मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर करीब आठ साल पहले हुए एक भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले पति-पत्नी के परिजनों को एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब राहत मिली है. मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने इस दुर्घटना में अनाथ हुए दो नाबालिग बच्चों और परिवार को 1,80,99,232 रुपये का कुल मुआवजा देने का निर्देश दिया है. यह सड़क दुर्घटना उस समय हुई थी जब तेज रफ्तार से चल रहे ट्रक के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया था और पीछे से आ रही कार उसमें जा घुसी थी, जिससे एक ही झटके में दोनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया था.
23 दिसंबर 2018 को एक्सप्रेसवे पर हुआ था दर्दनाक हादसा
यह पूरा मामला 23 दिसंबर 2018 का है, जब अंकित भूपिंदरसिंह चुग अपनी पत्नी संजना और अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के रास्ते कार से सफर कर रहे थे. उसी मार्ग पर आगे एक ट्रक काफी तेज रफ्तार में चल रहा था. यात्रा के दौरान अचानक ट्रक चालक ने बीच सड़क पर ही जोरदार ब्रेक लगा दिए. ट्रक के ठीक पीछे चल रही अंकित की कार की गति भी तेज थी, जिसकी वजह से उन्हें वाहन संभालने या ब्रेक लगाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला. नतीजतन, कार सीधे सामने चल रहे भारी वाहन से जा टकराई.
टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार अंकित और संजना गंभीर रूप से घायल हो गए. दुर्घटना के तुरंत बाद राहत एवं बचाव कार्य करते हुए दोनों को पनवेल के ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया. हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद गंभीर चोटों के कारण दोनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस भयावह सड़क हादसे में दोनों नाबालिग बच्चों की जान तो किसी तरह बच गई, लेकिन वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए और इतनी छोटी उम्र में उन्हें अपने माता-पिता दोनों को एक साथ खोने का गहरा आघात सहना पड़ा.
लापरवाही के अनुपात पर ट्रिब्यूनल का अहम फैसला
इस दुर्घटना से जुड़े दावों और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों की लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल की सदस्य गौरी कावडिकर ने 29 अक्टूबर को अपना अंतिम फैसला सुनाया. ट्रिब्यूनल ने इस मामले में दोनों चालकों की भूमिका का विस्तृत मूल्यांकन किया. अदालत ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि राजमार्गों पर गाड़ी चलाते समय आगे चल रहे वाहन से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखना पीछे चल रहे चालक का प्राथमिक कर्तव्य है ताकि आपातकालीन स्थिति में वाहन को नियंत्रित किया जा सके.
ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह टिप्पणी भी दर्ज की कि केवल आगे वाले वाहन द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने के आधार पर ही पीछे वाले वाहन चालक को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता. फिर भी, उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह पाया गया कि यदि कार चला रहे अंकित ने आगे चल रहे ट्रक से पर्याप्त फासला रखा होता और गति को उचित सीमा में नियंत्रित किया होता, तो इस भीषण टक्कर को टाला जा सकता था. इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दुर्घटना के लिए कार चालक अंकित को 70 प्रतिशत और ट्रक चालक को लापरवाही से गाड़ी चलाने व अचानक ब्रेक लगाने के लिए 30 प्रतिशत जिम्मेदार माना.
कमाई और आर्थिक नुकसान के आधार पर तय हुई राशि
मुआवजे की रकम निर्धारित करते समय ट्रिब्यूनल ने दोनों मृतकों के कामकाजी करियर और उनके वित्तीय योगदान को मुख्य आधार बनाया. अंकित चुग डेल इंटरनेशनल सर्विसेज में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी संजना एक स्कूल में सेवाएं दे रही थीं. दोनों की असामयिक मृत्यु से दोनों बच्चों और परिवार को हुए अपूरणीय आर्थिक तथा व्यक्तिगत नुकसान का गहन आकलन किया गया.
इसके बाद ट्रिब्यूनल ने संजना की मृत्यु के एवज में 92,53,500 रुपये और अंकित चुग की मृत्यु के लिए 88,45,732 रुपये की राशि तय की. इन दोनों राशियों को मिलाकर ट्रिब्यूनल ने कुल 1,80,99,232 रुपये का समग्र मुआवजा पीड़ित पक्ष को प्रदान करने का आदेश पारित किया, जिससे अनाथ हुए बच्चों के भविष्य और लालन-पालन को आर्थिक संबल मिल सके.

















