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चमोली की टनल में मलबा और पानी भरने से फंसे 20 से अधिक मजदूर, 16 को सुरक्षित निकाला गयाभारत
13 अग॰ 2026, 9:02 pm (1 घंटे पहले)· 2

चमोली की टनल में मलबा और पानी भरने से फंसे 20 से अधिक मजदूर, 16 को सुरक्षित निकाला गया

उत्तराखंड के चमोली जिले में टीएचडीसी की निर्माणाधीन डीआरटी टनल में अचानक मलबा गिरने से 20 से ज्यादा मजदूर अंदर फंस गए, जिनमें से 16 को सुरक्षित बचा लिया गया है।

उत्तराखंड के पहाड़ी जिले चमोली अंतर्गत पीपलकोटी इलाके में एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहां टीएचडीसी की सहायक कंपनी एचसीसी की देखरेख में बन रही निर्माणाधीन डीआरटी टनल के भीतर शाम को अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी भर गया। इस घटना के समय सुरंग के अंदर काम कर रहे 20 से अधिक श्रमिक वहीं फंस गए। हादसे की खबर मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और स्थानीय अधिकारियों के साथ राहत-बचाव दल तुरंत घटनास्थल की ओर रवाना हो गए।

युद्ध स्तर पर रेस्क्यू अभियान और 16 श्रमिकों की सकुशल निकासी

सुरंग में फंसे मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने तुरंत संयुक्त अभियान शुरू कर दिया। आपदा प्रबंधन की टीमें आधुनिक मशीनों और उपकरणों की मदद से मलबा हटाने के काम में जुटी हुई हैं। अब तक चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 16 श्रमिकों को सुरंग के अंदर से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। शेष बचे हुए मजदूरों तक पहुंचने और उन्हें बिना किसी नुकसान के बाहर लाने के लिए राहत कार्य लगातार जारी है।

गोपेश्वर जिला अस्पताल में चिकित्सकीय देखभाल

चमोली के जिला अधिकारी गौरव कुमार ने घटना स्थल पर खुद मौजूद रहकर पूरी स्थिति की कमान संभाली। उन्होंने बताया कि शाम लगभग 6:30 से 6:45 बजे के बीच टनल के अंदर पानी और मलबा आने की यह दुर्घटना हुई थी। सुरक्षित बचाए गए सभी 16 मजदूरों को तुरंत मेडिकल जांच और आवश्यक इलाज के लिए जिला अस्पताल गोपेश्वर भेजा जा रहा है। डॉक्टरों की टीम को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी श्रमिक को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी होने पर तत्काल उपचार दिया जा सके।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सख्त निर्देश

घटना की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पूरे मामले पर गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्यमंत्री ने शासन और प्रशासन के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राहत एवं बचाव कार्यों को युद्ध स्तर पर संचालित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरंग में फंसे प्रत्येक व्यक्ति का जीवन बचाना सरकार की पहली प्राथमिकता है। इसके साथ ही उन्होंने अधिकारियों को समन्वय बनाकर काम करने और किसी भी स्तर पर ढिलाई न बरतने के आदेश दिए हैं।

प्रभावितों की सहायता और पिछले हादसों का संदर्भ

मुख्यमंत्री धामी वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार संपर्क बनाए हुए हैं और पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं। उन्होंने प्रभावित श्रमिकों और उनके परिजनों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। गौरतलब है कि चमोली क्षेत्र में टनल हादसों का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पिछले साल दिसंबर महीने में भी चमोली की एक सुरंग में दो लोको ट्रेनों के आपस में टकरा जाने से बड़ा हादसा हुआ था, जिसमें 70 लोग घायल हुए थे।

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सवाल-जवाब

चमोली में टनल हादसा किस स्थान पर और किस प्रोजेक्ट में हुआ?
यह हादसा उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी क्षेत्र में हुआ, जहां टीएचडीसी के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के तहत एचसीसी द्वारा डीआरटी टनल का निर्माण किया जा रहा था।
टनल के अंदर हादसा किस समय और कैसे हुआ?
यह दुर्घटना शाम लगभग 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुई, जब सुरंग के अंदर अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी भर गया।
हादसे के समय कितने मजदूर फंसे थे और कितनों को बचा लिया गया है?
हादसे के समय 20 से अधिक मजदूर सुरंग के अंदर फंस गए थे, जिनमें से 16 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
बचाए गए श्रमिकों को इलाज के लिए कहां ले जाया गया है?
बचाए गए श्रमिकों को चिकित्सीय परीक्षण और इलाज के लिए गोपेश्वर के जिला अस्पताल ले जाया जा रहा है।
क्या चमोली की सुरंगों में पहले भी ऐसा कोई हादसा हुआ है?
हां, पिछले साल दिसंबर महीने में चमोली में टनल के अंदर दो लोको ट्रेनें टकराने से एक बड़ा हादसा हुआ था जिसमें 70 लोग घायल हुए थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

यह घटना पहाड़ी क्षेत्रों में ढांचागत परियोजनाओं के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़े पालन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। बार-बार हो रहे ऐसे हादसों के मद्देनजर यह जरूरी है कि निर्माण स्थलों पर भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र की गहन न्यायिक व प्रशासनिक जांच हो ताकि भविष्य में ऐसे जोखिमों को रोका जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·45 मिनट पहले

यह हादसा एक बार फिर पर्वतीय क्षेत्रों में चल रहे बड़े बुनियादी ढांचा विकास कार्यों में सुरक्षा और पर्यावरणीय संवेदनशीलता के बीच संतुलन पर सवाल खड़े करता है। पूर्व की घटनाओं के बावजूद इस तरह के जोखिम सामने आना निर्माण स्थलों पर निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रशासनिक और तकनीकी सवाल छोड़ जाता है।

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