मेघालय सरकार ने राज्य के प्रमुख शहरी व ग्रामीण इलाकों में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। उप मुख्यमंत्री स्नियावभालंग धर ने स्वच्छता ही सेवा 2026 अभियान के तहत नोंगपोह से सोहरा तक लगभग 100 किलोमीटर के दायरे में आयोजित एक विशाल स्वच्छता अभियान में हिस्सा लिया। इस अभियान के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को पूरी तरह आधुनिक और वैज्ञानिक स्वरूप दिया जाएगा।
प्रमुख शहरों में वैज्ञानिक कचरा संयंत्र लगाने की योजना
उप मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रशासन जोवाई, तुरा और नोंगपोह में अत्याधुनिक वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन केंद्र स्थापित करने के लिए उपयुक्त भूमि की तलाश कर रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े गांवों में कचरा प्रबंधन ढांचे को मजबूत करने के लिए ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के साथ समन्वय बनाने के विकल्पों पर भी विचार चल रहा है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य मेघालय के शहरों और कस्बों में कचरे के वैज्ञानिक और प्रभावी निस्तारण की स्थायी व्यवस्था तैयार करना है।
सामूहिक भागीदारी से स्वच्छ मेघालय का संकल्प
“एक दिन, एक साथ, एक घंटा” थीम पर केंद्रित इस 100 किलोमीटर लंबे स्वच्छता अभियान में विद्यार्थियों, दोरबार श्नोंग, विभिन्न सामुदायिक संगठनों, सरकारी विभागों और आम नागरिकों ने व्यापक स्तर पर भाग लिया। स्नियावभालंग धर ने कहा कि स्वच्छता केवल सरकारी तंत्र की जिम्मेदारी नहीं हो सकती, बल्कि इसके लिए हर नागरिक, समाज और संस्थान की निरंतर भागीदारी अनिवार्य है। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छता केवल एक मौसमी अभियान न रहकर लोगों की रोजमर्रा की आदत और साझी प्रतिबद्धता बननी चाहिए।
बढ़ते पर्यटन के बीच पर्यावरण संरक्षण की चुनौती
मेघालय में पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य की नैसर्गिक सुंदरता को सुरक्षित रखना और बस्तियों को स्वच्छ बनाए रखना सभी का मिलाजुला कर्तव्य है। सरकार शहरी व ग्रामीण विकास महकमों, स्थानीय समुदायों, शिक्षण संस्थानों, युवा संगठनों और महिला समूहों के बीच आपसी तालमेल को और सुदृढ़ करेगी ताकि एक स्वच्छ, हरित और टिकाऊ मेघालय का निर्माण संभव हो सके।



















