मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर देश की सियासत में टकराव चरम पर पहुंच गया है। बिहार और उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह राजनीतिक विवाद अब संसद के विशेष सत्र की मांग तक पहुंच चुका है। विपक्षी दलों द्वारा चुनाव आयोग की निष्पक्षता और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने आक्रामक रुख अपना लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव को सीधे तौर पर ललकारते हुए कहा है कि सरकार इस पूरे मामले पर सदन में खुली बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने विपक्ष से कहा कि अगर उनमें राजनीतिक साहस है तो वे संसद का विशेष सत्र बुलाकर चर्चा करें, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी के पास इस मसले पर छुपाने के लिए कुछ भी नहीं है।
यह तीखा राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में विरोध प्रदर्शन आयोजित कर रहा है। विपक्षी दल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने और मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं। राजधानी दिल्ली में विपक्ष की तरफ से आयोजित किए जा रहे विरोध कार्यक्रमों और रविवार को रामलीला मैदान में प्रस्तावित महारैली के बीच गृह मंत्री के इस बयान ने राष्ट्रीय राजनीति का तापमान कई गुना बढ़ा दिया है।
लखनऊ में बीजेपी कार्यकारिणी में अमित शाह का कड़ा रुख
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद पर विस्तार से पार्टी का पक्ष रखा। उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला और कहा कि विपक्षी नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर बेबुनियाद आरोप लगाने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से संसद में आकर बात करनी चाहिए।
गृह मंत्री अमित शाह ने राहुल गांधी और अखिलेश यादव को नाम लेकर चुनौती दी और कहा, "'राहुल बाबा,' मैं आपको और अखिलेश यादव दोनों को यहीं और इसी वक्त चुनौती देता हूं: भारतीय जनता पार्टी संसद में इस पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार की तरफ से सब कुछ पारदर्शी है और किसी भी नियम या प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी नहीं की गई है। उन्होंने विपक्षी नेताओं से सवाल किया कि जब भी संसद का सत्र चलता है, तब विपक्ष चर्चा में भाग लेने के बजाय केवल शोर-शराबा और हंगामा क्यों करता है।
संसद के विशेष सत्र की चुनौती और विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल
अमित शाह ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि यदि विपक्ष को लगता है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कोई विसंगति है, तो वे संसद का विशेष सत्र आयोजित करने की मांग को आगे बढ़ाएं और पटल पर सभी तथ्य रखें। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन का असल मकसद किसी समस्या का समाधान निकालना नहीं, बल्कि केवल संवैधानिक संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाना है। गृह मंत्री ने कहा कि जब भी संसद की कार्यवाही शुरू होती है, विपक्षी दल बहस से भागते हैं और सदन को चलने नहीं देते।
उन्होंने कहा कि जब भी कोई गंभीर राष्ट्रीय या चुनावी मुद्दा सामने आता है, विपक्ष चर्चा की मांग का दिखावा करता है, लेकिन जब सरकार सदन में जवाब देने के लिए तैयार होती है, तब विपक्षी सांसद वेल में आकर नारेबाजी करते हैं और कार्यवाही को बाधित करते हैं। शाह ने आरोप लगाया कि विपक्ष केवल बाहर रहकर मीडिया और जनसभाओं में भ्रामक प्रचार करना चाहता है, जबकि लोकतांत्रिक परंपराओं के तहत हर विवाद का निपटारा संसद के भीतर तर्कों और तथ्यों के आधार पर होना चाहिए।
चुनावी हार और चुनाव आयोग पर आरोप: अमित शाह का पलटवार
संबोधन के दौरान गृह मंत्री ने विभिन्न राज्यों के हालिया चुनावी नतीजों का ब्योरा देते हुए कांग्रेस और विपक्षी दलों की कार्यशैली का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने कई राज्यों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। हरियाणा में भारतीय जनता पार्टी ने सर्वाधिक सीटें हासिल करके अपनी सरकार बनाई। महाराष्ट्र में एनडीए गठबंधन सबसे बड़ा जनादेश पाकर सत्ता में आया। बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुआ। दिल्ली में तीन दशकों के लंबे इंतजार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने सरकार बनाई। पुडुचेरी में पार्टी ने एक बार फिर सरकार बनाई, जबकि असम में 100 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार जीत की हैट्रिक लगाई गई। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में ममता दीदी की राजनीतिक जमीन को पूरी तरह चुनौती दी गई।
अमित शाह ने कहा कि इन लगातार चुनावी पराजयों के बाद विपक्षी दलों को यह अच्छी तरह समझ आ गया है कि वे जनता का विश्वास खो चुके हैं और लोकतांत्रिक चुनाव जीतना उनके वश में नहीं रहा। उन्होंने खेल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई टीम मैच हार जाती है, तो स्वाभाविक तौर पर उससे यह उम्मीद की जाती है कि वह अपनी कमजोरियों पर आत्ममंथन करे और मैदान में ज्यादा पसीना बहाए। लेकिन राहुल गांधी, अखिलेश यादव और INDIA गठबंधन के अन्य नेता आत्ममंथन करने के बजाय हार का ठीकरा अंपायर के सिर फोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल अपनी पराजय को स्वीकार करने के बजाय चुनाव आयोग पर बेईमानी और वोट चोरी का झूठा आरोप मढ़ने लगते हैं।
विपक्षी गठबंधन का 'जन महाभियोग' और आगे की रणनीति
दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने अभियान को धार देने में जुटा हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने शुरुआत में इस विरोध प्रदर्शन को 'मॉक पार्लियामेंट' का नाम दिया था, जिसे बाद में बदलकर 'जन महाभियोग' कर दिया गया। यह कार्यक्रम शुक्रवार को दिल्ली में आयोजित होना था, लेकिन तेज बारिश के कारण इसे एक दिन के लिए टालना पड़ा। अब यह शनिवार 31 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस प्रतीकात्मक कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव प्रस्तुत करने की भूमिका निभा रहे हैं। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यह जनता के बीच किया जा रहा एक प्रतीकात्मक राजनीतिक प्रदर्शन है, न कि संविधान के तहत संचालित होने वाली वास्तविक महाभियोग प्रक्रिया।
इसके तुरंत बाद, विपक्षी दलों ने रविवार 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में एक बड़ी महारैली का आह्वान किया है। इस रैली का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की कवायद को तुरंत रद्द करवाना और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा मांगना है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को देश भर के लोगों और कार्यकर्ताओं से इस रैली में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि वे उन सभी नागरिकों से रामलीला मैदान पहुंचने का आह्वान करते हैं जो लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी निष्पक्षता की रक्षा करना चाहते हैं। दोनों पक्षों के इस कड़े रुख से आने वाले दिनों में यह सियासी संग्राम और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
























