वर्ष 2013 के चर्चित यौन उत्पीड़न मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने गुरुवार को महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए तहलका मैगजीन के संस्थापक तरुण तेजपाल को दोषी ठहराया है। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा उन्हें बरी किए जाने के पूर्व आदेश को रद्द करते हुए तरुण तेजपाल को 10 वर्ष की जेल की सजा सुनाई है और साथ ही 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। मामले की जांच अधिकारी और गोवा पुलिस की अधिकारी सुनीता सावंत ने जानकारी दी है कि दोषी को अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया गया है। इस फैसले के सार्वजनिक होने के तुरंत बाद तरुण तेजपाल ने अपना पहला बयान जारी करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय को निराशाजनक बताया और इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख करने का ऐलान किया है।
उच्च न्यायालय का फैसला और आत्मसमर्पण की समय-सीमा
बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच द्वारा गुरुवार को सुनाए गए इस निर्णय से एक दशक से अधिक पुराने मामले में नया मोड़ आ गया है। अदालत ने पूर्व में आए निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए 2013 के इस मामले में सजा निर्धारित की। गोवा पुलिस की ओर से मामले की जांच अधिकारी सुनीता सावंत ने बताया कि न्यायिक आदेश के अनुपालन के लिए तरुण तेजपाल को सरेंडर करने हेतु दो हफ़्ते का वक्त प्रदान किया गया है। 10 साल के कारावास के साथ-साथ अदालत ने उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है, जिसे उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत जमा करना होगा।
तरुण तेजपाल का पक्ष और सुप्रीम कोर्ट में अपील की योजना
अदालत के फैसले के पश्चात तहलका मैगजीन के फाउंडर तरुण तेजपाल ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। निर्णय पर दुख व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "हम इस फैसले से बहुत निराश हैं।" इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उनके पक्ष के सबूतों पर ठीक से ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि उनके पास ऐसे पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध हैं जो उनकी बेगुनाही को साबित करते हैं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए तरुण तेजपाल ने इस पूरी कार्यवाही को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। उन्होंने कहा कि वे एक राजनीतिक साजिश का शिकार हुए हैं और तहलका मैगजीन के काम की वजह से पिछले 13 सालों से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने स्मरण कराया कि इससे पहले उन्होंने ट्रायल कोर्ट में लगभग 7.5 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी, जिसके बाद अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। तरुण तेजपाल ने न्यायपालिका पर पूर्ण भरोसा जताते हुए कहा कि वे इस फैसले के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेंगे और अपने सबूतों को शीर्ष अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
गोवा सरकार और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का वक्तव्य
उच्च न्यायालय द्वारा तरुण तेजपाल को सजा सुनाए जाने के निर्णय पर गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने भी अपना वक्तव्य जारी किया है। फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा, "बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच का आज आया फैसला न्याय की जीत है।"
मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने आगे कहा कि चूंकि यह पूरा मामला गोवा में घटित हुआ था, इसलिए राज्य सरकार और गोवा पुलिस की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी थी कि वे इस केस पर लगातार अपनी नजर बनाए रखें। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस पूरे मामले को अत्यंत गंभीरता और मुस्तैदी के साथ अदालत में आगे बढ़ाया, जिसके परिणामस्वरूप आज न्याय सुनिश्चित हो सका है।















