अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक टकराव और आपूर्ति संकट की आशंकाओं के चलते कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे दिन तेजी का रुख देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई के भाव में नए सिरे से लिवाली देखी गई। मंगलवार को एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह कमोडिटी पिछले दिन के उतार-चढ़ाव से उबरते हुए एक बार फिर 99.00 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण आंकड़े को पार कर गई। यह उछाल 21 मई के बाद के सबसे ऊंचे स्तरों के करीब बना हुआ है, जिसे पिछले शुक्रवार को छुआ गया था। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि इस क्षेत्र में सप्लाई को लेकर चिंताएं जितनी गंभीर होंगी, तेल की कीमतों में तेजी का यह रुख उतना ही मजबूत बना रहेगा।
सऊदी अरब पर ताजा हमला और तेहरान के कड़े तेवर
मध्य पूर्व के संघर्ष में हालिया घटनाक्रमों ने शांति वार्ताओं की संभावनाओं को गहरा झटका दिया है। यमन में सक्रिय और ईरान समर्थित हौथी लड़ाकों ने सोमवार को सऊदी अरब के खमीस मुशायत स्थित एक एयर बेस को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इस बड़े हमले ने ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख रणनीतिक मार्गों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसके साथ ही राजनयिक स्तर पर भी गतिरोध टूटता नहीं दिख रहा है।
दूसरी तरफ, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी मोहसिन रजाई ने अमेरिका के साथ किसी भी तत्काल बातचीत की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया। मोहसिन रजाई ने स्पष्ट किया कि तेहरान तब तक वार्ता की मेज पर वापस नहीं लौटेगा जब तक कि उसकी सभी पूर्व शर्तें पूरी नहीं हो जातीं। बातचीत की गुंजाइश खत्म होने से युद्ध समाप्ति के कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें कमजोर पड़ गई हैं। इस राजनीतिक अनिश्चितता ने ऊर्जा बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को पूरी तरह सक्रिय रखा हुआ है, जिससे क्रूड की कीमतों को सीधा सहारा मिल रहा है।
चार्ट पर तकनीकी मजबूती और प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर
तकनीकी विश्लेषण के नजरिए से देखें तो डब्ल्यूटीआई के भाव ने हाल ही में 91.00 डॉलर के मजबूत हॉरिजॉन्टल बैरियर को पार किया है। यह स्तर मई से जुलाई के बीच आई सुधारात्मक गिरावट का 61.8% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल भी था। इस स्तर से ऊपर का ब्रेकआउट तेजी के कारोबारियों के लिए नया खरीदारी ट्रिगर साबित हुआ है। तकनीकी गति पूरी तरह सकारात्मक बनी हुई है, जहां रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी आरएसआई 69 के आसपास मंडरा रहा है, जो कि ओवरबॉट जोन के ठीक नीचे का स्तर है। इसके अलावा मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस यानी एमएसीडी इंडिकेटर भी लगातार पॉजिटिव क्षेत्र में बना हुआ है। जब तक कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर के ऊपरी दायरे में टिकी रहती हैं, तब तक बाजार में तेजी का दबाव हावी रहेगा।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो अगला बड़ा रेजिस्टेंस पूर्व चक्र के 107.23 डॉलर के उच्च स्तर के करीब दिखाई दे रहा है। जब तक यह स्तर निर्णायक रूप से पार नहीं होता, तब तक यह तात्कालिक बढ़त को सीमित कर सकता है। वहीं गिरावट की स्थिति में शुरुआती सपोर्ट 78.6% रिट्रेसमेंट स्तर 98.57 डॉलर के पास मौजूद है। इसके नीचे 61.8% का स्तर 91.78 डॉलर पर और 50% रिट्रेसमेंट 87.01 डॉलर पर आता है। यदि बिकवाली और गहरी होती है, तो 100-दिवसीय एसएमए 85.39 डॉलर के आसपास सहारा देगा। इसके बाद 82.24 डॉलर और 76.33 डॉलर के फाइबोनैचि स्तर अतिरिक्त मांग क्षेत्र बनाएंगे, जबकि चक्र का सबसे निचला स्तर 66.79 डॉलर पर स्थित है।
लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, कच्चे तेल का लाइव भाव 100.30 डॉलर पर दर्ज हुआ है, जो पिछले बंद 101.91 डॉलर से 1.58% नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 54.98 डॉलर से 119.48 डॉलर का है और ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत का 0.88 गुना रहा। लाइव 14-दिवसीय आरएसआई 64 पर है तथा एमएसीडी 5.12 पर है जो 4.34 के सिग्नल से ऊपर रहते हुए 0.78 का बुलिश हिस्टोग्राम दिखा रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 94.81 डॉलर, 50-दिवसीय ईएमए 89.11 डॉलर और 200-दिवसीय ईएमए 79.29 डॉलर पर है, जबकि 50-दिवसीय एसएमए 86.40 डॉलर और 200-दिवसीय एसएमए 80.68 डॉलर पर दर्ज है। ईएमए50 के ईएमए200 से ऊपर होने के कारण लॉन्ग-टर्म गोल्डन क्रॉस बना हुआ है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड्स 77.45 डॉलर से 108.23 डॉलर के बीच हैं, ट्रेंड की ताकत दर्शाने वाला एडीएक्स 34 पर है, और स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 72 व सिग्नल लाइन 78 पर है। 14-दिवसीय एटीआर 4.27 डॉलर है, जबकि पिवट 100.99 डॉलर पर है। ऊपर की तरफ आर1 102.79 डॉलर और आर2 105.28 डॉलर पर है, जबकि नीचे एस1 98.50 डॉलर और एस2 96.70 डॉलर पर स्थित है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट और इसके बुनियादी चालक
डब्ल्यूटीआई अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में सबसे सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाली किस्मों में से एक है। इसका पूरा नाम वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट है, जो ब्रेंट और दुबई क्रूड के साथ दुनिया के तीन प्रमुख तेल बेंचमार्क में गिना जाता है। अपने कम घनत्व और कम सल्फर की वजह से इसे लाइट और स्वीट क्रूड भी कहा जाता है। यह उच्च गुणवत्ता वाला तेल माना जाता है, जिससे गैसोलीन और डीजल जैसी चीजें बहुत आसानी से रिफाइन की जा सकती हैं। इसका उत्पादन मुख्य रूप से अमेरिका में होता है और वितरण कुशिंग हब के माध्यम से किया जाता है, जिसे दुनिया के पाइपलाइन चौराहे के नाम से जाना जाता है। वैश्विक मीडिया और वित्तीय विश्लेषकों द्वारा इसी के भाव को अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों के पैमाने के रूप में सबसे अधिक उद्धृत किया जाता है।
अन्य कमोडिटीज की तरह डब्ल्यूटीआई की कीमतें भी सीधे तौर पर आपूर्ति और मांग के समीकरण पर निर्भर करती हैं। दुनिया की आर्थिक वृद्धि में तेजी आने से ऊर्जा की मांग बढ़ती है, जो कीमतों को ऊपर खींचती है, जबकि सुस्त विकास मांग घटाकर दामों को गिरा देता है। राजनीतिक संकट, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति को बाधित करके कीमतों में अचानक बड़ा उछाल ला सकते हैं। इसके अलावा ओपेक के फैसले भी इस बाजार को दिशा देते हैं। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का ज्यादातर कारोबार अमेरिकी डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती और कमजोरी का भी तेल पर गहरा असर पड़ता है। डॉलर कमजोर होने पर तेल अन्य देशों की मुद्राओं के लिए सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है, और इसके विपरीत मजबूत डॉलर तेल की मांग को धीमा कर सकता है।
इन्वेंट्री रिपोर्ट्स और ओपेक की नीतियां
कच्चे तेल की कीमतों पर अमेरिकी पेट्रोलियम संस्थान यानी एपीआई और एनर्जी इंफॉर्मेशन एजेंसी यानी ईआईए की साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्ट का सीधा असर होता है। इन भंडारों में बदलाव मांग और आपूर्ति के वास्तविक संतुलन को दर्शाते हैं। यदि रिपोर्ट में भंडार घटने की बात सामने आती है, तो यह मजबूत मांग का संकेत होता है और कीमतों को ऊपर धकेलता है। इसके विपरीत, बढ़ते भंडार अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत देकर कीमतों पर दबाव बनाते हैं। एपीआई अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि ईआईए का आधिकारिक डेटा बुधवार को आता है। दोनों रिपोर्टों के आंकड़े 75% मामलों में 1% के अंतर के भीतर काफी हद तक एक जैसे होते हैं, हालांकि सरकारी एजेंसी होने के कारण ईआईए के आंकड़ों को अधिक विश्वसनीय माना जाता है।
इसके साथ ही ओपेक, जो 12 तेल उत्पादक देशों का एक समूह है, साल में दो बार होने वाली बैठकों में उत्पादन कोटे का निर्धारण करता है। जब यह संगठन कोटे में कटौती करता है, तो बाजार में आपूर्ति कम हो जाती है और कीमतें बढ़ जाती हैं। उत्पादन बढ़ाने पर इसका उलटा असर दिखता है। ओपेक प्लस इसी का एक विस्तारित रूप है जिसमें रूस सहित दस गैर-ओपेक उत्पादक देश शामिल हैं, जो उत्पादन को नियंत्रित कर कीमतों को संतुलित रखने का प्रयास करते हैं।
मुद्रा, सोना और क्रिप्टो बाजार पर इसका असर
ऊर्जा संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर अन्य वित्तीय संपत्तियों पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार को एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7150 से नीचे कमजोर बना रहा, जो पिछले दिन के तीन हफ्ते के निचले स्तर के करीब है। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी यानी एफओएमसी की बैठक से पहले और तेल की वजह से बढ़ती महंगाई के जोखिमों के चलते अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर टिकी हुई है, जिससे अमेरिकी डॉलर को समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर अगस्त महीने के चीन के मिले-जुले आर्थिक आंकड़ों ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई मदद नहीं पहुंचाई।
इसी तरह यूएसडी/जेपीवाई 155.00 के स्तर की ओर लगातार बढ़ रहा है। निवेशक इस सप्ताह होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठकों के नतीजों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। अमेरिकी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं और तेल से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव ने डॉलर को मजबूत बना रखा है। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की आक्रामक संभावना जापानी येन को सहारा देकर इस जोड़ी की बढ़त को सीमित कर सकती है। सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने ने मंगलवार तड़के 4,300 डॉलर का स्तर दोबारा छूने की कोशिश की, जो 4,250 डॉलर के छह हफ्ते के निचले स्तर से मामूली सुधार दर्शाता है। उधर क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन मंगलवार को 78,000 डॉलर के आसपास स्थिर रहा, जिसने पिछले दिन के 2% सुधार को बरकरार रखा है। क्रिप्टो बाजार में यह हलचल मंगलवार को होने वाले क्लैरिटी एक्ट क्लोजर वोट से पहले देखने को मिल रही है, जिसमें जीकैश और स्टेलर पिछले 24 घंटों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले टोकन बनकर उभरे हैं।


















