घरेलू काम करते समय जरा सा फिसल जाना या हल्की सी ठोकर लगने पर भी फ्रैक्चर हो जाना अक्सर एक गंभीर अंदरूनी समस्या की ओर इशारा करता है। कई बार महिलाएं ऐसे छोटे हादसों को महज एक सामान्य चोट समझकर अनदेखा कर देती हैं, जबकि यह असल में हड्डियों के अंदरूनी ढांचे की कमजोरी का लक्षण हो सकता है। विशेष रूप से 30 वर्ष की आयु पार करने के बाद महिलाओं के लिए अपनी हड्डियों के स्वास्थ्य पर निरंतर नजर रखना बहुत जरूरी हो जाता है। इसके बाद 50 वर्ष की उम्र के आसपास शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव ऑस्टियोपोरोसिस की आशंका को काफी हद तक बढ़ा देते हैं। इस स्थिति में सही पोषण, पौष्टिक खानपान और स्वस्थ जीवनशैली हड्डियों के घनत्व को सुरक्षित रखने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जीवनशैली में बदलाव और पोषक तत्वों की कमी
आजकल तेजी से बदलती दिनचर्या और खानपान के तौर-तरीकों का सीधा असर महिलाओं की शारीरिक तंदुरुस्ती पर पड़ रहा है। घरों में तैयार किए जाने वाले पारंपरिक और संतुलित आहार के स्थान पर बाहर के खाद्य पदार्थों का चलन बढ़ चुका है। इसके परिणामस्वरूप दैनिक भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियों, ताजे सलाद, कच्ची सब्जियों और मौसमी फलों की मौजूदगी लगातार कम होती जा रही है, जो हड्डियों के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्राथमिक स्रोत होते हैं।
सर्दियों की हरी सब्जियों से पोषण जुटाने के तरीके
अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक डॉ. रजिता के अनुसार, हड्डियों के ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए खानपान की आदतों में समय रहते सुधार करना अनिवार्य है। सर्दियों का समय हरी और ताजी सब्जियों के नियमित सेवन के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इस ऋतु के दौरान बाजार में पालक, मेथी, मूली और गाजर जैसी सब्जियां बहुत सरलता से मिल जाती हैं। महिलाओं को इन्हें अपने दैनिक भोजन का नियमित हिस्सा बनाना चाहिए।
इसके साथ ही बथुए का साग भी शरीर के लिए बेहद गुणकारी है। बथुए का सेवन पारंपरिक साग के तौर पर किया जा सकता है या फिर इसका रायता बनाकर भी आहार में शामिल किया जा सकता है। जो लोग सीधे हरी सब्जियां खाने से कतराते हैं, उनके लिए पालक का गरमा-गरम सूप पीना या पालक को बारीक काटकर आटे में गूंदकर उसके पराठे तैयार करना हरी सब्जियों को भोजन में शामिल करने के आसान और स्वादिष्ट तरीके हैं।
महंगे सूखे मेवों के बीच मूंगफली का किफायती विकल्प
हड्डियों के घनत्व और ताकत को बनाए रखने के लिए सूखे मेवे भी काफी उपयोगी साबित होते हैं। हालांकि बाजार में ड्राई फ्रूट्स के दाम अधिक होने की वजह से हर परिवार इन्हें रोजाना की खुराक में शामिल नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में मूंगफली एक बेहद असरदार और सस्ता विकल्प बनती है। रोजाना सीमित मात्रा में मूंगफली खाने से शरीर को जरूरी प्रोटीन, मैग्नीशियम और अन्य आवश्यक तत्व सहजता से प्राप्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त बादाम, तिल, कद्दू के बीज, चिया सीड्स और अलसी को भी अपनी डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है।
कैल्शियम और विटामिन डी का तालमेल
हड्डियों को अंदर से ठोस रखने के लिए सिर्फ हरी सब्जियों का सेवन ही काफी नहीं होता। अस्थि ऊतकों को कैल्शियम, विटामिन डी, प्रोटीन और मैग्नीशियम के संतुलित मेल की आवश्यकता होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए नियमित तौर पर दूध, दही, पनीर, दालें और राजमा जैसे पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता देनी चाहिए। मांसाहारी या अंडा खाने वाले लोगों के लिए अंडे की जर्दी और मछली भी विटामिन डी के अच्छे स्रोत हैं। विटामिन डी भोजन से मिलने वाले कैल्शियम को आंतों में सोखने और हड्डियों तक पहुंचाने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
जांच, धूप और सक्रिय दिनचर्या का महत्व
महिलाओं को इस चेतावनी का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि अगर वे बार-बार संतुलन खोकर गिर रही हैं, मामूली धक्के से हड्डी टूटने की नौबत आ रही है या रोजमर्रा के हल्के कामकाज में भी फ्रैक्चर का सामना करना पड़ रहा है, तो यह हड्डियों के खोखलेपन का संकेत है। ऐसे हालात में चिकित्सक से परामर्श लेकर बोन मिनरल डेंसिटी (BMD) जांच करवानी चाहिए ताकि हड्डियों के वास्तविक घनत्व का सटीक आकलन हो सके।
खानपान के अलावा शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, नियमित व्यायाम करना, रोजाना कुछ देर टहलना और पर्याप्त समय धूप में बिताना भी हड्डियों की सलामती के लिए बहुत गुणकारी है। प्राकृतिक धूप से मिलने वाला विटामिन डी हड्डियों की बनावट को सुरक्षा देता है। इसीलिए 30 वर्ष की उम्र पूरी होते ही महिलाओं को अपनी खुराक और जीवनशैली दोनों में जरूरी सुधार कर लेने चाहिए, जिससे उम्र के 50वें पड़ाव और उसके बाद ऑस्टियोपोरोसिस जैसी गंभीर व्याधियों के खतरे से बचा जा सके।






















