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मणिपुर के कामजोंग में नए सिरे से भड़की जातीय हिंसा, गोलीबारी में महिला की मौत के बाद धारा 163 लागूमणिपुर
10 अक्तू॰ 2026, 4:12 pm (1 घंटे पहले)· 1

मणिपुर के कामजोंग में नए सिरे से भड़की जातीय हिंसा, गोलीबारी में महिला की मौत के बाद धारा 163 लागू

मणिपुर के कामजोंग जिले में कुकी और नगा समुदायों के बीच ताजा संघर्ष के दौरान गोली लगने से एक महिला की जान चली गई। तनाव बढ़ने के बाद प्रशासन ने चसाड क्षेत्र में निषेधाज्ञा जारी कर सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया है।

मणिपुर के कामजोंग जिले में शुक्रवार रात अचानक बिगड़े हालात के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त प्रशासनिक कदम उठाए गए हैं। चसाड गांव में भड़की अशांति के दौरान चली गोली से पांच बच्चों की मां दोमखोनेई तौथांग की मौत हो गई। उनकी गर्दन के पास गोली लगी थी, जिसके तुरंत बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। वह स्थानीय स्वयंसेवकों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ चल रहे एक विरोध प्रदर्शन में शामिल थीं, तभी यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी। इस खूनी टकराव और घरों में आगजनी की खबरों के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है।

गोलीबारी और आगजनी से दहला चसाड गांव

क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों पर संदिग्ध कुकी सशस्त्र समूहों की तरफ से अचानक गोलियां चलाई गईं, जिसके जवाब में जवानों ने भी मोर्चा संभाला। दोनों पक्षों के बीच शुरू हुई यह भीषण गोलीबारी शुक्रवार देर रात से लेकर शनिवार सुबह तक रुक-रुक कर चलती रही। इस हिंसक टकराव में दोनों पक्षों के कई नागरिकों के घायल होने की खबर सामने आई है। इसके साथ ही उपद्रव के दौरान कम से कम चार घरों को आग के हवाले कर दिया गया। हालांकि, घायलों की कुल संख्या और संपत्ति के नुकसान का आधिकारिक आकलन प्रशासन की ओर से पूरा किया जाना बाकी है।

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तांगखुल नगा ग्रामीणों के मकानों को भी बनाया गया निशाना

इस ताजा घटनाक्रम से ठीक पहले 9 और 10 अक्टूबर की दरमियानी रात को अज्ञात उपद्रवियों ने तांगखुल नगा समुदाय के ग्रामीणों के घरों में आग लगा दी थी। लगातार दो दिनों से बन रहे इस तनावपूर्ण माहौल ने कुकी और नगा समूहों के बीच की दूरियों को और गहरा कर दिया। महिला की मौत पर कुकी ह्यूमन राइट्स फोरम, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन और उखरुल की कुकी सीएसओ वर्किंग कमेटी ने कड़ा आक्रोश जताया है। इन संगठनों ने इस घटना की पुरजोर निंदा करते हुए जिम्मेदार सुरक्षाकर्मियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।

प्रशासन ने लागू की धारा 163, सख्त पहरा

हालात को और ज्यादा बिगड़ने से रोकने के लिए जिला मजिस्ट्रेट ने त्वरित कदम उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। यह निषेधाज्ञा चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में प्रभावी की गई है। इस आदेश के तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एक जगह जमा होने, किसी भी प्रकार के घातक हथियार या खतरनाक वस्तुएं लेकर चलने और इलाके में बिना अनुमति आवाजाही पर पूर्ण पाबंदी रहेगी।

किन्हें मिलेगी प्रतिबंधों से छूट

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाबलों, ड्यूटी मजिस्ट्रेटों और बुनियादी जनसुविधाओं से जुड़े आवश्यक सेवा कर्मियों पर यह पाबंदी लागू नहीं होगी। इसके अलावा, जिन नागरिकों के पास कामजोंग जिले के जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी विशेष अनुमति पत्र होगा, उन्हें भी इस दायरे से बाहर रखा गया है। लगातार सामने आ रहे इन टकरावों ने पूर्वोत्तर के इस राज्य में शांति बहाली की कोशिशों के सामने खड़ी नाजुक सुरक्षा चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है।

सवाल-जवाब

कामजोंग के चसाड गांव में किसकी मौत हुई?
गोलीबारी में पांच बच्चों की मां दोमखोनेई तौथांग की गर्दन के पास गोली लगने से मौत हो गई।
प्रशासन ने इलाके में कौन सी कानूनी पाबंदी लागू की है?
जिला मजिस्ट्रेट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत चसाड पुलिस गेट जंक्शन के 400 मीटर के दायरे में निषेधाज्ञा लागू की है।
शुक्रवार रात हिंसा कैसे भड़की थी?
गांव के स्वयंसेवकों की हिरासत के विरोध के बीच सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की गई, जिसके जवाब में जवानों ने भी फायरिंग की।
क्या इस हिंसा में संपत्ति का भी नुकसान हुआ है?
हां, टकराव के दौरान चार घरों को जलाए जाने की खबर है, जबकि इससे पहले 9-10 अक्टूबर की रात को तांगखुल नगा ग्रामीणों के मकानों में भी आग लगाई गई थी।
निषेधाज्ञा से किन लोगों को छूट प्रदान की गई है?
ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों, मजिस्ट्रेटों, आवश्यक सेवा कर्मियों और प्रशासन से विशेष परमिट प्राप्त व्यक्तियों को छूट दी गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·6 मिनट पहले

मणिपुर में हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। रोज ऐसी खबरें देखकर बहुत दुख होता है, खासकर जब बच्चों की मां इस तरह की हिंसा में अपनी जान गंवा दें। शांति बहाل करने के लिए प्रशासन को अब और ज्यादा कड़े कदम उठाने पड़ेंगे।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·5 मिनट पहले

रविकेश जी, आपकी बात बिल्कुल सही है। जब मैं खुद कुछ साल पहले इंफाल गया था, तब भी हर तरफ ऐसा ही तनाव और डर का माहौल देखा था, जो आज भी दिल दहला देता है।

Rohan Verma@rohan-verma·29 मिनट पहले

मणिपुर में हालात सुधरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं, रोज किसी न किसी की जान जा रही है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 मिनट पहले

रोहन भाई, सचमुच हालात बहुत खराब हैं। क्या अब प्रशासन वहां और कड़े कदम उठाने की सोच रहा है?

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