स्मार्ट फिटनेस बैंड की सबसे बड़ी खासियत यह मानी जाती है कि यह पारंपरिक घड़ी की तरह नहीं होता और न ही इसे हमेशा घड़ी की तरह पहनने की मजबूरी होनी चाहिए। हुप जैसी कंपनियों ने बाइसेप बैंड और अलग-अलग हिस्सों पर पहने जाने वाले परिधानों के जरिए इस सोच को पहले ही साबित किया है। दूसरी ओर, गूगल ने अपने स्क्रीनलेस ट्रैकर फिटबिट एयर के लिए आधिकारिक तौर पर कोई अलग बाइसेप बैंड पेश नहीं किया है। इस कमी को पूरा करने के लिए कई यूजर्स अब अपनी कलाई से ट्रैकर को हटाकर टेप की मदद से सीधे अपनी बांह पर चिपकाने का अनूठा तरीका अपना रहे हैं।
कलाई से हटाकर बांह पर ट्रैकर लगाने की जरूरत क्यों पड़ी
फिटबिट एयर से पट्टा हटाकर केवल मुख्य सेंसर वाले हिस्से को शरीर के किसी अन्य अंग पर चिपकाने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कलाई पूरी तरह मुक्त हो जाती है। भारी वजन उठाने, केतलबेल वर्कआउट करने या रिस्ट रैप बांधते समय कलाई पर मौजूद कोई भी गैजेट बार-बार टकराता है और परेशानी खड़ी करता है। इसके अलावा किसी भी तरह के कपड़े, लंबी आस्तीन या मनपसंद एक्सेसरीज पहनते समय कलाई पर बंधा ट्रैकर लुक और आराम दोनों में रुकावट डालता है। कई लोग वर्कआउट या रोजमर्रा के कामों में यह भूल जाना चाहते हैं कि उन्होंने शरीर पर कोई गैजेट भी बांध रखा है।
कौन सा टेप टिकाऊ रहता है और क्यों केटी टेप से बेहतर हैं ओवरपैच
इस अनूठे प्रयोग के लिए लोग कई तरह के चिपकने वाले विकल्पों का इस्तेमाल कर रहे हैं। कई खिलाड़ी आमतौर पर जोड़ों या मांसपेशियों को सहारा देने के लिए एथलेटिक टेप, मेडिकल टेप या केटी टेप का सहारा लेते हैं। हालांकि, जब बात बहुत पसीने वाले कड़े वर्कआउट और उसके बाद नहाने की आती है, तो केटी टेप जैसी चीजें महज एक दिन में ही उखड़ने लगती हैं। इसकी मुख्य वजह यह है कि बड़े पट्टे की तुलना में फिटबिट एयर के छोटे आकार के लिए काटा गया छोटा टेप शरीर पर ज्यादा देर तक अपनी पकड़ बनाए रखने में संघर्ष करता है।
इस काम के लिए सबसे असरदार और टिकाऊ समाधान कंटीन्यूअस ग्लूकोज मॉनिटर यानी सीजीएम के लिए आने वाला ओवरपैच माना जाता है। सीजीएम एक छोटा प्लास्टिक उपकरण होता है जिसे आमतौर पर ऊपरी बांह के पिछले हिस्से पर त्वचा में फिलामेंट चुभोकर लगाया जाता है, जिसे सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा चिपकने वाला पैच यानी ओवरपैच ऊपर से लगाया जाता है। यह ओवरपैच आम तौर पर दो हफ्तों तक त्वचा से मजबूती से चिपका रहता है, जबकि फिटबिट एयर की बैटरी लगभग 7 दिन तक चलती है। ऐसे में कड़े पसीने वाले व्यायाम और नहाने के दौरान भी यह ओवरपैच ट्रैकर को हिलने नहीं देता।
हार्ट रेट और एक्टिविटी ट्रैकिंग पर क्या पड़ता है असर
जब फिटबिट एयर को ओवरपैच के साथ बांह के पिछले हिस्से पर चिपकाकर दौड़ने जैसे व्यायाम किए जाते हैं, तो डिवाइस त्वचा से बेहद मजबूती से सटी रहती है। चिपकने वाला पैच सेंसर और त्वचा के बीच बाहरी रोशनी को पूरी तरह रोक देता है, जिससे सटीक रीडिंग लेने में मदद मिलती है। कई मामलों में बांह पर चिपकाए गए सेंसर से मिलने वाला हार्ट रेट डेटा अन्य तुलनात्मक फिटनेस उपकरणों के डेटा से पूरी तरह मेल खाता है।
हालांकि, शरीर के हर हिस्से पर हार्ट रेट की रीडिंग एक जैसी नहीं आती क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर में रक्त वाहिकाओं की बनावट और गहराई अलग होती है। इसके अलावा सबसे बड़ी चुनौती एक्टिविटी ऑटो-डिटेक्शन में आती है। फिटबिट को सॉफ्टवेयर के स्तर पर इस तरह डिजाइन किया गया है कि वह कलाई की हरकतों को देखकर रनिंग या एक्सरसाइज की पहचान करता है। बांह का ऊपरी हिस्सा कलाई की तरह तेजी से नहीं हिलता, इसलिए डिवाइस अपने आप जॉगिंग या वर्कआउट को पकड़ नहीं पाती। ऐसे में उपयोगकर्ता को ऐप या ट्रैकर के जरिए कसरत की ट्रैकिंग खुद मैन्युअली शुरू करनी पड़ती है।
चिपकाने के तरीके की मुश्किलें, दर्द और अतिरिक्त खर्च
इस पूरे प्रयोग में कुछ व्यावहारिक दिक्कतें भी सामने आती हैं। सबसे पहली समस्या डिवाइस को चार्ज करने के समय आती है। फिटबिट एयर की बैटरी जहां लगभग एक हफ्ते चलती है, वहीं सीजीएम ओवरपैच दो हफ्तों तक टिकने के हिसाब से बने होते हैं और उनका गोंद बहुत ज्यादा मजबूत होता है। ऐसे में हर हफ्ते चार्जिंग के लिए पैच को त्वचा से खींचकर हटाना काफी दर्दनाक और मुश्किल भरा हो सकता है। इसे आसान बनाने के लिए गर्म पानी के शॉवर में नहाते समय उतारने की सलाह दी जाती है, जिससे गोंद ढीला पड़ जाता है।
दूसरी बड़ी परेशानी अतिरिक्त खर्च की है। हर हफ्ते नया ओवरपैच खरीदकर लगाना जेब पर भारी पड़ सकता है। फिर भी उन फिटनेस प्रेमियों के लिए यह एक आजमाने लायक तरीका है जो कलाई पर कुछ भी बांधना बिल्कुल पसंद नहीं करते या किसी खास खेल अथवा आयोजन के दौरान कलाई को पूरी तरह खाली रखना चाहते हैं।



















