नेपाल में भारी बारिश के कारण आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद भारत ने 10 टन आपदा राहत और चिकित्सा सामग्री की पहली किश्त काठमांडू भेजी है। नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा की वजह से कम से कम 72 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। संकट की इस घड़ी में राहत और बचाव कार्यों को मजबूती देने के लिए आपातकालीन सहायता सामग्री काठमांडू पहुंचा दी गई है।
राहत और आवश्यक चिकित्सा सामग्री की आपूर्ति
भारत द्वारा भेजी गई इस राहत सामग्री में आपातकालीन चिकित्सा किट, अस्थायी आश्रय उपकरण, स्वच्छता उत्पाद और आवश्यक सूखा भोजन शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विस्थापित हुए परिवारों को तुरंत राहत प्रदान करना है। अधिकारियों के अनुसार जमीनी हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और नेपाल की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त राहत सामग्री भी जुटाई जा रही है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर का वक्तव्य
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस मानवीय सहायता मिशन की जानकारी साझा की। उन्होंने पुष्टि की कि भारत की आपदा राहत सामग्री और चिकित्सा सहायता काठमांडू पहुंच चुकी है। उन्होंने दोहराया कि संकट के समय भारत अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा है। इसके जवाब में नेपाल ने इस त्वरित सहायता के लिए आभार व्यक्त करते हुए दोनों देशों के बीच की गहरी दोस्ती की सराहना की।
नेपाल में बाढ़ और तबाही की स्थिति
नेपाल में बीते कई दिनों से हो रही मूसलाधार मानसूनी बारिश के कारण नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में भूस्खलन हुआ है। इससे सड़कों, पुलों और आवासीय मकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। अब तक 72 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि सैकड़ों लापता लोगों की तलाश जारी है। मुख्य मार्ग बंद होने और संचार सेवाएं बाधित होने से राहत दल को दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर इस राहत घोषणा को लेकर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। जहां कई उपयोगकर्ताओं ने संकट के समय पड़ोसी देश की मदद करने की भारत की पहल की प्रशंसा की, वहीं कुछ लोगों ने असम, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे भारतीय राज्यों में जारी बाढ़ की स्थिति का हवाला देते हुए देश के भीतर भी समान रूप से त्वरित राहत कार्य चलाए जाने की मांग की।


























