गूगल टीवी ने पोर्टेबल होम एंटरटेनमेंट बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। अब किसी फिल्म को देखने के लिए जटिल सब-मेन्यू में भटकने या रिमोट से वाई-फाई और नेटफ्लिक्स पासवर्ड टाइप करने की पुरानी झंझट से राहत मिल गई है। अनबॉक्सिंग के पांच मिनट के भीतर ही स्मार्टफोन से एक त्वरित क्यूआर कोड स्कैन करके किल बिल वॉल 1 जैसी फिल्म को 60 इंच की बड़ी स्क्रीन पर आनंद लेना बेहद आसान हो गया है।
स्ट्रीमिंग और कनेक्टिविटी के विकल्प
इनबिल्ट गूगल टीवी इंटरफेस के जरिए नेटफ्लिक्स, यूट्यूब, डिज़नी प्लस, एचबीओ मैक्स, एप्पल टीवी और प्राइम वीडियो जैसे सभी प्रमुख स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स तक तुरंत पहुंच मिल जाती है। इसके अलावा यूएसबी-ए या एचडीएमआई 2.0 एआरसी पोर्ट के जरिए बाहरी डिवाइस को भी आसानी से जोड़ा जा सकता है।
ब्राइटनेस और रेजोल्यूशन के फीचर्स
साउंडकोर नेबुला पी1आई में 1080p रेजोल्यूशन और 380 एएनएसआई लुमेन ब्राइटनेस दी गई है। इस श्रेणी के अन्य कॉम्पैक्ट पोर्टेबल प्रोजेक्टर्स में एक्जीमी, बेनक्यू, सैमसंग और ऑरजें जैसी कंपनियां भी लगभग ऐसे ही स्पेसिफिकेशंस देती हैं। यह बहुत अधिक चमकदार नहीं है, लेकिन कम रोशनी में पर्दें बंद करके 60 से 80 इंच की साफ स्क्रीन के लिए यह बिल्कुल उपयुक्त है।
4K की कमी और सामान्य जरूरतें
कुछ खरीदार इस बात से निराश हो सकते हैं कि यह प्रोजेक्टर 4K को सपोर्ट नहीं करता, लेकिन मौजूदा कीमत पर तकनीक अभी इस स्तर तक नहीं पहुंची है। सामान्य बड़ी स्क्रीन वाली मूवी नाइट के लिए इसकी खास जरूरत भी महसूस नहीं होती है।
कम रोशनी और डार्क रूम का प्रदर्शन
साउंडकोर नेबुला पी1आई सामान्य देखने के अनुभव के लिए एक संतोषजनक 1080p तस्वीर देता है, लेकिन सस्ते प्रोजेक्टर्स की तरह इसे बेहतर प्रदर्शन के लिए अंधेरे कमरे की जरूरत होती है। यदि आप स्क्रीन का आकार 60 इंच से अधिक बढ़ाते हैं, तो आसपास की रोशनी तस्वीर को धुंधला कर सकती है। इसलिए दिन के समय इसका इस्तेमाल करना मुश्किल होता है, लेकिन रात में पर्दे बंद करके और लाइट बुझाकर इसे 100 इंच तक की स्क्रीन पर अच्छे परिणामों के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि टीवी की तरह इसके रंग और कंट्रास्ट की उम्मीद न करें, क्योंकि गहरे दृश्यों और शैडो में यह थोड़ा संघर्ष करता है, जो बजट श्रेणी के सभी उपकरणों में आम बात है।
आउटडोर इस्तेमाल और पिक्चर मोड
प्रोजेक्टर को बाहर ले जाने पर भी ब्राइटनेस से जुड़ी यही समस्याएं सामने आती हैं। यदि आप किसी ऐसे ग्रामीण इलाके में रहते हैं जहां एकमात्र रोशनी तारों से आती है, तो शायद काम चल जाए, लेकिन शहर की छतों पर होने वाली पार्टियों की मार्केटिंग तस्वीरों पर पूरी तरह भरोसा न करें। उपयोगकर्ता कंट्रास्ट, सैचुरेशन, ब्लैक लेवल्स और शार्पेंड को आसानी से एडजस्ट कर सकते हैं, साथ ही विविड और मूवी जैसे विभिन्न पिक्चर मोड्स का चयन कर सकते हैं।
अनोखा घूमने वाला स्पीकर डिजाइन
इसकी सबसे खासियतों में इसके स्पीकर्स हैं, जिन्हें साइड में 90 डिग्री और लंबवत रूप से 200 डिग्री तक घुमाया जा सकता है। जब ये मुख्य बॉडी से चिपके होते हैं तब भी काम करते हैं और इनमें उम्मीद से बेहतर वजन महसूस होता है। जब इन्हें खोलकर श्रोता की ओर इशारा किया जाता है, तो आवाज की स्पष्टता काफी बेहतर हो जाती है। हालांकि इसमें बेस की कमी खलती है और आवाज थोड़ी पतली लगती है। यदि आवाज को 35 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ाया जाए, तो यह तेज हो जाती है लेकिन सुनने में थोड़ी असहज लगने लगती है।
निष्कर्ष और उपयोगिता
साउंडकोर नेबुला पी1आई स्वीकार्य ब्राइटनेस, कम लागत और बोल्ड ऑडियो प्रदर्शन के बीच एक संतुलित जगह रखता है। हालांकि इसमें इंटरनल बैटरी का न होना इसे पोर्टेबिलिटी के मामले में थोड़ा पीछे छोड़ता है। गूगल टीवी और नेबुला ऐप का इकोसिस्टम बेहद शानदार है, जो इसके उपयोग को बहुत आसान बनाता है। यदि यह आपकी जरूरतों को पूरा करता है और आप दिन के समय की बजाय केवल बजट में एक मजेदार विकल्प तलाश रहे हैं, तो यह निराश नहीं करेगा।



















