसूबे होंगे नाकाम, सुरक्षा मजबूत करने के लिए तुरंत बदलें तीन जरूरी विकल्पवृंदावन में महारास स्वरूप में बंशी बजाते दिखेंगे बांके बिहारी, साल में केवल एक बार मिलता है यह दुर्लभ दर्शन
न्यूयॉर्क के कलाकार ने किराए की साइकिलों को किया मॉडिफाई, रिहाइशी इलाकों के किराए से तय होगी पैडल मारने की ताकतगैजेट्स
14 अग॰ 2026, 7:54 pm (75 दिन पहले)· 4

न्यूयॉर्क के कलाकार ने किराए की साइकिलों को किया मॉडिफाई, रिहाइशी इलाकों के किराए से तय होगी पैडल मारने की ताकत

ब्रुकलिन के कलाकार ब्लाइंडर ने 'ग्राउंड ट्रुथ' नामक एक डिवाइस बनाया है जो जनगणना डेटा का इस्तेमाल करके आर्थिक रूप से पिछड़े इलाकों में सिटी बाइक के पैडल को भारी बना देता है।

न्यूयॉर्क शहर में सामने आई एक नई कलात्मक तकनीक ने आर्थिक असमानता को लोगों के शारीरिक अहसास से जोड़ दिया है। ब्रुकलिन के कलाकार और मेटा में कांट्रैक्टर के रूप में काम करने वाले ब्लाइंडर ने एक अनोखा डिवाइस बनाया है, जो सड़कों पर चलने वाली किराए की ई-बाइक की गति को इलाके की आर्थिक स्थिति के हिसाब से नियंत्रित करता है। 'ग्राउंड ट्रुथ' नाम का यह बॉक्स साइकिल के ब्रेक सिस्टम से जुड़ा होता है। जब कोई साइकिल चालक महंगे किराए से जूझ रहे क्षेत्र में पहुंचता है, तो यह डिवाइस ब्रेक लगाकर पैडल को भारी कर देता है।

डेटा और जीपीएस की मदद से काम करती है यह तकनीक

ग्राउंड ट्रुथ डिवाइस की पूरी कार्यप्रणाली रियल-टाइम लोकेशन ट्रैकिंग और सरकारी आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है। इस उपकरण को साइकिल के अगले फॉर्क पर एक छोटे बॉक्स के रूप में लगाया जाता है और इसका कनेक्शन सीधे सामने वाले ब्रेक की केबल से होता है। इस बॉक्स के अंदर बैटरी से चलने वाला एक जीपीएस मॉड्यूल लगा है, जो यात्रा के दौरान साइकिल की सटीक स्थिति को ट्रैक करता रहता है।

ये भी पढ़ें

यह सिस्टम यूएस सेंसस ब्यूरो के अमेरिकन कम्युनिटी सर्वे से हासिल किए गए आर्थिक आंकड़ों का इस्तेमाल करता है, जो डिवाइस की मेमोरी में पहले से स्टोर रहते हैं। डिवाइस में मौजूद माइक्रो-कंट्रोलर लगातार यह जांचता है कि संबंधित ब्लॉक में रहने वाले परिवार अपनी कमाई का 30 प्रतिशत से अधिक हिस्सा मकान के किराए पर खर्च कर रहे हैं या नहीं। जैसे ही साइकिल किसी ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहां किराए का बोझ ज्यादा है, माइक्रो-कंट्रोलर एक छोटी मोटर को सक्रिय कर देता है। यह मोटर ब्रेक केबल को खींचती है, जिससे साइकिल का पैडल बहुत भारी हो जाता है और चलाना बेहद कठिन हो जाता है। इसके विपरीत, समृद्ध इलाकों से गुजरते समय साइकिल सामान्य रूप से आसानी से चलती है।

दो मॉडल और 10,000 डॉलर की मिली ग्रांट

इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के लिए ब्लाइंडर को ब्रुकलिन की कला संस्था 'आइडल हेंड्स' की तरफ से 10,000 डॉलर की आर्थिक सहायता यानी ग्रांट मिली थी। कलाकार ने इस उपकरण के दो अलग-अलग वर्ज़न तैयार किए हैं। इनमें से एक मॉडल सामान्य व्यक्तिगत साइकिलों पर लगाया जा सकता है, जबकि दूसरा मॉडल विशेष रूप से न्यूयॉर्क में चलने वाली 'सिटी बाइक' के लिए डिजाइन किया गया है।

हालांकि, यह तकनीक सिर्फ एक वैचारिक कला प्रोजेक्ट है और इसे आम लोगों के इस्तेमाल के लिए बाजार में नहीं उतारा जाएगा। लिफ़्ट के मालिकाना हक वाली किराए की ई-बाइक की ब्रेकिंग प्रणाली में बदलाव करने से जुड़े कानूनी और सुरक्षा नियमों के कारण इसे व्यावसायिक रूप से लागू नहीं किया जा सकता। ब्लाइंडर ने इस डिवाइस की टेस्टिंग के लिए विभिन्न इलाकों में लगभग 35 मील की दूरी तक साइकिल चलाई और इस दौरान पैडल के बदलते दबाव का वीडियो भी रिकॉर्ड किया।

लगातार 5 सालों से बढ़ रहे हैं सिटी बाइक के दाम

इस प्रयोग के लिए 'सिटी बाइक' को चुनने की एक खास वजह थी। लिफ़्ट द्वारा संचालित इस साइकिल सेवा के किरायों में पिछले लगातार 5 वर्षों से बढ़ोतरी की जा रही है। शहर में साइकिल किराए पर लेने की लागत काफी अधिक बढ़ चुकी है, जिससे यह आम लोगों की पहुंच से दूर होती जा रही है। ब्लाइंडर का मानना है कि किराए की साइकिल की बढ़ती कीमतें शहर के व्यापक रिहाइशी संकट और बढ़ती महंगाई को सीधे तौर पर दर्शाती हैं।

ब्लाइंडर के अनुसार, इस कलात्मक प्रयोग का मुख्य उद्देश्य बड़े और जटिल आंकड़ों को केवल चार्ट या ग्राफ में देखने के बजाय उन्हें शारीरिक रूप से महसूस कराना है। जब लोग आंकड़ों को केवल कागजों पर देखते हैं, तो वे समस्या की गंभीरता को गहराई से महसूस नहीं कर पाते। यह डिवाइस लोगों को डेटा का एक ठोस और व्यावहारिक अहसास कराने की कोशिश करता है।

महामारी के दौरान बनाया था 'पैनडेमिक पल्स' ऐप

ग्राउंड ट्रुथ से पहले भी ब्लाइंडर इस तरह के डेटा आधारित प्रयोग कर चुके हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान उन्होंने 'पैनडेमिक पल्स' नाम का एक मोबाइल ऐप तैयार किया था। वह ऐप कोरोना संक्रमण के आंकड़ों के आधार पर यूजर के फोन की स्क्रीन की ब्राइटनेस बदल देता था। जब संक्रमण के मामले बढ़ते थे, तो स्क्रीन धुंधली हो जाती थी, और जब किसी की मौत की खबर दर्ज होती थी, तो स्क्रीन कुछ पलों के लिए पूरी तरह से ब्लैक आउट हो जाती थी।

इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स का मकसद एक ही है कि डिजिटल डेटा को इंसान के भौतिक अनुभवों से जोड़ा जाए। किराए की साइकिल के ब्रेक को आर्थिक असमानता का संकेतक बनाकर यह प्रोजेक्ट लोगों को सोचने पर मजबूर करता है कि कैसे एक ही शहर में कुछ ब्लॉक के फासले पर जीवन स्तर और आर्थिक परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं।

सवाल-जवाब

ग्राउंड ट्रुथ क्या है और यह कैसे काम करता है?
ग्राउंड ट्रुथ एक हार्डवेयर बॉक्स है जो साइकिल के ब्रेक से जुड़ा होता है। यह जीपीएस और अमेरिकी जनगणना आंकड़ों की मदद से महंगे किराए वाले इलाकों में पैडल को भारी बना देता है।
इस डिवाइस को किसने और किस फंडिंग से बनाया है?
इसे ब्रुकलिन के कलाकार ब्लाइंडर ने बनाया है, जिन्हें इसके लिए आइडल हेंड्स संस्था से 10,000 डॉलर की ग्रांट मिली थी।
क्या यह डिवाइस आम लोगों के उपयोग के लिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा?
नहीं, यह केवल एक कलात्मक वैचारिक प्रोजेक्ट है और सुरक्षा व कानूनी कारणों से इसे व्यावसायिक रूप से जारी नहीं किया जाएगा।
कलाकार ने सिटी बाइक सेवा को ही इस प्रयोग के लिए क्यों चुना?
क्योंकि लिफ़्ट की मालिकाना हक वाली सिटी बाइक सेवा ने लगातार 5 वर्षों तक किराए बढ़ाए हैं, जो शहर में बढ़ती महंगाई और रिहाइशी संकट का सटीक प्रतीक है।
ब्लाइंडर का इससे पहले कौन सा प्रोजेक्ट चर्चित रहा था?
उन्होंने 'पैनडेमिक पल्स' नाम का एक ऐप बनाया था जो कोरोना संक्रमण बढ़ने पर फोन स्क्रीन को धुंधला और मौत दर्ज होने पर पूरी तरह ब्लैक आउट कर देता था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp