मेघालय में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी तैयारी, जोवाई, तुरा और नोंगपोह में वैज्ञानिक प्लांट लगाने के लिए खोजी जा रही जमीनउत्तर भारत में नया मौसमी चक्र सक्रिय, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों में आंधी के साथ बौछारों के आसारनागपुर में बोले मोहन भागवत: वैश्विक सुरक्षा और लोक कल्याण के लिए भारतीय परंपराओं को अपनाना अनिवार्यबिहार 72वीं संयुक्त प्रतियोगिता प्रारंभिक परीक्षा फिर टली, 1,189 पदों की भर्ती के लिए नई तारीख का इंतजारशिमला के ढली संजौली बायपास पर भारी भूस्खलन, मलबे की चपेट में आईं गाड़ियांमिजोरम में 13 अक्टूबर को सजेगा नॉर्थ ईस्ट बैंकर्स कॉन्क्लेव, ज्योतिरादित्य सिंधिया करेंगे 10 विकास परियोजनाओं का शुभारंभकर्जधारकों को एचडीएफसी बैंक का तोहफा, एमसीएलआर दरों में 15 बेसिस पॉइंट तक की राहतनवजात बच्चों में सेरेब्रल पाल्सी का खतरा और प्रसव के समय सही मेडिकल देखरेख का महत्वकच्चे तेल में तेजी और मजबूत डॉलर से सोने पर दबाव, क्या 4,100 डॉलर का दायरा टूटेगासरकार के मुखिया के तौर पर 25 साल पूरे होने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई नरेंद्र मोदी की सराहना
मेघालय में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी तैयारी, जोवाई, तुरा और नोंगपोह में वैज्ञानिक प्लांट लगाने के लिए खोजी जा रही जमीनमेघालय
7 अक्तू॰ 2026, 3:17 pm (2 घंटे पहले)· 2

मेघालय में कचरा प्रबंधन को लेकर बड़ी तैयारी, जोवाई, तुरा और नोंगपोह में वैज्ञानिक प्लांट लगाने के लिए खोजी जा रही जमीन

मेघालय सरकार जोवाई, तुरा और नोंगपोह में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त जगहों की पहचान कर रही है, साथ ही राज्य भर में स्वच्छता अभियान भी तेज किया गया है।

मेघालय सरकार ने राज्य के प्रमुख शहरी व ग्रामीण इलाकों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री स्नियावभालंग धर ने स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत नोंगपोह से सोहरा तक लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में आयोजित एक विशाल स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। इस अभियान के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और वैज्ञानिक स्वरूप दिया जाएगा।

प्रमुख शहरों में वैज्ञानिक कचरा संयंत्र लगाने की योजना

उप मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रशासन जोवाई, तुरा और नोंगपोह में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े गांवों में कचरा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने के लिए ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के साथ समन्वय बनाने के विकल्पों पर भी विचार चल रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मेघालय के शहरों और कस्बों में कचरे के वैज्ञानिक और प्रभावी निस्तारण की स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।

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सामूहिक भागीदारी से स्वच्छ मेघालय का संकल्प

“एक दिन, एक साथ, एक घंटा” थीम पर केंद्रित इस 100 किलोमीटर लंबे स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों, दोरबार श्नोंग, विभिन्न सामुदायिक संगठनों, सरकारी विभागों और आम नागरिकों ने व्यापक स्तर पर भाग लिया। स्नियावभालंग धर ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए हर नागरिक, समाज और संस्थान की निरंतर भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छता केवल एक मौसमी अभियान न रहकर लोगों की रोजमर्रा की आदत और साझी प्रतिबद्धता बननी चाहिए।

बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यावरण संरक्षण की चुनौती

मेघालय में पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की नैसर्गिक सुंदरता को सुरक्षित रखना और बस्तियों को स्वच्छ बनाए रखना सभी का मिलाजुला कर्तव्य है। सरकार शहरी व ग्रामीण विकास महकमों, स्थानीय समुदायों, शिक्षण संस्थानों, युवा संगठनों और महिला समूहों के बीच आपसी तालमेल को और सुदृढ़ करेगी ताकि एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ मेघालय का निर्माण संभव हो सके।

सवाल-जवाब

मेघालय में किन शहरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन संयंत्र लगाने की योजना है?
राज्य सरकार जोवाई, तुरा और नोंगपोह में वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र स्थापित करने के लिए जमीन चिह्नित कर रही है।
स्वच्छता अभियान के तहत कितनी दूरी में सफाई अभियान चलाया गया?
नोंगपोह से सोहरा तक लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में यह विशाल स्वच्छता अभियान चलाया गया।
यह अभियान किस राष्ट्रीय पहल और थीम के तहत आयोजित हुआ?
यह अभियान स्वच्छता ही सेवा 2026 के अंतर्गत “एक दिन, एक साथ, एक घंटा” थीम पर आयोजित किया गया।
बड़े गांवों में कचरा प्रबंधन के लिए क्या रणनीति अपनाई जा रही है?
बड़े गांवों में कचरा निस्तारण सुविधाओं के विकास के लिए ग्रामीण विकास योजनाओं के साथ समन्वय बनाने की तैयारी है।
इस स्वच्छता अभियान में किन-किन समूहों ने भाग लिया?
इसमें छात्रों, दोरबार श्नोंग, सामुदायिक संगठनों, सरकारी कर्मचारियों और स्थानीय नागरिकों ने मिलकर हिस्सा लिया।
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