हरियाणा के फरीदाबाद स्थित बीके सिविल अस्पताल में सरकारी धन की कथित बंदरबांट का एक चौंकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। अस्पताल परिसर और वर्कशॉप में महीनों से बंद पड़ी चार एंबुलेंसों के नाम पर लगभग 50 लाख रुपये का डीजल फूंक दिया गया। इस वित्तीय गड़बड़ी का खुलासा होते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया, जिसके बाद नेशनल रूरल हेल्थ मिशन के महानिदेशक डॉ वीरेंदर यादव स्वयं फरीदाबाद पहुंचे और मामले की गहन पड़ताल के लिए एक विशेष जांच समिति का गठन किया। इस समिति को 5 दिनों के भीतर पूरी पड़ताल कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि समिति की सिफारिशें मिलते ही दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
फ्यूल कार्ड के ऑडिट में खुला फर्जीवाड़े का खेल
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत पंचकूला स्थित विभागीय मुख्यालय द्वारा एंबुलेंस के फ्यूल कार्ड लेनदेन की नियमित जांच के दौरान हुई। मुख्यालय के अधिकारियों ने जब खर्च और वास्तविक आवाजाही का मिलान किया, तो सामने आया कि कई वाहन बिना एक किलोमीटर चले ही लगातार पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में डीजल ले रहे थे। यह कोई भूल या एकाध बार का मामला नहीं था, बल्कि सुनियोजित तरीके से बार-बार डीजल खरीदे जाने की प्रविष्टियां दर्ज की जा रही थीं। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, वाहनों के स्थिर खड़े रहने के बावजूद करीब 50 लाख रुपये का ईंधन कागजों में खरीद दिखाया गया। सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि जिस समयावधि में यह ईंधन भरा गया, उस दौरान चारों वाहन अस्पताल परिसर और वर्कशॉप से बाहर तक नहीं निकले थे।
मोर्चरी और वर्कशॉप में खड़ी गाड़ियों में भरता रहा तेल
अस्पताल रिकॉर्ड की छानबीन में यह विवरण दर्ज मिला कि चार में से दो एंबुलेंस पिछले तीन से चार महीनों से अस्पताल की मोर्चरी के पास लावारिस हालत में खड़ी थीं। जमीन पर पहिए थमे रहने के बाद भी 11 अक्टूबर तक इनके फ्यूल कार्ड से लगातार पेट्रोल पंप पर डीजल खरीद की प्रविष्टियां चढ़ाई जा रही थीं। शेष दो एंबुलेंसों की स्थिति भी ऐसी ही पाई गई, जिनमें से एक जनवरी माह से और दूसरी अगस्त से अधिकृत एजेंसी की वर्कशॉप में मरम्मत के इंतजार में खड़ी थीं। इन निष्क्रिय वाहनों के कार्ड से भी क्रमशः 16 सितंबर और 11 अक्टूबर तक भारी मात्रा में डीजल उठाने का औपचारिक रिकॉर्ड मिला है। सरकारी एंबुलेंस सेवा के नाम पर जारी कार्ड्स के इस तरह दुरुपयोग ने समूचे स्वास्थ्य ढांचे की निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल दाग दिए हैं।
राजनीतिक तकरार और सरकार का जांच आदेश
इस वित्तीय अनियमितता की खबर सार्वजनिक होते ही राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर सरकार के प्रशासनिक तंत्र पर सवाल उठाए। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन में ऐसा तंत्र काम कर रहा है जहां खड़ी गाड़ियां लाखों रुपये का ईंधन निगल रही हैं। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि प्रदेश स्तर पर इस किस्म की घटनाएं व्यापक स्तर पर हो सकती हैं और निचले स्तर के कर्मचारियों की आड़ में शीर्ष अफसरों को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजनीतिक दबाव और मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने खुद घटनाक्रम का संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच के निर्देश जारी कर दिए।





















