सार्वजनिक जीवन में किसी सरकार के प्रमुख के तौर पर नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक यात्रा 7 अक्टूबर 2001 को शुरू हुई थी, जब उन्होंने पहली बार गुजरात के मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की थी। 7 अक्टूबर 2026 को इस निरंतर प्रशासनिक कार्यकाल के 25 वर्ष पूरे हो चुके हैं। राज्य के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री पद तक के इस लंबे सफर के दौरान नरेंद्र मोदी को भारत की सीमाओं से परे वैश्विक स्तर पर कई सर्वोच्च राजकीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा गया है। उनके सम्मानों का यह दायरा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें एशिया, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व, कैरेबियन द्वीप समूह और प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के देश शामिल रहे हैं।
विदेश मंत्रालय का आधिकारिक आंकड़ा और पुरस्कारों का बढ़ता दायरा
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई 2025 तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम 27 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार दर्ज थे। इसके बाद के कालखंड में इथियोपिया, ओमान, सेशेल्स, इजरायल, स्वीडन, नॉर्वे, स्लोवाकिया, इंडोनेशिया और उज्बेकिस्तान की सरकारों द्वारा प्रदान किए गए 9 अन्य प्रतिष्ठित नागरिक अलंकरणों के जुड़ने से 2026 तक यह कुल आंकड़ा 36 तक पहुंच गया। यह लंबी फेहरिस्त विभिन्न महाद्वीपों में भारत के द्विपक्षीय संबंधों और कूटनीतिक पहुंच की व्यापकता को रेखांकित करती है।
शुरुआती वर्षों में खाड़ी और पड़ोसी देशों से मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिले शीर्ष विदेशी राजकीय अलंकरणों के क्रम की शुरुआत पश्चिमी एशिया से हुई थी। अप्रैल 2016 में सऊदी अरब ने उन्हें प्रतिष्ठित 'ऑर्डर ऑफ किंग अब्दुलअजीज' प्रदान किया था। इसके तत्काल बाद जून 2016 में पड़ोसी देश अफगानिस्तान ने अपने प्रमुख नागरिक सम्मान 'स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान' से उन्हें विभूषित किया।
साल 2018 में पश्चिमी एशियाई कूटनीति के तहत फिलिस्तीन ने विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को दिए जाने वाले अपने शीर्ष अलंकरण 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन' से प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित किया। इसी समय सीमा के दौरान पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक नेतृत्व के संदर्भ में उन्हें संयुक्त राष्ट्र की ओर से 'चैंपियन ऑफ द अर्थ अवॉर्ड' भी प्रदान किया गया था।
2019 और 2020: यूएई, मालदीव, बहरीन और अमेरिका का प्रतिष्ठित सम्मान
वर्ष 2019 विदेशी सरकारों से मिले पुरस्कारों के लिहाज से अत्यंत उल्लेखनीय साबित हुआ। अप्रैल 2019 में संयुक्त अरब अमीरात ने विदेशी नेताओं को दिए जाने वाले अपने सबसे बड़े नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ जायद' से उन्हें अलंकृत किया। इसके बाद जून 2019 में मालदीव ने 'ऑर्डर ऑफ द डिस्टींग्विश्ड रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन' भेंट किया। अगस्त 2019 में बहरीन की ओर से 'किंग हमद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां' प्रदान किया गया। इसी वर्ष रूस की सरकार ने अपने ऐतिहासिक 'ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल' से उन्हें सम्मानित करने का आधिकारिक ऐलान किया था।
दिसंबर 2020 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने में नेतृत्वकारी भूमिका के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'लीजन ऑफ मेरिट, चीफ कमांडर डिग्री' से नवाजा। यह प्रतिष्ठित सैन्य व राजकीय सम्मान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रदान किया गया था, जिसे प्रधानमंत्री की ओर से भारत के तत्कालीन राजदूत ने विधिवत ग्रहण किया था।
भूटान का ऐतिहासिक सम्मान और 2023 में महाद्वीपीय विस्तार
दिसंबर 2021 में भूटान ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो' प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपा। यह सम्मान सामान्यतः बेहद सीमित हस्तियों को दिया जाता है और मोदी इसे पाने वाले पहले विदेशी शासनाध्यक्ष बने। प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि को भारत और भूटान की अटूट मित्रता के नाम समर्पित किया था।
वर्ष 2023 में यूरोप, अफ्रीका और प्रशांत क्षेत्र के कई प्रमुख देशों ने अपने सर्वोच्च राजकीय सम्मान भारत के प्रधानमंत्री को सौंपे। जून 2023 में मिस्र ने अपना प्रमुख राजकीय सम्मान 'ऑर्डर ऑफ द नाइल' प्रदान किया। इसके अगले ही महीने जुलाई 2023 में फ्रांस ने अपने शीर्ष राष्ट्रीय सम्मान 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर' से उन्हें सम्मानित किया। अगस्त 2023 में ग्रीस ने 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर' से नवाजा। इससे पहले मई 2023 में प्रशांत महासागरीय देशों की यात्रा के समय फिजी ने 'कंपेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी' और पापुआ न्यू गिनी ने 'ऑर्डर ऑफ लोगोहू' प्रदान कर भारत के साथ प्रगाढ़ संबंधों को मान्यता दी थी।
2024 से 2025 के बीच लातिन अमेरिका, कैरेबियन और अफ्रीका से मिले पदक
रूस द्वारा 2019 में घोषित 'ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल' विदेश मंत्रालय की आधिकारिक सूची में 9 जुलाई 2024 की तारीख के साथ दर्ज किया गया। 2024 के दौरान ही नाइजीरिया ने उन्हें 'ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर' प्रदान किया। नवंबर 2024 में गुयाना ने 'ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस' और डोमिनिका ने 'डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया। इसके बाद दिसंबर 2024 में कुवैत ने अपने प्रतिष्ठित 'ऑर्डर ऑफ मुबारक अल-कबीर' से प्रधानमंत्री को नवाजा।
साल 2025 में भी यह सिलसिला निरंतर जारी रहा। मार्च 2025 में बारबाडोस ने 'ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम' और उसी महीने मॉरीशस ने 'ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन' दिया। अप्रैल 2025 में श्रीलंका की ओर से 'श्रीलंका मित्र विभूषण' मिला। जून 2025 में साइप्रस ने 'ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस III' प्रदान किया। जुलाई 2025 में घाना ने 'ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना', त्रिनिदाद एंड टोबैगो ने 'द ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो', ब्राजील ने 'ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस' तथा नामीबिया ने 'ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्वित्शिया मिराबिलिस' से प्रधानमंत्री को अलंकृत किया।
इथियोपिया और ओमान के सर्वोच्च अलंकरण
दिसंबर 2025 में अफ्रीका दौरे के समय इथियोपिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया' से सम्मानित किया। इस सम्मान को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 140 करोड़ भारतवासियों को समर्पित किया था। इस घोषणा के महज दो दिन बाद दिसंबर 2025 में ओमान के सुल्तान की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को 'ऑर्डर ऑफ ओमान, फर्स्ट क्लास' प्रदान किया गया, जिसने मध्य पूर्व और अफ्रीका के साथ भारत के गहरे कूटनीतिक रिश्तों पर मुहर लगाई।




















