विदेश घूमने की तैयारी में ज़्यादातर भारतीय यात्री टिकट और होटल बुकिंग पर तो पूरा ध्यान लगाते हैं, लेकिन बजट को चुपचाप कमज़ोर करने वाले छुपे खर्चों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। वीज़ा प्रोसेसिंग फीस, करेंसी एक्सचेंज का मार्कअप और टैक्स के नए नियम मिलकर हज़ारों रुपए उड़ा सकते हैं, जो आप अपनी मंज़िल पर बेहतर तरीके से खर्च कर सकते थे। इन झटकों से बचने की शुरुआत सही जानकारी से होती है।
वीज़ा फीस में दूतावास चार्ज से आगे भी है खर्च
वीज़ा का बजट बनाते समय ज़्यादातर लोग सिर्फ दूतावास की आधिकारिक फीस जोड़ते हैं, लेकिन वास्तव में खर्च यहीं नहीं रुकता। वीएफएस ग्लोबल जैसी सेवा कंपनियाँ कई देशों के वीज़ा आवेदन प्रोसेस करती हैं और इस पर अपनी अलग सर्विस फीस भी वसूलती हैं। यात्रा तय करने से पहले यह जाँच लें कि उस देश में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा है या नहीं, क्योंकि इससे समय और पैसे दोनों बच सकते हैं। फीस की सटीक जानकारी के लिए हमेशा दूतावास की आधिकारिक वेबसाइट ही देखें, ट्रैवल एजेंट कई बार बढ़ा-चढ़ाकर रकम बताते हैं।
एयरपोर्ट के करेंसी काउंटर से बचना ही समझदारी है
एयरपोर्ट पर मौजूद करेंसी एक्सचेंज काउंटर देखने में सुविधाजनक लगते हैं, लेकिन यह सुविधा बहुत महंगी पड़ती है। ये काउंटर असल बाज़ार दर से दस से पंद्रह प्रतिशत कम रेट देते हैं, यानी हवाई अड्डे पर पहुँचते ही आप अपने बजट का एक बड़ा हिस्सा गँवा बैठते हैं। इसके बजाय अपने प्राइमरी बैंक या किसी सरकार-अधिकृत लोकल मनी चेंजर से करेंसी लेना कहीं बेहतर है, क्योंकि वे बाज़ार दर के काफी करीब रेट देते हैं। अगर यात्रा से कम से कम एक हफ्ते पहले विदेशी मुद्रा का इंतज़ाम कर लें, तो हज़ारों रुपए आसानी से बच सकते हैं।
फॉरेक्स कार्ड है समझदार यात्री की पहली पसंद
प्रीपेड फॉरेक्स कार्ड विदेश में पैसे खर्च करने के सबसे किफायती और सुरक्षित तरीकों में से एक है। जिस दिन आप इसे लोड करते हैं, उसी दिन की एक्सचेंज रेट लॉक हो जाती है, और उसके बाद बाज़ार में कितना भी उतार-चढ़ाव हो, आपके बजट पर कोई असर नहीं पड़ता। यह स्थिरता इसे नकदी ले जाने से बेहतर बनाती है। हालांकि थोड़ी लोकल करेंसी हमेशा साथ रखें, खासकर टिप देने या सड़क किनारे के खाने के ठेलों पर खरीदारी के लिए, जहाँ कार्ड स्वीकार नहीं होते।
LRS और TCS के नियम हर यात्री को समझने चाहिए
लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भारतीय नागरिक एक वित्त वर्ष में अधिकतम 2,50,000 अमेरिकी डॉलर विदेश में खर्च या ट्रांसफर कर सकते हैं। लेकिन अब सरकार ने विदेशी खर्चों पर टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) भी लागू कर दिया है। एक साल में विदेश यात्रा पर सात लाख रुपए से ज़्यादा खर्च होने पर बीस प्रतिशत TCS काटा जाता है। यह रकम डूबती नहीं है, बल्कि सालाना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करके इसे वापस पाया जा सकता है। फिर भी, इस अस्थायी कटौती को ध्यान में रखते हुए कैश फ्लो की योजना पहले से बना लेना बुद्धिमानी है।
भुगतान का सही संतुलन बनाएँ, हर रुपए की वैल्यू बढ़ाएँ
विदेश में सबसे समझदारी यही है कि लोड किए हुए फॉरेक्स कार्ड के साथ थोड़ी नकदी भी साथ रखी जाए। अपना भारतीय क्रेडिट कार्ड सीधे विदेशी खरीदारी के लिए इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि ज़्यादातर बैंक हर लेनदेन पर फॉरेन ट्रांज़ेक्शन फीस लगाते हैं जो पूरी यात्रा में जुड़ते-जुड़ते बड़ी रकम बन जाती है। यात्रा से पहले अपने संभावित खर्चों का अंदाज़ा लगाएँ और हर ज़रूरत के लिए सही भुगतान माध्यम चुनें। थोड़ी-सी पहले की तैयारी आपके हर रुपए की कीमत बढ़ा देती है और विदेश यात्रा को सच में यादगार बनाती है।













