खेतों में महीनों तक हाड़तोड़ मेहनत करने के बाद अपनी उपज लेकर मंडी पहुंचने वाले किसानों को एक बार फिर मौसम और बदइंतजामी की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित अनाज मंडी में सोमवार रात अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। मंडी परिसर में पर्याप्त टीन शेड और सुरक्षित भंडारण स्थल की कमी के चलते किसानों का भारी मात्रा में धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ था। मूसलाधार बारिश के पानी में खुले चबूतरों और रास्तों पर रखा यह धान पूरी तरह भीग गया, जिससे किसानों की महीनों की कमाई पर पानी फिरने की नौबत आ गई है।
खुले में भीगी फसल और व्यापारियों की मनमानी
बारिश के बाद मंडी का मंजर बदल गया और किसानों की परेशानियां कई गुना बढ़ गईं। खुले में रखे अनाज में नमी आने का हवाला देकर खरीदारों और व्यापारियों ने खरीद की कीमतों में भारी कटौती कर दी है। जिन फसलों की कीमत पहले 4000 रुपये से लेकर 4300 रुपये प्रति क्विंटल तक आंकी जा रही थी, उसी फसल के लिए अब केवल 3000 रुपये से 3500 रुपये प्रति क्विंटल तक की बोलियां लगाई जा रही हैं। किसानों का साफ कहना है कि मंडी में फसलों को सुरक्षित रखने के पुख्ता इंतजाम न होने की सजा सीधे तौर पर अन्नदाताओं को अपनी जेब से भुगतनी पड़ रही है।
किसानों का दर्द: उम्मीद से बेहद कम मिल रही कीमत
मंडी में अपनी धान की 1509 किस्म लेकर पहुंचे किसान रामपाल ने बताया कि उन्होंने अच्छी फसल की उम्मीद में महीनों पसीना बहाया था। उन्हें आशा थी कि इस बार उनकी 1509 किस्म की उपज को कम से कम 4000 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलेगा। इसके उलट, बारिश में अनाज भीगने के बाद व्यापारी अब केवल 3400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही भाव दे रहे हैं। रामपाल का कहना है कि किसान खेतों में दिन-रात काम करता है, लेकिन मंडी में सुरक्षा के साधन न मिलने से उसका सारा मुनाफा नुकसान में बदल जाता है। प्रशासन को पहले से ही बारिश से बचाव के मजबूत इंतजाम करने चाहिए थे ताकि अनाज को नुकसान न पहुंचे।
सूखे धान पर भी गिर रहे दाम
एक अन्य किसान मनवीर सिंह अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली में धान भरकर मंडी पहुंचे थे। उनका आरोप है कि व्यापारी मौसम की मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम तय कर रहे हैं। मनवीर सिंह के अनुसार, जो धान पूरी तरह सूखा हुआ है, उसके लिए भी उचित दाम नहीं दिए जा रहे हैं। सामान्य तौर पर 4200 से 4300 रुपये प्रति क्विंटल बिकने वाली उपज को व्यापारी 3500 से 3700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर खरीदने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि मंडी में किसानों की शिकायत सुनने वाला कोई अधिकारी मौजूद नहीं है और व्यवस्था पूरी तरह लचर बनी हुई है।
मंडी प्रशासन से सुरक्षा और मुआवजे की मांग
फसल सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए किसान नंद लाल कटारिया ने कहा कि खेत तैयार करने, बीज बोने, सिंचाई करने से लेकर फसल की कटाई और उसे ढुलाई करके मंडी तक लाने में भारी लागत और शारीरिक श्रम लगता है। यदि मंडी प्रबंधन ने बारिश से बचाने के लिए पर्याप्त शेड या तिरपाल की व्यवस्था की होती, तो फसल खराब नहीं होती। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक विफलता का खामियाजा गरीब किसान उठा रहा है। वहीं किसान विद्या सागर ने स्पष्ट किया कि खेती के दौरान मौसम के उतार-चढ़ाव से पहले ही किसान जूझते हैं। मंडी प्रशासन को चाहिए कि वह खुले में पड़े धान की तुरंत सुरक्षा सुनिश्चित करे और किसानों को उनकी मेहनत का पूरा और वाजिब मूल्य दिलाए।



















