एप्पल के नए आईफोन 18 प्रो को पूरी तरह खोलकर उसके अंदरूनी कलपुर्जों की बनावट और मरम्मत की प्रक्रिया का बारीक विश्लेषण सामने आया है। इस विस्तृत जांच का मुख्य मकसद यह समझना था कि डिवाइस के अलग-अलग आंतरिक हिस्से कैसे जुड़े हैं और किसी खराबी की स्थिति में उन्हें ठीक करना कितना मुमकिन है। इस पूरी पड़ताल के बाद स्मार्टफोन को 7/10 की रिपेयर स्कोर दिया गया है, जो ठीक पिछले साल 2025 में आईफोन 17 प्रो को मिले स्कोर के बराबर ही है।
वेरिएबल अपर्चर कैमरा: नई तकनीक और मरम्मत की सबसे बड़ी चुनौती
आईफोन 18 प्रो के मुख्य 48-मेगापिक्सल कैमरे में पहली बार वेरिएबल अपर्चर लेंस दिया गया है। स्मार्टफोन जगत में यह पहली बार नहीं है, लेकिन किसी आईफोन मॉडल के लिए यह बिल्कुल नया प्रयोग है। फोटो और वीडियो के दौरान अपर्चर बदलने के लिए इसमें इंसानी बाल जितने बारीक छह घूमने वाले ब्लेड्स का इस्तेमाल किया गया है।
तकनीकी नजरिए से यह बदलाव शानदार है, मगर मेंटेनेंस के लिहाज से इसे फोन की सबसे कमजोर कड़ी माना जा रहा है। कैमरे में मूविंग पार्ट्स शामिल होने से उनके खराब होने या टूटने की संभावना बढ़ जाती है। इन सूक्ष्म ब्लेड्स की बनावट इतनी जटिल है कि किसी एक ब्लेड को अलग से सुधारना लगभग नामुमकिन काम है। इसका सीधा मतलब यह है कि अगर लेंस का मैकेनिज्म बिगड़ा, तो ग्राहकों को सिंगल पार्ट बदलने के बजाय पूरा कैमरा मॉड्यूल ही नया लगाना पड़ेगा, जिससे मरम्मत का खर्च काफी बढ़ जाएगा। हालांकि, फोन के ढांचे से पूरे कैमरा मॉड्यूल को बाहर निकालना अपेक्षाकृत आसान पाया गया है।
बैटरी बदलने की प्रक्रिया में राहत और पेच
स्मार्टफोन की बैटरी बदलने की प्रक्रिया में मिली-जुली स्थिति देखने को मिलती है। बैटरी तक पहुंचने के लिए सबसे पहले ग्लू से चिपकी स्क्रीन को सावधानी से अलग करना पड़ता है। लेकिन एक बार जब डिस्प्ले सुरक्षित रूप से हट जाता है, तो अंदर का काम काफी सरल हो जाता है। इस हैंडसेट में बैटरी को गोंद से चिपकाने के बजाय स्क्रू की मदद से कसा गया है, जिससे इसे सुरक्षित रूप से बाहर निकालना पहले की तुलना में बहुत सीधा हो जाता है।
मरम्मत के अधिकार और नियमों का दबाव
कुल मिलाकर, आईफोन 18 प्रो की मरम्मत की सहजता बीते कुछ सालों के स्तर पर ही बनी हुई है, जहां कुछ स्पष्ट सुधार दिखे हैं। एप्पल को अपने हार्डवेयर को आसान बनाने के लिए मरम्मत समर्थकों और यूरोपीय संघ के कड़े कानूनों के लंबे दबाव का सामना करना पड़ा है।
एप्पल ने साल 2021 में अपना सेल्फ-रिपेयर प्रोग्राम शुरू किया था। शुरुआती दिनों में टूल्स और कलपुर्जों तक पहुंच सीमित होने के चलते इसे काफी आलोचना झेलनी पड़ी थी। बाद में अमेरिकी राज्य स्तर के सांसदों के दबाव में कंपनी ने अपनी नीतियों को थोड़ा लचीला बनाया और उपभोक्ताओं के मार्गदर्शन के लिए रिपेयर असिस्टेंट पेश किया। इसके बावजूद, इसी साल ओनरशिप एडवोकेसी समूह पीआईआरजी ने आईफोन 17 की रिपेयरेबिलिटी को डी-रेटिंग दी थी। नए मॉडल की 7/10 रेटिंग दिखाती है कि हार्डवेयर डिजाइन में सुधार की दिशा जारी है।


















