सड़कों पर बिना चालक के दौड़ने वाली रोबोटैक्सी अब केवल विज्ञान कथाओं का हिस्सा नहीं रही हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका समेत दुनिया के चुनिंदा देशों में स्वचालित कैब आम जनता को अपनी सेवाएं देने लगी हैं। इंसानों के व्यवहार का अनुमान लगाना कभी भी आसान नहीं रहा है, और यही अनिश्चितता स्वायत्त वाहनों की दुनिया में एक अनोखी चुनौती खड़ी कर रही है। जब किसी वाहन में सामने निगरानी रखने वाला ड्राइवर मौजूद नहीं होता, तो यात्रियों के भीतर की झिझक अक्सर खत्म हो जाती है। ट्रेनों, हवाई जहाजों और गाड़ियों जैसे अर्ध-निजी या पूरी तरह सार्वजनिक स्थानों पर असामाजिक आचरण का एक लंबा इतिहास रहा है, चाहे वह प्रॉम नाइट की लिमोजीन हो, माइल हाई क्लब का चलन हो, या फिर फिल्मों और वयस्क वेबसाइटों पर दिखने वाले दृश्य हों। इसी पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए सिस्टम इंजीनियरिंग, कंप्यूटर साइंस, मनोविज्ञान और पर्यटन अध्ययन से जुड़े शोधकर्ता इस बात का हल ढूंढने में जुटे हैं कि बिना ड्राइवर वाली टैक्सियों को लोग अंतरंग पलों का अड्डा बनने से कैसे रोका जाए।
स्वायत्त सफर में मर्यादा बनाए रखने की चुनौती
जब गाड़ी के भीतर टोकने वाला कोई अधिकार संपन्न व्यक्ति मौजूद न हो, तो यात्रियों की संभावित हरकतों पर नियंत्रण रखना सबसे बड़ा सवाल बन जाता है। इस विषय पर काम कर रहे शोधकर्ता पावेल बाज़िलिन्स्की और उनके सहयोगी यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि क्या लोगों को ऐसी हरकतें शुरू करने से पहले ही रोका जा सकता है। स्वीडन के गोथेनबर्ग में आयोजित एक उद्योग सम्मेलन के दौरान एक चार घंटे की विशेष कार्यशाला रखी गई, जिसकी शुरुआत सुबह 8:30 बजे तय की गई। इस सत्र में दुनिया भर के विशेषज्ञों से डिजाइन और तकनीकी सुझाव मांगे गए हैं कि वे खुद चलने वाली कारों के भीतर सहमति से होने वाले अंतरंग व्यवहार को रोकने के उपाय निकालें। शोधकर्ताओं का मानना है कि स्वचालित वाहनों में इस तरह की हरकतों पर विचार करना दरअसल भविष्य के मोबिलिटी सिस्टम का तनाव परीक्षण करने जैसा है, जहां ये गाड़ियां आखिरकार साझा सामुदायिक स्थानों का रूप लेंगी।
तकनीक की सार्वजनिक साख और सामाजिक भरोसा
इस विषय पर काम कर रहे इंजीनियरिंग मनोवैज्ञानिक एलेक्जेंड्रोस रूचिट्सास का कहना है कि उनकी टीम का रुख माता-पिता और बुजुर्गों जैसा लग सकता है, लेकिन इस पहल के पीछे एक बेहद गंभीर वजह है। शोधकर्ताओं का प्राथमिक उद्देश्य किसी का आनंद छीनना नहीं है, बल्कि वे इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि शुरुआती दौर में ही यह क्रांतिकारी तकनीक किसी गलत छवि की शिकार न हो जाए। यदि रोबोटैक्सी की पहचान केवल पार्टियों, नशे और मौज-मस्ती के अड्डे के रूप में बन गई, तो आम समाज का इस पर से भरोसा उठ जाएगा। एलेक्जेंड्रोस रूचिट्सास ग्रीस के अपने मूल द्वीपों का उदाहरण देते हुए आगाह करते हैं कि वे नहीं चाहते कि यह आधुनिक तकनीक बैंग बस जैसी विकृतियों का पर्याय बन जाए।
स्वचालित गतिशीलता के वास्तविक लाभ समाज के कमजोर वर्गों तक तभी पहुंच सकते हैं जब लोग इसे एक गंभीर, न्यायसंगत और सुरक्षित साधन के रूप में स्वीकार करें। बिना ड्राइवर वाली कारें बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए वरदान साबित हो सकती हैं, जिनके लिए आज के समय में अकेले सफर करना बेहद कठिन होता है। भविष्य में इस तकनीक का विस्तार केवल निजी टैक्सियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सार्वजनिक परिवहन जैसे स्वचालित बसों में भी लागू होगी। अगर शुरुआत से ही कड़े नियम और डिजाइन मानक तय नहीं किए गए, तो सार्वजनिक स्वीकार्यता को भारी नुकसान पहुंचेगा।
डिजाइन से जुड़े संभावित समाधान और भविष्य का खाका
गोथेनबर्ग में आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षा जगत के साथ-साथ वाहन उद्योग के प्रतिनिधियों ने भी शिरकत की। उल्लेखनीय है कि गोथेनबर्ग वोल्वो कार्स और तकनीकी आपूर्तिकर्ता स्मार्टआई का गृह नगर है, जबकि इस सम्मेलन को बीएमडब्ल्यू और गूगल जैसी वैश्विक कंपनियों का समर्थन भी प्राप्त है। प्रतिभागियों को ऐसे भौतिक और डिजाइन हस्तक्षेप सुझाने के लिए प्रेरित किया गया है जो यात्रियों को गाड़ी के भीतर अवांछित हरकतों से दूर रखें। एलेक्जेंड्रोस रूचिट्सास ने शुरुआती विचार साझा करते हुए कहा कि शायद भविष्य की रोबोटैक्सी के केबिन को पारदर्शी बनाया जा सकता है, या फिर सेंसर तकनीक अगर किसी अस्वीकार्य आचरण को भांप ले तो गाड़ी के भीतर चेतावनी देने वाली लाइट ब्लिंक करना शुरू कर दे।
कार्यशाला के आयोजकों की योजना इस मंथन से मिले निष्कर्षों के आधार पर एक शोध पत्र प्रकाशित करने की है। पावेल बाज़िलिन्स्की का मानना है कि हालांकि यह विषय सुनने में अजीब या चटपटा लग सकता है, लेकिन इंसानों और मशीनों के अंतर्संबंधों के अध्ययन में यह वह अनदेखी सच्चाई है जिस पर बात करना बेहद जरूरी था। उनका तर्क है कि अगर डिजाइन और तकनीक के जरिए वाहनों के भीतर अंतरंग गतिविधियों को रोका जा सकता है, तो उन्हीं सुरक्षा मानकों से भविष्य में चोरी, दादागिरी और हत्या जैसी गंभीर आपराधिक घटनाओं पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। यही उपाय भविष्य में साझा स्वायत्त बसों और सार्वजनिक स्थानों को सुरक्षित बनाने में नीति निर्माताओं और कंपनियों का मार्गदर्शन करेंगे।



















