देशभर में आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले मिलावटखोरों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने चौतरफा कार्रवाई तेज कर दी है। गुजरात से लेकर कर्नाटक और महाराष्ट्र तक, कई राज्यों में खाद्य तेल और फलों में की जा रही खतरनाक मिलावट का पर्दाफाश हुआ है। गुजरात के पाटन जिले में अपराध शाखा और खाद्य विभाग की संयुक्त टीम ने छापेमारी कर 14,709 किलोग्राम मिलावटी खाद्य तेल जब्त किया है। इसके साथ ही एक ट्रक से 210 डिब्बे खराब तेल बरामद किया गया है। वहीं, कर्नाटक के उडुपी में रसायन का उपयोग करके पकाए जा रहे करीब 10,890 किलोग्राम केले जब्त किए गए हैं, जबकि महाराष्ट्र में खुले तेल की बिक्री पर सख्त पाबंदी लागू कर दी गई है।
पाटन में दो साल से फल-फूल रहा था मिलावटी तेल का कारोबार
गुजरात के पाटन क्षेत्र में चल रहे मिलावट के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए जांच एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर गंदा और अमानक तेल बरामद किया है। एफडीए (खाद्य एवं औषधि प्रशासन), क्राइम ब्रांच और स्थानीय खाद्य विभाग ने गुप्त सूचना के आधार पर इस अनधिकृत कारखाने पर संयुक्त छापा मारा। जांच में सामने आया कि इस फैक्ट्री में सोयाबीन तेल के नाम पर बेहद घटिया और वेस्टेज तेल मिलाया जा रहा था, जो मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। अधिकारियों ने मौके से पैकिंग के लिए पूरी तरह तैयार किए गए 40 डिब्बे भी जब्त किए हैं।
मुनाफा कमाने की नीयत से यह गिरोह इस मिलावटी तेल को नामी और नामचीन कंपनियों के ब्रांडेड डिब्बों में पैक करके मार्केट में खपाता था। छापेमारी के दौरान टीम को बड़ी और स्थापित कंपनियों के जाली लेबल तथा रैपर बरामद हुए हैं। जांच अधिकारियों के अनुसार यह अवैध यूनिट पिछले दो साल से बेखौफ संचालित हो रही थी। प्राथमिक जांच से संकेत मिले हैं कि इस मिलावटी खाद्य तेल की खेप केवल गुजरात तक सीमित नहीं थी, बल्कि पड़ोसी राज्यों की मंडियों और बाजारों में भी बड़े पैमाने पर सप्लाई की जा रही थी। फिलहाल टीम बिल बुक, डिस्पैच रजिस्टर और वित्तीय लेन-देन की गहन जांच कर रही है ताकि इस पूरे सिंडिकेट के मुख्य सरगनाओं और वितरण नेटवर्क की पहचान की जा सके।
महाराष्ट्र में खुले और बिना लेबल वाले तेल पर रोक, 10 लाख जुर्माना और उम्रकैद
खाद्य तेलों में लगातार सामने आ रही मिलावट की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए महाराष्ट्र सरकार के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने भी सख्त रुख अपनाया है। राज्य में बिना पैकेजिंग, खुले और बिना लेबल वाले खाद्य तेल की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। एफडीए के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, तेल उत्पादकों, प्रसंस्करण इकाइयों से लेकर खुदरा विक्रेताओं तक, पूरी सप्लाई चेन में शामिल सभी कारोबारियों को तय मानकों का कड़ाई से पालन करना अनिवार्य होगा।
महाराष्ट्र एफडीए कमिश्नर तुकाराम मुंडे ने मिलावटखोरों को चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा। यदि कोई कारोबारी अमानक, खुले या मिलावटी तेल की बिक्री करता पाया जाता है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, मामले की गंभीरता के आधार पर दोषी व्यक्ति को आजीवन कारावास तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
कर्नाटक के उडुपी में केमिकल से पकाए जा रहे थे केले, 10890 किलो माल सीज
दूसरी तरफ, कर्नाटक के उडुपी जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग ने फल पकाने वाले अवैध ठिकानों पर समानांतर छापेमारी अभियान चलाया। गुप्त जानकारी के आधार पर अधिकारियों ने अलेयूर, केमथुर और डुगलीपाडु गांवों में स्थित कई गोदामों और दुकानों पर अचानक दबिश दी। वहां केलों को प्राकृतिक रूप से पकाने के बजाय खतरनाक रसायनों का इस्तेमाल करके पकाया जा रहा था।
सर्च ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने कुल 10,890 किलोग्राम रसायनयुक्त केले जब्त किए, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग 8,71,000 रुपये बताई गई है। खाद्य विशेषज्ञों का कहना है कि फलों को पकाने के लिए प्रयुक्त जहरीले केमिकल शरीर में पाचन तंत्र, यकृत और किडनी को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। प्रशासन ने इस मामले में संलिप्त व्यापारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है और स्पष्ट किया है कि बाजार में बिकने वाली सभी खाद्य सामग्रियों की गुणवत्ता की नियमित जांच जारी रहेगी।





















