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मानसून के मौसम में बेहद खास है हरियाणा की मिर्च कलौंजी सब्जी, जानिए इसे बनाने का सही तरीकाखानपान
12 अग॰ 2026, 6:51 pm (78 दिन पहले)· 3

मानसून के मौसम में बेहद खास है हरियाणा की मिर्च कलौंजी सब्जी, जानिए इसे बनाने का सही तरीका

बरसात के दिनों में जब हरी सब्जियां महंगी हो जाती हैं, तब हरियाणा की पारंपरिक मिर्च-कलौंजी की सब्जी कम लागत में भोजन का स्वाद बढ़ा देती है।

बरसात के सुहावने मौसम में हर किसी की इच्छा कुछ तीखा, चटपटा और मसालेदार खाने की होती है। उत्तर भारत के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दौरान भोजन की थाली को खास बनाने के लिए तरह-तरह के पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन्हीं व्यंजनों में हरियाणा की मशहूर भरवां मिर्च और कलौंजी की सब्जी प्रमुख स्थान रखती है। यह सब्जी न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि इसे तैयार करने में बेहद कम समय और बेहद कम सामग्री की आवश्यकता होती है। जब बाजार में मौसमी सब्जियों के भाव आसमान छूने लगते हैं, तब यह देसी रेसिपी एक किफायती और बेहतरीन विकल्प बनकर उभरती है। ताजी गर्मागर्म रोटियों या दाल-चावल के साथ इसका मेल खाने का आनंद दोगुना कर देता है।

हरियाणा के ग्रामीण इलाकों की प्रसिद्ध देसी रेसिपी

हरियाणा के फरीदाबाद जिले में बल्लभगढ़ के पास स्थित ऊंचा गांव के निवासी महेंद्र सैनी बताते हैं कि गांवों में मिर्च और कलौंजी की सब्जी को लोग बड़े चाव से खाते हैं। वहां के हर घर में बारिश के दिनों में यह पारंपरिक व्यंजन नियमित रूप से बनाया जाता है। इस सब्जी की खासियत यह है कि इसमें मोटी हरी मिर्च का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके अंदर विभिन्न खड़े और पिसे मसालों का एक बेहतरीन मिश्रण भरकर पकाया जाता है। इसके बाद इसे सरसों के तेल में धीमी आंच पर धीरे-धीरे भुना जाता है। जैसे-जैसे मिर्च तेल में पककर नरम होती जाती है, मसालों का तीखा और खट्टा स्वाद मिर्च के भीतर तक पूरी तरह समा जाता है, जिससे इसका स्वाद काफी बढ़ जाता है।

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मसालों का सटीक संतुलन और कलौंजी की सही मात्रा

इस सब्जी को तैयार करते समय मसालों के अनुपात का ध्यान रखना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। महेंद्र सैनी के अनुसार, सब्जी में कलौंजी का इस्तेमाल बहुत सोच-समझकर और सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, क्योंकि कलौंजी का प्राकृतिक स्वाद काफी तीखा और तेज होता है। यदि इसकी मात्रा थोड़ी सी भी ज्यादा हो जाए, तो सब्जी का स्वाद कड़वा या अत्यधिक खट्टा हो सकता है। वे बताते हैं कि 250 ग्राम यानी एक पाव हरी मिर्च में मात्र दो से तीन कलौंजी डालना ही पर्याप्त रहता है। इसके साथ मसाले का मुख्य आधार तैयार करने के लिए सौंफ, जीरा, मेथी दाना, धनिया पाउडर, हल्दी, अमचूर और स्वादानुसार नमक का मिश्रण बनाया जाता है। जो लोग लहसुन पसंद करते हैं, वे इसमें कुटा हुआ लहसुन भी मिला सकते हैं। इन सभी सूखे मसालों में थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाकर मिलाया जाता है, जिससे मसाला थोड़ा नमीयुक्त हो जाता है और मिर्च के अंदर भरते समय बाहर नहीं निकलता।

मिर्च की सफाई, कटाई और मसाला भरने का तरीका

सब्जी बनाने की प्रक्रिया की शुरुआत ताजी मोटी हरी मिर्च की सही तरीके से सफाई से होती है। सबसे पहले मिर्चों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लिया जाता है और फिर किसी सूखे व साफ कपड़े से पोंछकर पूरी तरह सुखा लिया जाता है, ताकि नमी न रहे। इसके बाद मिर्च को लंबाई की दिशा में बीच से चीरा लगाया जाता है, लेकिन ध्यान रखा जाता है कि उसका ऊपरी डंठल अलग न हो। डंठल जुड़ा रहने से पकाने के दौरान मिर्च का आकार बना रहता है। इसके बाद तैयार किया गया मसाले का मिश्रण एक-एक करके सभी मिर्चों के चीरे के अंदर अच्छी तरह दबाकर भरा जाता है। सरसों का तेल मिला होने के कारण मसाला मिर्च के भीतर मजबूती से जम जाता है।

धीमी आंच पर पकाने और तड़का लगाने की विधि

जब सभी मिर्चों में मसाला भर दिया जाता है, तब पकाने की प्रक्रिया शुरू होती है। एक चौड़ी कढ़ाई में लगभग तीन से चार चम्मच सरसों का तेल डालकर उसे अच्छी तरह गर्म किया जाता है। तेल से धुआं निकलने के बाद आंच मध्यम करके उसमें चुटकी भर हींग, थोड़ा सा जीरा और दो-तीन दाने कलौंजी का तड़का लगाया जाता है। इसके तुरंत बाद मसाला भरी हुई मिर्चों को एक-एक करके सावधानीपूर्वक कढ़ाई में डाल दिया जाता है। इसके बाद गैस की आंच धीमी कर दी जाती है और कढ़ाई को ढक्कन से ढककर लगभग पांच से सात मिनट तक पकने दिया जाता है। बीच-बीच में ढक्कन हटाकर मिर्चों को पलटते रहना जरूरी होता है, ताकि वे चारों तरफ से समान रूप से भुन जाएं। जब मिर्च पूरी तरह से नरम हो जाती है और मसालों से तेल अलग होता दिखाई देने लगता है, तब यह सब्जी बनकर पूरी तरह तैयार मानी जाती है।

कलौंजी की पारंपरिक सफाई प्रक्रिया और वर्तमान बाजार भाव

ग्रामीण क्षेत्रों में कलौंजी के इस्तेमाल को लेकर पुरानी परंपराएं और जानकारियां आज भी प्रचलित हैं। महेंद्र सैनी के अनुसार, जब पेड़ से कलौंजी तोड़ी जाती है, तो उस पर प्राकृतिक रूप से गोंद जैसा चिपचिपा पदार्थ लगा रहता है। इस वजह से ग्रामीण इसे कभी भी सीधे भोजन में इस्तेमाल नहीं करते। तोड़ने के बाद कलौंजी को पानी से भरे बर्तन में डालकर बार-बार धोया जाता है, जिससे उसकी पूरी गंदगी और चिपचिपाहट दूर हो जाती है। इसके बाद इसे धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है और फिर डिब्बों में सुरक्षित रखा जाता है। जहां तक इसके बाजार भाव का सवाल है, वर्तमान में मंडी में कलौंजी का भाव लगभग 50 रुपये से 60 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। चूंकि सब्जी में इसकी बेहद मामूली मात्रा ही इस्तेमाल होती है, इसलिए इसे बहुत कम मात्रा में खरीदकर भी लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

250 ग्राम हरी मिर्च में कितनी कलौंजी डालनी चाहिए?
250 ग्राम (एक पाव) हरी मिर्च के लिए 2 से 3 कलौंजी ही पर्याप्त होती है, क्योंकि ज्यादा डालने पर सब्जी का स्वाद खट्टा या कड़वा हो सकता है।
भरवां मिर्च का मसाला बनाने के लिए कौन से मुख्य मसाले चाहिए?
इसके मसाले के लिए सौंफ, जीरा, मेथी दाना, कलौंजी, धनिया पाउडर, हल्दी, अमचूर, नमक और थोड़ा सा सरसों का तेल मिलाया जाता है। चाहें तो कुटा लहसुन भी डाल सकते हैं।
मिर्च-कलौंजी की सब्जी पकाने में कितना समय लगता है?
धीमी आंच पर ढककर पकाने में लगभग 5 से 7 मिनट का समय लगता है। बीच-बीच में मिर्च को पलटना होता है।
पेड़ से तोड़ी गई कलौंजी को सीधे इस्तेमाल क्यों नहीं किया जाता?
ताजी कलौंजी पर गोंद जैसी चिपचिपी गंदगी लगी होती है, इसलिए इसे पहले पानी से धोकर सुखाया जाता है।
वर्तमान में मंडी में कलौंजी का क्या भाव है?
हालिया मंडी भाव के अनुसार कलौंजी लगभग 50 से 60 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है।
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