देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के बैंक, एचडीएफसी बैंक के शेयरों में मंगलवार, 15 सितंबर के सुबह के कारोबार में 2 प्रतिशत से अधिक की उछाल दर्ज की गई। शेयर बाजार में यह तेजी उस समय देखने को मिली जब बैंक के अगले प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की तलाश अपने सबसे निर्णायक पड़ाव पर पहुंच गई। संस्थागत और खुदरा दोनों तरह के निवेशक बैंक के शीर्ष नेतृत्व में होने वाले बदलाव को लेकर काफी समय से स्पष्टता का इंतजार कर रहे थे। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) को विचार के लिए दो नाम भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद बाजार सहभागियों का भरोसा मजबूत हुआ, जिससे कारोबारी सत्र की शुरुआत में ही खरीदारी का रुझान बना।
सुबह के सत्र में शेयर भाव और बाजार का प्रदर्शन
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर सुबह 9:22 बजे एचडीएफसी बैंक के शेयर 727.05 रुपये पर कारोबार कर रहे थे, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 18.80 रुपये या 2.65 प्रतिशत की मजबूती दर्शा रहे थे। दिन के कारोबार की शुरुआत 722.40 रुपये के स्तर पर हुई थी। शुरुआती सत्र में ही लिवाली के दम पर यह शेयर 730.75 रुपये के इंट्राडे उच्च स्तर तक पहुंचा, जबकि सत्र का निचला स्तर 722.30 रुपये रहा। शेयर की कीमतों में आई यह सकारात्मक हलचल दर्शाती है कि शीर्ष पद के उत्तराधिकार को लेकर अनिश्चितता के बादल छंटने को बाजार बेहद सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
शीर्ष पद की दौड़ में शामिल दो प्रमुख चेहरे
बैंक के नए प्रमुख की तलाश अब वित्तीय सेवा क्षेत्र के दो अत्यंत अनुभवी दिग्गजों के बीच केंद्रित हो गई है। इनमें से एक आंतरिक उम्मीदवार हैं जबकि दूसरे बाहरी संस्थान से आते हैं। उप प्रबंध निदेशक कैज़ाद भरूचा इस दौड़ में बैंक के आंतरिक चेहरे के रूप में सामने आए हैं। वहीं आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनूप बागची को बाहरी दावेदार के तौर पर शामिल किया गया है। दोनों ही पेशेवरों का भारतीय बैंकिंग और व्यापक वित्तीय परिदृश्य में लंबा और विशिष्ट ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, जिससे चयन समिति के पास दोनों तरह के रणनीतिक विकल्प उपलब्ध हैं।
शशिधर जगदीशन का कार्यकाल और उत्तराधिकार योजना
एचडीएफसी बैंक के नेतृत्व में बदलाव की चर्चा इसलिए भी जोर पकड़ रही है क्योंकि वर्तमान एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन अपने दूसरे कार्यकाल के अंतिम चरण में हैं। उनका मौजूदा कार्यकाल 26 अक्टूबर, 2026 को समाप्त होने जा रहा है, और उन्होंने अगले कार्यकाल के लिए दावेदारी न करने का फैसला किया है। इससे पहले बैंक ने शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक सूचना में पुष्टि की थी कि उसके निदेशक मंडल ने प्राथमिकता के क्रम में तीन साल के कार्यकाल के लिए दो उम्मीदवारों के नाम रिज़र्व बैंक को अनुशंसित कर दिए हैं। यद्यपि नियामक फाइलिंग में अधिकृत रूप से उम्मीदवारों के नामों की घोषणा नहीं की गई थी, लेकिन घटनाक्रम की जानकारी रखने वाले सूत्रों ने भरूचा और बागची के नाम सामने रखे हैं।
कैज़ाद भरूचा का अनुभव और निरंतरता का पहलू
कैज़ाद भरूचा का नाम एचडीएफसी बैंक के भीतर निरंतरता और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। वह साल 1995 से इस ऋणदाता संस्थान से जुड़े हुए हैं और उन्होंने बैंक के विकास को काफी करीब से देखा और गढ़ा है। अपने तीन दशक के लंबे जुड़ाव के दौरान भरूचा ने होलसेल बैंकिंग, रिटेल बैंकिंग, क्रेडिट, जोखिम प्रबंधन और परिसंपत्ति से जुड़े प्रमुख कारोबारों में अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं। बैंक की कार्यप्रणाली, शाखा नेटवर्क और आंतरिक प्रक्रियाओं पर उनकी गहरी पकड़ है। हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) के विलय के बाद उपजी परिचालन और वित्तीय चुनौतियों को संभालने के लिहाज से एक आंतरिक नियुक्ति बैंक के लिए स्थिरता का बड़ा आधार बन सकती है।
अनूप बागची का प्रोफाइल और बाहरी दृष्टिकोण
दूसरी तरफ अनूप बागची उत्तराधिकार की इस प्रक्रिया में एक बिल्कुल अलग नजरिया लेकर आते हैं। वर्तमान में वह आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ का पद संभाल रहे हैं, और इससे पहले उन्होंने आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की कमान भी संभाली है। बागची का अनुभव कोर बैंकिंग, पूंजी बाजार, बीमा और विविध वित्तीय सेवाओं में फैला हुआ है। यदि नियामक और निदेशक मंडल उनके नाम पर मुहर लगाते हैं, तो वह एचडीएफसी बैंक के संचालन में एक नया और बाहरी दृष्टिकोण ला सकते हैं। विलय के बाद के इस दौर में, जब बैंक विकास को रफ्तार देने, जमा राशि बढ़ाने और लाभप्रदता सुधारने पर केंद्रित है, बागची की रणनीति बैंक के लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
विलय के बाद की चुनौतियां और रिज़र्व बैंक की मंजूरी
एचडीएफसी बैंक के लिए यह नेतृत्व परिवर्तन अत्यंत संवेदनशील मोड़ पर आ रहा है। एचडीएफसी लिमिटेड के साथ हुए ऐतिहासिक विलय ने एक विशाल वित्तीय संस्थान का निर्माण किया, लेकिन साथ ही जमा विस्तार, मार्जिन दबाव और रिटर्न अनुपातों से जुड़ी जटिल चुनौतियां भी खड़ी कीं। नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी को न केवल इस वृहद आकार के कारोबार की बागडोर संभालनी होगी, बल्कि बैंक के वित्तीय प्रदर्शन को और मजबूत करने का भारी काम भी करना होगा। अब इस शेयर के लिए अगला सबसे बड़ा घटनाक्रम बैंकिंग नियामक का फैसला होगा। भारतीय रिज़र्व बैंक दोनों उम्मीदवारों की समीक्षा और मूल्यांकन करने के बाद ही अंतिम नियुक्ति को अपनी औपचारिक स्वीकृति प्रदान करेगा।


















