अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में बहुमूल्य धातुओं पर दबाव गहराता जा रहा है, जहां चांदी के भाव में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान चांदी 63.20 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के इर्द-गिर्द कारोबार करती देखी गई। ऊर्जा बाजारों में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है, जिसके चलते अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को और अधिक सख्त किए जाने की उम्मीदें काफी मजबूत हो गई हैं। किसी भी ब्याज आय की पेशकश न करने वाली संपत्तियों के लिए ब्याज दरों में वृद्धि का माहौल आमतौर पर प्रतिकूल साबित होता है, और यही वजह है कि चांदी बिकवाली के दबाव में आ गई है।
मुद्रास्फीति के आंकड़ों और फेडरल रिजर्व की सख्ती से बदला परिदृश्य
बाजार में ब्याज दरों को लेकर आए इस बदलाव की मुख्य वजह हालिया आर्थिक आंकड़े और ऊर्जा लागत में उछाल है। ऊर्जा उत्पादों के महंगे होने से महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे फेडरल रिजर्व पर नीतिगत दरों को ऊपर उठाने का दबाव बढ़ा है। शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज के सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजारों में फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दर बढ़ाने की संभावना बढ़कर 92 प्रतिशत से अधिक हो गई है। यह आंकड़ा महज एक सप्ताह पहले लगभग 60 प्रतिशत के आसपास था, जिससे स्पष्ट होता है कि निवेशकों की धारणा में कितनी तेजी से बदलाव आया है।
शुक्रवार को जारी आर्थिक आंकड़ों ने भी इन उम्मीदों को बल दिया, जब अगस्त महीने के लिए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक में बढ़ोतरी देखी गई। विशेष रूप से कोर मुद्रास्फीति में पिछले चार महीनों की सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई। मुद्रास्फीति की इन व्यापक चिंताओं और राजकोषीय दबावों के बीच अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड 5 प्रतिशत के स्तर के करीब पहुंच गई। जब सरकारी बॉन्ड आकर्षक यील्ड की पेशकश करने लगते हैं, तो बिना ब्याज वाली संपत्तियां जैसे कि चांदी और सोना निवेशकों के लिए तुलनात्मक रूप से कम आकर्षक हो जाती हैं, जिससे इन पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है।
व्यवस्थित कोषों की स्थिति और बाजार का प्रवाह
टीडी सिक्योरिटीज के ताजा सीटीए ट्रैकर के अनुसार, रुझानों का अनुसरण करने वाले फंड्स के पास फिलहाल चांदी में मामूली लॉन्ग पोजीशन का अनुमान है। यह स्थिति आने वाले दिनों में कीमतों की दिशा के आधार पर फंड्स को अपनी रणनीति में बदलाव करने की पर्याप्त गुंजाइश प्रदान करती है। वित्तीय संस्थान के परिदृश्य विश्लेषण में कई संभावनाओं को रेखांकित किया गया है, जिनमें तेज गिरावट का दौर, मध्यम स्तर का मंदी का रुख और सपाट बाजार शामिल हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि यदि आने वाले महीनों में धातु में तेज बिकवाली आती है, कीमतें धीरे-धीरे फिसलती हैं, या फिर बाजार सीमित दायरे में कारोबार करता है, तो व्यवस्थित निवेश प्रवाह में व्यापक भिन्नता आ सकती है।
मूल्य संचय और पोर्टफोलियो विविधीकरण का साधन
ऐतिहासिक रूप से चांदी को मूल्य संचय और विनिमय के एक भरोसेमंद माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता रहा है। निवेशकों के बीच इसका व्यापक स्तर पर कारोबार होता है। हालांकि सोने की तुलना में इसका दायरा अलग है, लेकिन निवेशक अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने, इसके अंतर्निहित मूल्य का लाभ उठाने और उच्च मुद्रास्फीति के दौर में बचाव के साधन के रूप में चांदी का रुख करते हैं। बाजार में सहभागिता करने वाले लोग भौतिक रूप से चांदी के सिक्के या सिल्लियां खरीद सकते हैं, या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजारों में इसके भाव पर नजर रखने वाले एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स जैसे वित्तीय माध्यमों से कारोबार कर सकते हैं।
चांदी के भाव कई बुनियादी कारकों के आधार पर तय होते हैं। भू-राजनीतिक अस्थिरता या गहरी आर्थिक मंदी की आशंकाएं चांदी के सुरक्षित निवेश वाले दर्जे के कारण इसके भाव को ऊपर ले जा सकती हैं, यद्यपि यह प्रभाव सोने जितना तीव्र नहीं होता। गैर-उपज वाली धातु होने के कारण कम ब्याज दरों के माहौल में चांदी मजबूत होती है। इसके अलावा, इसका मूल्य अमेरिकी डॉलर में आंका जाता है, जिसे वित्तीय बाजारों में एक्सएजी/यूएसडी के रूप में दर्शाया जाता है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती चांदी की कीमतों पर अंकुश लगाती है, जबकि डॉलर के कमजोर होने पर चांदी की कीमतों में तेजी आने की संभावना बढ़ जाती है। खनन से होने वाली आपूर्ति, पुनर्चक्रण की दर और वैश्विक निवेश मांग भी इसके भाव तय करने में अहम भूमिका निभाती है। पृथ्वी के भूगर्भ में सोने की तुलना में चांदी कहीं अधिक प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।
औद्योगिक अनुप्रयोग और वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं का असर
बहुमूल्य धातु होने के साथ-साथ चांदी का एक बड़ा हिस्सा औद्योगिक उपयोग में जाता है। सभी धातुओं में चांदी की विद्युत चालकता सबसे अधिक होती है, जो तांबे और सोने से भी बेहतर है। इसी कारण इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और सौर ऊर्जा उपकरणों में इसका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। जब औद्योगिक क्षेत्रों से मांग में उछाल आता है तो इसकी कीमतें चढ़ती हैं, वहीं औद्योगिक सुस्ती इसके भाव को नीचे खींच सकती है।
विश्व की तीन प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं, अमेरिका, चीन और भारत, चांदी के वैश्विक बाजार को गहराई से प्रभावित करती हैं। अमेरिका और विशेषकर चीन के विशाल औद्योगिक क्षेत्र विभिन्न विनिर्माण प्रक्रियाओं के लिए चांदी पर काफी निर्भर हैं। दूसरी तरफ, भारत में आभूषणों और व्यक्तिगत उपयोग के लिए उपभोक्ताओं की मांग इस धातु के अंतरराष्ट्रीय मूल्य निर्धारण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक मानी जाती है।
सोने के साथ संबंध और गोल्ड-सिल्वर अनुपात
चांदी की चाल आमतौर पर सोने के रुख का अनुसरण करती है। जब सोने की कीमतों में तेजी आती है, तो सुरक्षित निवेश का समान दर्जा होने की वजह से चांदी में भी बढ़त देखी जाती है। दोनों धातुओं के सापेक्ष मूल्यांकन को समझने के लिए बाजार विश्लेषक गोल्ड-सिल्वर अनुपात का उपयोग करते हैं। यह अनुपात दर्शाता है कि एक औंस सोने के मूल्य के बराबर पहुंचने के लिए चांदी के कितने औंस की आवश्यकता होगी।
जब यह अनुपात ऐतिहासिक स्तरों से काफी ऊपर चला जाता है, तो कई निवेशक इसे इस बात का संकेत मानते हैं कि सोने की तुलना में चांदी अवमूल्यित है, अथवा सोने का मूल्यांकन अधिक हो चुका है। इसके विपरीत, यदि यह अनुपात नीचे आता है, तो यह माना जा सकता है कि चांदी के मुकाबले सोना अपेक्षाकृत सस्ता है।
मुद्रा बाजारों और अन्य जिंसों का ताजा रुख
वित्तीय बाजारों में इस व्यापक घटनाक्रम का असर अन्य संपत्तियों पर भी देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले दबाव में रहा, जहां एशियाई सत्र में एयूडी/यूएसडी 0.7150 के नीचे बना रहा, जो पिछले दिन छुए गए तीन सप्ताह से अधिक के निचले स्तर के करीब है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक से पहले अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर के करीब रहने और तेल जनित मुद्रास्फीति जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को मजबूती प्रदान की। चीन की अगस्त महीने की मिली-जुली आर्थिक गतिविधियों के आंकड़े भी ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा देने में विफल रहे।
उधर यूएसडी/जेपीवाई की जोड़ी मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 155.00 की दिशा में ऊपर बढ़ती दिखाई दी। व्यापारी इस सप्ताह होने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी और बैंक ऑफ जापान की बैठकों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। फेड द्वारा दरों में वृद्धि के दांव अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर को मजबूती दे रहे हैं, हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा नीतिगत सामान्यीकरण के संभावित कदमों ने जापानी येन को कुछ सहारा दिया है, जिससे इस जोड़ी की बढ़त सीमित रह सकती है।
सोने की बात करें तो मंगलवार के एशियाई सत्र में इसने 4,300 डॉलर के स्तर को दोबारा हासिल किया, लेकिन यह पिछले दिन छुए गए एक महीने के निचले स्तर के समीप संवेदनशील बना रहा। फेडरल रिजर्व की दर वृद्धि की संभावनाओं और मुद्रास्फीति की चिंताओं के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई है, जिससे डॉलर को ताकत और सर्राफा को कमजोरी मिल रही है। बाजार के मंदड़िए बुधवार को आने वाले फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की दो दिवसीय बैठक के नतीजों से पहले नए सौदे करने से बचते दिख रहे हैं। वहीं ऊर्जा मोर्चे पर वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट कच्चे तेल की कीमतें लगातार दूसरे दिन चढ़कर एशियाई घंटों में लगभग 98.60 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं, क्योंकि वैश्विक आपूर्ति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच व्यापारी सतर्कता बरत रहे हैं।



















